➤ 14 सितंबर से शुरू होगा गणेशोत्सव, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर होगा समापन
➤ गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:21 से दोपहर 1:48 बजे तक रहेगा
➤ गणेश चतुर्थी पर रवि, इंद्र और ब्रह्म योग का संयोग, इसी दिन हरतालिका तीज भी
गणेश चतुर्थी 2026 का पर्व इस बार बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, भगवान गणेश को समर्पित 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर 2026 से होगी और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन इसका समापन होगा। इस दौरान देशभर में घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। चतुर्थी तिथि के अधिष्ठाता देवता भगवान गणेश माने जाते हैं। हिंदू धर्म में उन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धि, ज्ञान और मंगल कार्यों के देवता के रूप में पूजा जाता है। यही वजह है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।
इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व इसलिए भी खास है क्योंकि हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों एक ही दिन, 14 सितंबर को मनाए जाएंगे। इसके अलावा पंचांग के अनुसार इस दिन रवि योग, इंद्र योग और ब्रह्म योग का भी निर्माण हो रहा है।
14 सितंबर को शुरू होगा गणेशोत्सव, 25 सितंबर को विसर्जन
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 7 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा।
इसी दिन से 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव की शुरुआत होगी। श्रद्धालु अपने घरों और पूजा पंडालों में गणपति की प्रतिमा स्थापित करेंगे। इसके बाद प्रतिदिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना, आरती और भोग लगाया जाएगा।
गणेशोत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इस दिन परंपरा के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है और भक्त अगले वर्ष फिर से बप्पा के आगमन की कामना करते हैं।
गणपति स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त कब रहेगा?
भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना के लिए 14 सितंबर को मध्याह्न काल का मुहूर्त शुभ माना गया है। पंचांग के अनुसार इस दिन गणपति स्थापना के लिए शुभ समय सुबह 11 बजकर 21 मिनट से दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
इसी अवधि में श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा को घर में विधि-विधान के साथ स्थापित कर सकते हैं। गणपति स्थापना के दौरान पूजा स्थल की शुद्धता, संकल्प और विधि-विधान का विशेष ध्यान रखने की धार्मिक परंपरा है।
प्रतिमा स्थापित करने के बाद भगवान गणेश का पूजन कर उन्हें उनके प्रिय माने जाने वाले दूर्वा, लाल फूल, मोदक और लड्डू अर्पित किए जाते हैं।
गणेश चतुर्थी पर बन रहे हैं तीन शुभ योग
इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व कई विशेष संयोगों के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को रवि योग, इंद्र योग और ब्रह्म योग का निर्माण हो रहा है।
इसके साथ ही इसी दिन हरतालिका तीज का व्रत भी रखा जाएगा। गणेश चतुर्थी सोमवार के दिन पड़ रही है। सोमवार का संबंध भगवान भोलेनाथ से माना जाता है, जबकि चतुर्थी तिथि के अधिष्ठाता भगवान गणेश हैं।
धार्मिक दृष्टि से इस संयोग में शिव-पार्वती और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जा रहा है। इस कारण इस वर्ष 14 सितंबर का दिन श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक रूप से विशेष रहने वाला है।
घर में ऐसे करें गणपति की स्थापना
गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर घर की साफ-सफाई करें। पूजा स्थल को शुद्ध करने के बाद वहां चौकी स्थापित करें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।
इसके बाद पूजा का संकल्प लेकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। गणपति के साथ पूजा स्थल पर कलश की स्थापना भी की जाती है।
प्रतिमा स्थापना के बाद भगवान गणेश को गंगाजल से स्नान करवाएं। इसके बाद उन्हें वस्त्र, जनेऊ और चंदन अर्पित करें। गणपति पूजन में भगवान को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा है।
भगवान गणेश को दूर्वा घास, लाल फूल, मोदक और लड्डू अर्पित करें। इसके बाद धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर पूजा करें।
मंत्र जाप, गणेश चालीसा और आरती से करें पूजन
गणपति पूजा के दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश के मंत्रों का जाप कर सकते हैं। इसके साथ गणेश चालीसा और गणेश स्तुति का पाठ करने के बाद आरती की जाती है।
पूजा के अंत में भगवान गणेश से जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगने की धार्मिक परंपरा है। इसके बाद परिवार की सुख-शांति, आरोग्य, बुद्धि और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान गणेश की पूजा करते हैं। कई स्थानों पर सार्वजनिक पंडालों में भी गणपति की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और कई दिनों तक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
इस बार तीज और गणेश चतुर्थी का भी है खास संयोग
14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ रही है। हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है, जबकि गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित है।
इस तरह एक ही दिन दो प्रमुख धार्मिक पर्व होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को हर शुभ कार्य का प्रथम पूज्य देवता माना गया है। वहीं हरतालिका तीज में शिव-पार्वती की आराधना की जाती है।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर भक्त बप्पा का स्वागत करने के लिए घरों और पंडालों को सजाते हैं। 14 सितंबर से शुरू होने वाला गणेशोत्सव 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ संपन्न होगा।
पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
गणपति स्थापना करते समय पूजा स्थल को स्वच्छ और व्यवस्थित रखना चाहिए। प्रतिमा स्थापित करने के बाद श्रद्धा के साथ नियमित पूजा और आरती करने की परंपरा है। भगवान गणेश को दूर्वा, लाल फूल और मोदक अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य भगवान गणेश से बुद्धि, आरोग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विघ्नहर्ता गणेश की आराधना से जीवन के विघ्न दूर होने और शुभ कार्यों में सफलता मिलने की कामना की जाती है।
इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर से 25 सितंबर तक चलेगा। 14 सितंबर को सुबह 11:21 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। ऐसे में भक्त इस अवधि में विधि-विधान के साथ बप्पा की स्थापना कर गणेशोत्सव की शुरुआत कर सकते हैं।



