स्टाफ नर्सिंग की कमी से जूझ रहे हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में अब इस कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्स व्यवस्था का सहारा लिया जा रहा है। हालांकि नर्सों की आउटसोर्सिंग के आधार पर की जा रही भर्ती को लेकर काफी सवाल उठ रहे हैं। इस व्यवस्था को कर्मचारियों के हकों का हनन माना जा रहा है। हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में 50 नर्सों को आउटसोर्स व्यवस्था के तहत तैनाती दी गई है।
लेकिन, हैरान करने वाली बात यह है कि तैनाती दिहाड़ीदारों की तर्ज़ पर ही दी गई है। चयनित नर्सेज का इंटरव्यू लेने के लिए न तो कोई मेडिकल विशेषज्ञ तैनात किया गया था और न ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की तरफ से इंटरव्यू प्रक्रिया की कोई निगरानी की गई। मेडिकल कालेज प्रबंधन का तर्क है कि आउटसोर्स के माध्यम से दी जाने वाली इन नियुक्तियों में यदि नियुक्ति के बाद प्रबंधन को लगता है कि कोई नर्स योग्य नहीं है तो इसके बारे में बदलाव हेतु एजेंसी को सूचित किया जाएगा।
आउटसोर्सिंग की यह व्यवस्था उन अभिभावकों के साथ धोखा माना जा रहा है, जिन्होंने लाखों रुपए खर्च कर अपनी बेटियों से नर्सिंग की पढ़ाई करवाई है। मेडिकल कालेज की मौजूदा स्थित की बात करें तो यहां मात्र 29 नर्सेज से ही अभी तक काम चलाया जा रहा है, जबकि कॉलेज को 202 नर्सेज की जरूरत है। अब जो 50 रखी हैं, वे भी आउटसोर्स पर तो ऐसे में कार्यप्रणाली कैसी होगी यह बहुत बड़ा प्रश्न है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन या आउटसोर्सिंग कि वह व्यवस्था, जिसे प्रदेश सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े विभाग में नर्सेज की भर्ती के लिए भी लागू कर दिया है। अब सवाल यह है कि यदि नियुक्ति के बाद किसी मरीज के साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो इसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन होगा।
उधर, आउटसोर्सिंग एजेंसी के प्रभारी सुशील कुमार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों का पूरा ख्याल रखा गया है हालांकि इसमें कोई स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ नहीं था, लेकिन भर्ती नियम पूरी तरह से फॉलो किए गए हैं और दस्तावेजों की जांच के बाद ही नियुक्ति दी गई है। पिछले महीने ही इंटरव्यू हो गए थे और पिछले वीरवार को मेडिकल कॉलेज में चयनित नर्सेज की तैनाती कर दी गई है।