➤ हिमाचल में 194 डॉक्टरों को नई तैनाती, 118 विशेषज्ञ मेडिकल ऑफिसरों की पोस्टिंग
➤ 76 मेडिकल ऑफिसर एक साल के लिए जॉब ट्रेनी नियुक्त, हर माह मिलेगा 60 हजार रुपये मानदेय
➤ प्रदेश के जिला अस्पतालों, CHC और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती से सेवाएं होंगी मजबूत
शिमला, 14 सितंबर। हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 194 मेडिकल ऑफिसरों की तैनाती और नियुक्ति को लेकर आदेश जारी किया है। इनमें 118 विशेषज्ञ मेडिकल ऑफिसरों को प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में पोस्टिंग दी गई है, जबकि 76 मेडिकल ऑफिसरों को एक साल की अवधि के लिए जॉब ट्रेनी के रूप में नियुक्त किया गया है।
राज्यपाल की ओर से 14 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना और कार्यालय आदेश में इन नियुक्तियों का विवरण दिया गया है। नई तैनाती में पीजी पाठ्यक्रम पूरा कर चुके डॉक्टरों के साथ वे चिकित्सक भी शामिल हैं, जो पहले विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट के तौर पर सेवाएं दे रहे थे।
वहीं, जॉब ट्रेनी के रूप में नियुक्त किए गए 76 मेडिकल ऑफिसरों को 60,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इन नियुक्तियों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
पीजी पूरा करने वाले 118 डॉक्टरों को मिली नई पोस्टिंग
स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार 118 मेडिकल ऑफिसरों ने प्रदेश के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों से पीजी पाठ्यक्रम पूरा किया है। इनमें आईजीएमसी शिमला, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर और श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय मेडिकल कॉलेज नेरचौक से पीजी करने वाले डॉक्टर शामिल हैं।
इनमें से कुछ डॉक्टर पहले सीनियर रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे। पीजी पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद अब उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों के रूप में प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में नई जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार की ओर से इन डॉक्टरों को अलग-अलग जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और क्षेत्रीय अस्पतालों में तैनात किया गया है। इससे खासकर उन स्वास्थ्य संस्थानों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता लंबे समय से चुनौती बनी हुई है।
एनेस्थीसिया से लेकर रेडियोलॉजी तक कई विशेषज्ञताओं के डॉक्टर
नई तैनाती में अलग-अलग चिकित्सा विशेषज्ञताओं के डॉक्टर शामिल हैं। इनमें एनेस्थीसिया, मेडिसिन, सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग, ईएनटी, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और मनोचिकित्सा समेत अन्य विशेषज्ञताएं शामिल हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से जिला स्तर पर मरीजों को कई ऐसी चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी, जिनके लिए उन्हें पहले बड़े मेडिकल कॉलेजों या जिला मुख्यालयों का रुख करना पड़ता था।
सरकार की ओर से विशेषज्ञों को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में भेजने का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना बताया जा रहा है।
चंबा से लाहौल-स्पीति तक डॉक्टरों की तैनाती
118 विशेषज्ञ मेडिकल ऑफिसरों को प्रदेश के कई जिलों में तैनाती दी गई है। इनमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन, सिरमौर, बिलासपुर, ऊना, कुल्लू और लाहौल-स्पीति शामिल हैं।
कई डॉक्टरों को दूरदराज के स्वास्थ्य संस्थानों में भी भेजा गया है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ऐसे क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार के लिए अक्सर जिला मुख्यालय या मेडिकल कॉलेजों पर निर्भर रहना पड़ता है।
नई नियुक्तियों के बाद इन क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने और मरीजों को अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में बेहतर उपचार मिलने की उम्मीद है।
76 मेडिकल ऑफिसर एक साल के लिए जॉब ट्रेनी नियुक्त
सरकार ने 118 विशेषज्ञ डॉक्टरों की पोस्टिंग के साथ 76 मेडिकल ऑफिसरों को जॉब ट्रेनी के रूप में नियुक्त करने का भी फैसला लिया है। इनकी नियुक्ति एक साल की अवधि के लिए होगी।
