➤ घट और पूजा नृत्य को बड़े मंच तक पहुंचाने में अहम योगदान
➤ घंडालवी स्थित घर में ली अंतिम सांस, कला जगत में शोक
➤ सीएम सुक्खू, जयराम ठाकुर समेत कई नेताओं ने जताया शोक
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के घुमारवीं की प्रसिद्ध लोक कलाकार फूलां चंदेल का निधन हो गया। कुछ समय से अस्वस्थ चल रहीं फूलां चंदेल का पीजीआई में उपचार चल रहा था। उन्होंने घंडालवी स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से घुमारवीं सहित बिलासपुर और पूरे प्रदेश के कला एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। फूलां चंदेल ने अपनी लोक कला और मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से हिमाचली संस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खास तौर पर घट और पूजा नृत्य को बड़े मंचों तक पहुंचाने में उनका योगदान याद किया जाएगा। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुतियों के माध्यम से हिमाचली लोक परंपराओं और संस्कृति की पहचान दूसरे राज्यों और विदेशों तक पहुंची।
फूलां चंदेल का लोक नृत्य के प्रति रुझान विद्यार्थी जीवन से ही था। उन्होंने शुरुआती दौर से ही लोक कला को अपनी रुचि बनाया और बाद में नेहरू युवा केंद्र बिलासपुर के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इन प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक आयोजनों में उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और कई पुरस्कार भी हासिल किए। धीरे-धीरे उन्होंने हिमाचल की लोक कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई और मंचों पर उनकी प्रस्तुतियां दर्शकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनने लगीं।
घट और पूजा नृत्य को दिलाई पहचान
फूलां चंदेल ने हिमाचल की पारंपरिक लोक कलाओं को मंचीय स्वरूप देने और उन्हें व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। घट नृत्य और पूजा नृत्य उनकी प्रमुख पहचान रहे। देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ विदेशों में हुए आयोजनों में भी उन्होंने हिमाचली लोकनृत्य की प्रस्तुतियां दीं।
उनकी प्रस्तुतियों के जरिए हिमाचल की पारंपरिक लोक संस्कृति को बड़े मंचों पर पहचान मिली। लोक नृत्य को केवल स्थानीय आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय उन्होंने इसे अलग-अलग सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचाने का काम किया। यही वजह रही कि उन्हें हिमाचली लोक कला के क्षेत्र में विशेष पहचान मिली।
बचपन से ही था लोक नृत्य से लगाव
घुमारवीं के प्रो. सुरेश शर्मा के अनुसार, फूलां चंदेल को घट नृत्य की जनक के रूप में याद किया जाता है। बताया जाता है कि बचपन में ही उनका इस पारंपरिक नृत्य के प्रति गहरा लगाव था। वह बचपन में बावड़ी के समीप जाकर घट नृत्य का अभ्यास करती थीं। इसी शुरुआती रुचि और अभ्यास ने आगे चलकर उनके जीवन को लोक कला के क्षेत्र से जोड़ दिया।
समय के साथ उनकी प्रतिभा को मंच मिला और उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में हिस्सा लेना शुरू किया। उनकी प्रस्तुतियों ने घुमारवीं और बिलासपुर क्षेत्र की लोक कला को भी अलग पहचान दिलाई।
नलवाड़ मेले और घुमारवीं ग्रीष्मोत्सव में रहती थीं खास आकर्षण
बिलासपुर नलवाड़ मेला और घुमारवीं ग्रीष्मोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में फूलां चंदेल की प्रस्तुतियां खास आकर्षण रहती थीं। स्थानीय सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी भागीदारी को लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
उनकी प्रस्तुतियों में हिमाचल की पारंपरिक संस्कृति, लोक नृत्य और स्थानीय परंपराओं की झलक दिखाई देती थी। इस वजह से वह केवल एक कलाकार के रूप में नहीं, बल्कि हिमाचली सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि के तौर पर भी जानी जाती थीं।
लोक कला के लिए मिलीं कई उपलब्धियां
लोक कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए फूलां चंदेल को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। विद्यार्थी जीवन से शुरू हुआ उनका लोक कला का सफर विभिन्न प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचा। नेहरू युवा केंद्र बिलासपुर से जुड़कर उन्होंने कई आयोजनों में भाग लिया और अपनी प्रस्तुतियों के लिए सम्मान हासिल किया।
उन्होंने अपनी कला के माध्यम से हिमाचली लोक परंपराओं को जीवंत रखने और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में योगदान दिया। उनकी प्रस्तुतियों में स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक लोक शैली की स्पष्ट झलक देखने को मिलती थी।
परिवार में दो बेटे, पति का पहले हो चुका है निधन
फूलां चंदेल के पति का पहले ही निधन हो चुका है। उनके परिवार में दो बेटे हैं। उनके निधन की सूचना के बाद परिवार और परिचितों के साथ-साथ स्थानीय लोगों तथा कला जगत से जुड़े लोगों ने भी शोक व्यक्त किया।
फूलां चंदेल के निधन से घुमारवीं ने अपनी एक ऐसी कलाकार को खो दिया है, जिसने लंबे समय तक हिमाचली लोक संस्कृति को मंचों पर जीवंत रखने का काम किया। उनके जाने से स्थानीय सांस्कृतिक आयोजनों और लोक कला के क्षेत्र में भी एक खालीपन महसूस किया जा रहा है।
सीएम सुक्खू और जयराम ठाकुर ने जताया शोक
फूलां चंदेल के निधन पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, सांसद अनुराग सिंह ठाकुर, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी और पूर्व खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग सहित कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।
शोक व्यक्त करने वालों ने फूलां चंदेल के निधन को हिमाचल की लोक कला और सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए क्षति बताया तथा उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं। उनके सांस्कृतिक योगदान और हिमाचली लोक नृत्य को देश-विदेश के मंचों तक पहुंचाने के प्रयासों को याद किया गया।
फूलां चंदेल का जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि स्थानीय लोक कला और परंपराओं को समर्पण के साथ बड़े मंच तक पहुंचाया जा सकता है। बचपन में शुरू हुआ उनका घट नृत्य का अभ्यास आगे चलकर देश-विदेश के सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचा। उनके निधन के बाद उनकी प्रस्तुतियां और हिमाचली लोक संस्कृति के लिए उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।



