➤ हिमाचल में आपदा से बेघर किसानों-बागवानों के लिए भूमि आबंटन कानून बनाने की मांग
➤ कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की भूमि निजी हाथों में देने का विरोध
➤ हिमालयी क्षेत्रों में अवैज्ञानिक विकास, सड़क और पनविद्युत परियोजनाओं पर आपत्ति
भारतीय किसान संघ हिमाचल प्रदेश की प्रदेश प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक हिमरश्मि परिसर, विकासनगर शिमला में सम्पन्न हुई। बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष के साईं रैड्डी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री सुरेंद्र शर्मा और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व हिमाचल प्रभारी सुशीला बिश्नोई ने मार्गदर्शन दिया।
बैठक में संगठनात्मक, रचनात्मक और आंदोलनात्मक विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में प्रदेश में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा से किसानों और बागवानों को हुए बड़े पैमाने के नुकसान पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। समिति ने बताया कि मंडी, कुल्लू और लाहौल-स्पीति में हजारों लोगों की कृषि भूमि और मकान बह गए।
किसान संघ ने केंद्र सरकार से मांग की कि आपदा में बेघर हुए किसानों को पुनर्वास के लिए कम से कम 5 बीघा भूमि आबंटन का प्रावधान किया जाए। साथ ही गृह निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।
बैठक में पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की 112 बीघा भूमि को निजी पर्यटन कंपनी को देने के निर्णय का कड़ा विरोध किया गया। किसान संघ का कहना है कि सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपने से किसानों के हित प्रभावित होंगे और इसे तुरंत निरस्त किया जाए।
इसके अलावा, अवैज्ञानिक सड़क और पनविद्युत परियोजनाओं, पहाड़ों के अत्यधिक कटान तथा इससे बढ़ते भूस्खलन पर भी चिंता जताई गई। संघ ने कहा कि इन परियोजनाओं के कारण प्रदेश में भारी प्राकृतिक क्षति हो रही है और हिमालयी क्षेत्रों के लिए प्राकृतिक-केन्द्रित विकास मॉडल अपनाया जाना चाहिए।
किसान संघ ने लाहौल-स्पीति में ग्लेशियर पिघलने से बनी घेपन झील के बढ़ते विस्तार को गंभीर खतरा बताया और ऐसे में 820 मेगावॉट की नई विद्युत परियोजनाओं की मंजूरी को “अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण” कहा।
बैठक में राज्य के कई क्षेत्रों में बदली डेमोग्राफी और बिना पहचान के रह रहे बाहरी लोगों पर चिंता व्यक्त की गई। संघ ने कहा कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए इन व्यक्तियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर सहित 10 जिलों से 40 सदस्यों ने भाग लिया।



