➤ डयोड-हणोगी टनल का ट्रायल पूरा, सुरक्षा कमियां दूर होते ही यातायात शुरू होने की उम्मीद
➤ दो से तीन दिन में खुल सकता है टनल मार्ग, मंडी-कुल्लू सफर में 15 से 20 मिनट की होगी बचत
➤ 2600 करोड़ के प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा, शुरुआती चरण में एक ही टनल से होगी वाहनों की आवाजाही
कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर डयोड-हणोगी टनल से यातायात शुरू करने की तैयारी के बीच सोमवार को किए गए ट्रायल में सुरक्षा से जुड़ी कुछ कमियां सामने आ गईं। इसके चलते टनल को तत्काल नियमित यातायात के लिए नहीं खोला गया। अधिकारियों ने इन कमियों को दूर कर सभी सुरक्षा मानक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। अब अधिकारियों के अनुसार जरूरी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद दो से तीन दिन में यातायात शुरू किया जा सकता है।
मंडी से कुल्लू के बीच यातायात के लिए इस टनल का खुलना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टनल शुरू होने के बाद यात्रियों को जोगणी माता मंदिर के समीप लगने वाले जाम और पुराने मार्ग पर पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण बार-बार होने वाले अवरोध से राहत मिलने की उम्मीद है। इससे मंडी-कुल्लू सफर करीब 15 से 20 मिनट कम होने की संभावना है।
ट्रायल में सामने आईं कमियां, सुरक्षा जांच के बाद ही खुलेगी टनल
सोमवार को एनएचएआई के बोर्ड सदस्य विपनेश शर्मा की मौजूदगी में डयोड और हणोगी टनल से यातायात का ट्रायल किया गया। ट्रायल के दौरान टनल के भीतर और बाहर की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया गया। इसी दौरान कुछ सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आईं।
इन कमियों को दूर करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। एनएचएआई की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वाहनों की नियमित आवाजाही शुरू करने से पहले सभी सुरक्षा मानक पूरे हों। यही वजह है कि ट्रायल के बाद तत्काल यातायात शुरू करने के बजाय पहले जरूरी सुधार और सुरक्षा व्यवस्था पूरी करने का फैसला लिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार इन व्यवस्थाओं को पूरा करने में करीब दो से तीन दिन का समय लग सकता है। इसके बाद सुरक्षा मानक पूरे होने पर टनल से यातायात शुरू किया जा सकता है।
टनल के बाहर पुराने मार्ग से जुड़ने वाले हिस्से का भी निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान केवल टनल के अंदर की व्यवस्थाओं को ही नहीं देखा गया, बल्कि बाहर निकलने के बाद पुराने मार्ग से जुड़ने वाले स्थान का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टनल से बाहर आने वाले वाहनों को किसी तरह की परेशानी न हो और दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।
टनल को यातायात के लिए खोलने से पहले हर जरूरी पहलू की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी सुरक्षा मानकों के पूरा होने के बाद ही वाहनों की आवाजाही शुरू की जाएगी।
जयराम ठाकुर ने भी लिया टनलों का जायजा
ट्रायल के बाद पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने टनलों का जायजा लिया और अधिकारियों से व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली।
इस दौरान टनल से यातायात शुरू करने से पहले सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों की ओर से किए जा रहे निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यही है कि यातायात बहाल होने के बाद वाहन चालकों और यात्रियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
जोगणी माता मंदिर के पास जाम और पत्थर गिरने से मिलेगी राहत
डयोड टनल शुरू होने के बाद मंडी से कुल्लू तक का सफर काफी हद तक सुगम होने की उम्मीद है। वर्तमान में जोगणी माता मंदिर के समीप अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके अलावा पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण कई बार पुराने मार्ग पर यातायात बाधित हो जाता है।
टनल के सुचारू होने से यात्रियों को जाम और बार-बार होने वाले सड़क अवरोध से राहत मिलने की उम्मीद है। मंडी से कुल्लू के बीच सफर में करीब 15 से 20 मिनट की बचत होगी।
प्रारंभिक चरण में वाहनों की आवाजाही एक ही टनल से करवाई जाएगी। इसके बाद यातायात व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाएगा।
2600 करोड़ के प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है डयोड-हणोगी टनल
पंडोह बायपास टकोली प्रोजेक्ट में कुल 10 टनलें बनी हैं। डयोड से हणोगी तक बनी चार टनलें इस प्रोजेक्ट का प्रवेश द्वार हैं। इनमें से अभी एक साइड की दो टनलों को ही यातायात के लिए खोला जाएगा।
इन दोनों टनलों की लंबाई 2.8 किलोमीटर और 650 मीटर है। खोतीनाला के पास दोनों टनलों को आपस में जोड़ने के लिए 45 मीटर ऊंचा और 140 मीटर लंबा पुल बनाया गया है।
हणोगी के पास बरसात के कारण टनलों के मुहाने पर नुकसान हुआ था। इसके बाद करीब 54 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत करवाकर इसे तैयार किया गया है।
टनल खुलने के बाद कम होगा मंडी-कुल्लू का सफर
डयोड-हणोगी टनल से यातायात शुरू होने के बाद मंडी-कुल्लू मार्ग पर यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पुराने मार्ग के ऐसे हिस्सों से गुजरने की जरूरत कम होगी, जहां जाम के साथ-साथ पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण यातायात बाधित होता रहता है।
टनल के शुरू होने से न केवल सफर का समय कम होगा, बल्कि यात्रियों को अधिक सुगम मार्ग भी मिलेगा। हालांकि नियमित यातायात शुरू करने से पहले सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करना जरूरी है।
एनएचएआई के बोर्ड सदस्य विपनेश शर्मा ने कहा कि यह सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। निरीक्षण के बाद कुछ सुरक्षा मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस मौके पर द्रंग विधायक पूर्ण चंद ठाकुर, एनएचएआई के आरओ कर्नल अजय सिंह बरगोती, प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरूण चारी व अन्य मौजूद रहे।



