➤ देहरा में 46 करोड़ से बनेगी हिमाचल की पहली ओजोन आधारित पेयजल परियोजना
➤ डाडासीबा में एसडीएम कार्यालय और कोटला सीएचसी को 24 घंटे चलाने की घोषणा
➤ 1012 मछुआरा परिवारों को 3500 रुपये की सहायता, आपदा प्रभावितों के लिए घर बनाने की मदद 8 लाख रुपये
हिमाचल प्रदेश में लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को कांगड़ा जिले के देहरा विधानसभा क्षेत्र के बड्डल थोर में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदेश की पहली ओजोन आधारित पेयजल उपचार परियोजना स्थापित करने की घोषणा की। इस परियोजना पर सरकार 46 करोड़ रुपये खर्च करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूषित पानी के सेवन से कई तरह की बीमारियों का खतरा बना रहता है, इसलिए लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरा में स्थापित होने वाली यह परियोजना प्रदेश में अपनी तरह की पहली परियोजना होगी। भविष्य में इसी मॉडल को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से पेयजल का बेहतर उपचार कर लोगों तक अधिक सुरक्षित पानी पहुंचाना है।
देहरा क्षेत्र के लिए यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य से है। सरकार की योजना केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि आने वाले समय में ओजोन आधारित जल उपचार व्यवस्था का विस्तार अन्य क्षेत्रों तक करने की बात कही गई है।
ओजोन आधारित जल उपचार से स्वच्छ पेयजल पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूषित पानी के कारण लोगों को कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में पेयजल स्रोतों से मिलने वाले पानी को आधुनिक तकनीक से उपचारित कर सुरक्षित बनाना जरूरी है।
46 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित परियोजना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। देहरा में इस परियोजना के स्थापित होने के बाद सरकार को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की तकनीक अपनाने का आधार मिलेगा।
सरकार का जोर अब केवल पेयजल उपलब्ध कराने पर नहीं, बल्कि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने पर है।
डाडासीबा में खुलेगा नया एसडीएम कार्यालय
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसी दौरे के दौरान जसवां-प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र के डाडासीबा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने डाडासीबा में नया उपमंडलाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय खोलने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए कार्यालय से संबंधित अधिसूचना जल्द जारी कर दी जाएगी।
नया एसडीएम कार्यालय खुलने से क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर के कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होने से लोगों को विभिन्न सरकारी सेवाओं और कार्यों के लिए सुविधा मिलेगी।
यह घोषणा क्षेत्र में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
कोटला सीएचसी अब 24 घंटे चलाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कस्बा कोटला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 24 घंटे संचालित करने के लिए आवश्यक प्रावधान करने की घोषणा की।
सीएचसी के चौबीसों घंटे संचालन से क्षेत्र के लोगों को विशेष रूप से आपात स्थिति में राहत मिलने की उम्मीद है। रात के समय स्वास्थ्य सुविधा की जरूरत पड़ने पर मरीजों और उनके परिजनों को दूर के अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की सरकार की कोशिशों के बीच यह घोषणा महत्वपूर्ण है।
1012 मछुआरा परिवारों के खाते में पहुंचे 3500 रुपये
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री मत्स्य सम्मान निधि योजना के तहत 1,012 मछुआरा परिवारों को वित्तीय सहायता भी जारी की। प्रत्येक पात्र परिवार के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से 3,500 रुपये सीधे हस्तांतरित किए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मछली पकड़ने पर लगाए जाने वाले वार्षिक प्रतिबंध की अवधि के दौरान प्रत्येक मछुआरा परिवार को 3,500 रुपये की वार्षिक आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार ने मछुआरा समुदाय की समस्याओं और कठिनाइयों को समझने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की है।
मुख्यमंत्री के अनुसार मछुआरा परिवारों को सम्मान और स्वाभिमान के साथ जीवन जीने में सहायता देना योजना का उद्देश्य है।
मछली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का भी प्रावधान
सुक्खू ने कहा कि मछुआरा समुदाय के हित में सरकार ने मछली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य भी उपलब्ध कराया है। उनका कहना था कि मछुआरा परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को वर्ष 1952 से आरडीजी मिल रहा था, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा इसे बंद किए जाने से राज्य को हर साल करीब 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि आरडीजी बंद नहीं किया गया होता तो हिमाचल वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर बनने की स्थिति में पहुंच सकता था। इसके बावजूद सरकार प्रदेश को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे ले जाने के प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना के लिए पंचायतों में सर्वेक्षण