आदेश के मुताबिक जॉब ट्रेनी डॉक्टरों को 60 हजार रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। यह नियुक्ति स्वास्थ्य विभाग की संबंधित अधिसूचनाओं और निर्धारित नियम एवं शर्तों के तहत की गई है।
जॉब ट्रेनी के रूप में नियुक्त डॉक्टरों को कार्यभार संभालने से पहले आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इनमें चरित्र, पूर्ववृत्त और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन शामिल है।
नाहन से धर्मशाला और चंबा तक होगी तैनाती
76 जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसरों को भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया गया है। आदेश में नाहन, करसोग, अंब, भरमौर, नालागढ़, धर्मशाला, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, सोलन, सिरमौर, ऊना, कुल्लू, शिमला और चंबा सहित कई स्वास्थ्य संस्थानों का उल्लेख है।
इससे अलग-अलग क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। खासकर ऐसे स्वास्थ्य संस्थानों में जहां मरीजों की संख्या अधिक है या चिकित्सकों की कमी के कारण सेवाओं पर दबाव रहता है, वहां इन नियुक्तियों का सीधा असर पड़ सकता है।
कुछ डॉक्टरों को जिला कार्यक्रम अधिकारी की जिम्मेदारी
जॉब ट्रेनी के रूप में नियुक्त किए गए डॉक्टरों में कुछ को जिला कार्यक्रम अधिकारी के रूप में भी जिम्मेदारी दी गई है। इससे स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं के संचालन में भी चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता बढ़ेगी।
जिला स्तर पर स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निगरानी और उनके क्रियान्वयन में मेडिकल ऑफिसरों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में इन नियुक्तियों से विभागीय कामकाज को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं को मिलेगा सहारा
हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक दूरदराज के क्षेत्रों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता है। कई इलाकों में मरीजों को गंभीर बीमारी या विशेषज्ञ उपचार के लिए बड़े अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों तक जाना पड़ता है।
ऐसे में 118 विशेषज्ञ डॉक्टरों की विभिन्न जिलों में तैनाती और 76 मेडिकल ऑफिसरों की जॉब ट्रेनी के तौर पर नियुक्ति को स्वास्थ्य व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
इन डॉक्टरों की तैनाती से जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मैनपावर की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।
सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संभालेंगे जिम्मेदारी
विभाग के आदेश में नियुक्त डॉक्टरों के लिए निर्धारित नियम और शर्तों का पालन करना जरूरी किया गया है। जॉब ट्रेनी डॉक्टरों को नियुक्ति से पहले चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन के साथ संबंधित दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा।
इसके बाद डॉक्टर संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। एक साल की जॉब ट्रेनी अवधि के दौरान उन्हें निर्धारित मानदेय दिया जाएगा।
सरकार के फैसले से मरीजों को क्या फायदा होगा?
194 डॉक्टरों की यह तैनाती प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल ऑफिसरों दोनों की जरूरत को एक साथ पूरा करने का प्रयास किया गया है।
एक ओर पीजी पूरा कर चुके 118 डॉक्टरों को विशेषज्ञ सेवाओं के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भेजा गया है, वहीं दूसरी ओर 76 मेडिकल ऑफिसरों को जॉब ट्रेनी के तौर पर स्वास्थ्य संस्थानों में लगाया जा रहा है।
इससे प्रदेश के कई हिस्सों में डॉक्टरों की कमी कम करने और मरीजों को सरकारी अस्पतालों में समय पर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद डॉक्टरों की तैनाती और नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। अब इन डॉक्टरों के संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यभार संभालने के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि विभिन्न जिलों में विशेषज्ञ सेवाओं और चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता में कितना सुधार आता है।



