➤ आपदा के छह महीने बाद भी सैकड़ों सड़कें नहीं हो पाईं बहाल
➤ बुजुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाओं को पालकी से ले जाना पड़ रहा अस्पताल
➤ राहत कार्य छोड़ जश्न में व्यस्त रहने का आरोप, सरकार पर साधा निशाना
शिमला: पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर आपदा राहत कार्यों में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि छह महीने बीतने के बाद भी आपदा में बह चुकी सड़कों को मिट्टी और पत्थर डालकर तक बहाल नहीं किया गया। इसके कारण मंडी और आसपास के जिलों की सैकड़ों पंचायतें आज भी सड़क संपर्क से कटी हुई हैं और कई गांवों तक वाहनों की पहुंच नहीं है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि आपात स्थिति में बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को मजबूरी में पालकी का सहारा लेना पड़ रहा है और कई-कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पक्की सड़कें बनाना तो दूर, ग्रामीण क्षेत्रों में बह चुकी सड़कों के गड्ढे तक नहीं भरे जा सके, जबकि विभागीय अधिकारी बजट न होने का हवाला दे रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जब बजट नहीं है तो फिर जश्न और उत्सवों के लिए धन कहां से आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार से आपदा राहत के लिए मिले पैसे का उपयोग जश्न मनाने में किया गया, जबकि वास्तविक राहत कार्य पीछे छूट गए।
उन्होंने कहा कि जितनी फुर्ती से संस्थानों को शिफ्ट किया गया और आपदा प्रभावितों पर मुकदमे दर्ज कराए गए, अगर उतनी ही तेजी से सड़क बहाली और राहत कार्य किए जाते, तो आज लोगों को यह दिन नहीं देखने पड़ते।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सर्दियां शुरू हो चुकी हैं और बर्फबारी का दौर भी आने वाला है, लेकिन आपदा प्रभावित परिवारों के पास न तो अस्थायी आवास है और न ही भविष्य को लेकर कोई भरोसा। सरकार ने न तो समय पर मदद दी और न ही कोई ठोस पुनर्वास योजना सामने रखी।
उन्होंने मांग की कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत, सड़क बहाली और अस्थायी आवास के लिए तत्काल बजट जारी किया जाए।
“मरीज के लिए दवाई नहीं, सड़क के लिए बजट नहीं”
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश इस समय बेरोजगारी, आर्थिक संकट और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से जूझ रहा है। आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीजों को दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हैं, सड़कों के गड्ढे भरने के लिए बजट नहीं है, लेकिन इसके बावजूद आयुष विभाग द्वारा क्रिकेट प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े विभाग को इवेंट मैनेजमेंट एजेंसी की तरह चलाना जनता के साथ धोखा है।