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत लोगों को लाभ देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसके लिए पंचायतों में सर्वेक्षण किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। पंचायत स्तर पर सर्वेक्षण के जरिए पात्र परिवारों की पहचान की जा रही है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि राज्य के संसाधनों पर समाज के प्रत्येक वर्ग का उचित अधिकार हो।
राजीव गांधी वन संवर्धन योजना में स्वयं सहायता समूहों को 1.20 लाख
मुख्यमंत्री ने युवाओं और महिला मंडलों को पर्यावरण संरक्षण तथा पौधरोपण से जोड़ने के लिए शुरू की गई राजीव गांधी वन संवर्धन योजना का भी उल्लेख किया।
इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों को 1.20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसके अतिरिक्त लगाए गए पौधों के जीवित रहने के आधार पर प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान है।
सरकार का मानना है कि इस तरह युवाओं और महिला मंडलों को रोजगार एवं आय के अवसरों से जोड़ने के साथ-साथ वनों के संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
शिक्षा में 156 से अधिक सीबीएसई स्कूल, 6000 पद भरे
मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को घर के नजदीक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश में 156 से अधिक सीबीएसई स्कूल खोले गए हैं। आने वाले समय में और अधिक सीबीएसई स्कूल स्थापित करने की योजना है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के 6,000 नए पद भरे गए हैं। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना है।
31 दिसंबर तक मेडिकल कॉलेजों में 90 फीसदी स्टाफ का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की आगामी योजना की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 31 दिसंबर 2026 तक 90 प्रतिशत चिकित्सा, पैरामेडिकल और अन्य सहायक स्टाफ उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के लोगों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा और राज्य के भीतर ही बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछली भाजपा सरकार के दौरान प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में केवल 35 प्रतिशत स्टाफ उपलब्ध था। वर्तमान सरकार ने स्टाफ की कमी दूर करने के लिए भर्ती और तैनाती पर जोर दिया है।
2023 की आपदा में 23 हजार मकान हुए थे क्षतिग्रस्त
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023 की विनाशकारी आपदा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान प्रदेश में करीब 23 हजार मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए और 900 से अधिक लोगों की जान चली गई।
उन्होंने बताया कि आपदा प्रभावित परिवारों को नया घर बनाने के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता को पहले 1.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये किया गया और अब इसे 8 लाख रुपये कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आपदा प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और उनके पुनर्वास के लिए लगातार काम कर रही है।
पूर्व भाजपा सरकार पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप
मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सोलन के बद्दी क्षेत्र में करीब 5,000 बीघा जमीन भाजपा के करीबी उद्योगपतियों को कस्टमाइज्ड पैकेज के तहत बिना पंजीकरण के आवंटित की गई।
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इन जमीन आवंटनों को रद्द करने पर विचार कर रही है। यदि आवंटित जमीन पर कोई काम शुरू नहीं हुआ है तो उसका आवंटन रद्द किया जा सकता है।
उन्होंने पिछली सरकार के कार्यकाल में लागू हिमकेयर योजना का भी जिक्र किया और कुछ कथित अनियमितताओं को बड़े घोटाले की ओर संकेत बताया। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब इस बयान में सामने नहीं आया है।
सरकार ने भ्रष्टाचार के चोर दरवाजे बंद करने का किया दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार की मंशा स्पष्ट है और सरकार ईमानदारी एवं प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने भ्रष्टाचार के चोर दरवाजे बंद करने का काम किया है और जनता के कल्याण को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जा रही हैं।
डाडासीबा और देहरा में की गई घोषणाओं में पेयजल, स्वास्थ्य, प्रशासन, मछुआरा परिवारों, पर्यावरण, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे कई क्षेत्र शामिल रहे। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह दौरा क्षेत्र के लिए कई नई योजनाओं और घोषणाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा।



