➤ गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान गुरुपर्व में पहुंचे नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर
➤ जयराम ठाकुर बोले – गुरु तेग बहादुर जी के आदर्शों में हर भारतीय की आस्था
➤ पांवटा साहिब से जुड़ी गुरु जी की शिक्षाएं आज भी देती हैं प्रेरणा
शिमला। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने रिज मैदान शिमला में आयोजित गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान गुरुपर्व पर पहुँचकर श्री गुरुद्वारा सिंह सभा में शीश नवाया और गुरु जी के बलिदान, वीरता और योगदान को नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतवर्ष गुरु तेग बहादुर जी का सदैव ऋणी रहेगा। उन्होंने कहा कि गुरु जी ने उस समय देश की धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे, जब औरंगजेब की आततायी सत्ता लोगों की आस्था को कुचलने पर तुली हुई थी।
जयराम ठाकुर ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी उस दौर में “हिन्द दी चादर” बनकर उभरे, जिन्होंने देश की अस्मिता की रक्षा की। उनका बलिदान न केवल सिख इतिहास, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता का भी गौरव है। उन्होंने कहा कि भले ही औरंगजेब जैसे अत्याचारी ने अनेक सिर धड़ से अलग किए, पर वह कभी भी हमारी आस्था और आत्मा को नहीं झुका सका। गुरु जी के बलिदान ने आने वाली पीढ़ियों में यह संदेश दिया कि धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए बलिदान सर्वोच्च कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि आज भी जब हम अपनी पहचान, अपनी संस्कृति और अपने देश की बात करते हैं, तो गुरु तेग बहादुर जी के त्याग और मर्यादा की झलक हमें प्रेरणा देती है। बड़ी-बड़ी साम्राज्यवादी सत्ताएँ मिट गईं, लेकिन भारत आज भी उसी आध्यात्मिक शक्ति के कारण अमर खड़ा है।
जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने अपने जीवन के कई वर्ष हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में बिताए, जहाँ उन्होंने अनेक बाणी रचनाएँ कीं और उपदेश दिए। आज गुरुद्वारा पांवटा साहिब श्रद्धालुओं के लिए एक महान तीर्थस्थल है। उन्होंने कहा कि गुरु जी की शिक्षाएं, उनका योगदान और उनका बलिदान न केवल सिख समाज बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनके आदर्श आज भी हर भारतीय के जीवन का मार्गदर्शन करते हैं।



