➤ 150 सरकारी CBSE स्कूलों में बुधवार से शिक्षकों की दिन में तीन बार उपस्थिति दर्ज होगी
➤ 1 अक्तूबर से शिक्षकों का ड्रेस कोड लागू होगा, नवनियुक्त शिक्षकों को ड्रेस के लिए 5 हजार रुपये मिलेंगे
➤ CBSE स्कूलों के लिए 80 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने की घोषणा, करीब 1,200 शिक्षकों की नियुक्ति पूरी
शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी CBSE स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। प्रदेशभर में स्थापित 150 सरकारी CBSE स्कूलों में अब शिक्षकों की दिन में तीन बार उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था बुधवार से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में मंगलवार शाम शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में सरकारी CBSE स्कूलों के शैक्षणिक स्तर, बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
सरकार के नए मॉडल के तहत शिक्षकों को स्कूल पहुंचने के समय, दोपहर के भोजन अवकाश के दौरान और छुट्टी के समय अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और शैक्षणिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने में मदद मिलेगी।
1 अक्तूबर से शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड होगा लागू
बैठक में सरकारी CBSE स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड लागू करने का भी फैसला लिया गया है। शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड की व्यवस्था 1 अक्तूबर से लागू होगी।
सरकार ने नवनियुक्त शिक्षकों को ड्रेस खरीदने के लिए 5 हजार रुपये की विशेष वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है। शिक्षकों की वर्दी का रंग इसी सप्ताह तय किया जाएगा।
वहीं, विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म को लेकर अंतिम निर्णय अगले सप्ताह लिया जाएगा। इसके बाद सरकारी CBSE स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए भी निर्धारित ड्रेस कोड लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
CBSE स्कूलों के लिए 80 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने की घोषणा
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के सरकारी CBSE स्कूलों के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 80 करोड़ रुपये अतिरिक्त उपलब्ध करवाने की घोषणा की है।
इस राशि का इस्तेमाल स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य सरकारी CBSE स्कूलों को ऐसी सुविधाओं से लैस करना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दूर जाने की जरूरत न पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को घर के नजदीक निजी स्कूलों जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना है। इसी दिशा में सरकारी स्कूलों को CBSE प्रणाली से जोड़ने और वहां शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकारी CBSE स्कूलों में करीब 1,200 शिक्षक नियुक्त
सरकार के अनुसार प्रदेश के सरकारी CBSE स्कूलों में अब तक करीब 1,200 शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। आवश्यकता के अनुसार आगे भी शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
सरकार का प्रयास है कि CBSE स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हों और विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ आधुनिक शैक्षणिक वातावरण भी मिल सके। इसके लिए स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ शिक्षकों की जवाबदेही पर भी जोर दिया जा रहा है।
VSK पोर्टल की हाजिरी से जुड़ेगा शिक्षकों का वेतन बिल
सरकारी CBSE स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर एक और बड़ा बदलाव किया गया है। अब VSK यानी स्विफ्टचैट पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति शिक्षकों के वेतन बिल से जुड़ी होगी।
स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से मंगलवार शाम जारी निर्देशों के अनुसार CBSE से संबद्ध सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के सैलरी बिल तभी तैयार किए जाएंगे, जब VSK पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति की उचित जांच हो जाएगी।
यदि कोई शिक्षक पोर्टल पर अपनी उपस्थिति ठीक से दर्ज नहीं करता है, तो लागू नियमों और निर्देशों के अनुसार संबंधित शिक्षक के वेतन से अगली बार अथवा स्थिति के अनुसार आवश्यक राशि काटी जा सकती है।
विभाग ने यह भी तय किया है कि VSK हाजिरी पोर्टल को जल्द ई-सैलरी सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इससे सैलरी बिल तैयार करने से पहले शिक्षकों की उपस्थिति का ऑटोमेटिक वेरिफिकेशन किया जा सकेगा।
यदि किसी शिक्षक को वेतन से की गई कटौती पर आपत्ति होगी, तो वह लागू नियमों के तहत स्कूल शिक्षा निदेशक के समक्ष अपील कर सकेगा।
वेतन बिल तैयार करने से जुड़ी यह व्यवस्था सितंबर 2026 के वेतन से ही CBSE से जुड़े सभी सरकारी स्कूलों में लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। निदेशालय ने सभी उप शिक्षा निदेशकों को इस फैसले का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
3,110 विद्यार्थियों को अभी नहीं मिली स्मार्ट यूनिफॉर्म सब्सिडी
इसी बीच प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 3,110 विद्यार्थी स्मार्ट यूनिफॉर्म सब्सिडी का इंतजार कर रहे हैं। स्मार्ट यूनिफॉर्म सब्सिडी के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी DBT से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा के दौरान यह मामला सामने आया है।
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने अब अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है। सभी उप निदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में प्रत्येक प्रभावित विद्यार्थी के स्तर पर सब्सिडी की स्थिति की जांच करें।
विभाग ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह पता लगाने के लिए कहा गया है कि पात्र विद्यार्थियों को अभी तक राशि क्यों नहीं मिली है और भुगतान किस स्तर पर लंबित है।
पात्र विद्यार्थी योजना के लाभ से वंचित न रहें, विभाग के निर्देश
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना के लिए पात्र एक भी विद्यार्थी लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। जिला स्तर पर लंबित मामलों की पड़ताल कर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
उप निदेशकों को प्रत्येक प्रभावित विद्यार्थी की स्थिति की समीक्षा करनी होगी। इस दौरान यह जांचा जाएगा कि विद्यार्थी योजना के लिए पात्र है या नहीं, DBT के माध्यम से भुगतान क्यों अटका है और किसी तकनीकी या दस्तावेजी कमी के कारण भुगतान लंबित है तो उसे कैसे दूर किया जा सकता है।
यह कार्रवाई शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में 3 अगस्त को हुई समीक्षा बैठक के बाद शुरू की गई है। शिक्षा निदेशालय ने मंगलवार को स्मार्ट यूनिफॉर्म सब्सिडी के लंबित मामलों को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में सुविधाओं को मजबूत करने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, ड्रेस कोड, आधुनिक बुनियादी ढांचे और विद्यार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की निगरानी को एक साथ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
बैठक में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, महाधिवक्ता अनूप रतन, सचिव शिक्षा राकेश कंवर सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।



