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फोरलेन पर सुक्खू की दोटूक, भूमि अधिग्रहण का खर्च हम देंगे तो टोल भी वसूलेंगे

भूमि अधिग्रहण का खर्च राज्य देगा तो फोरलेन पर टोल भी प्रदेश वसूलेगा

शिमला-मटौर फोरलेन के दो पैच के लिए करीब 16 किलोमीटर भूमि अधिग्रहण का खर्च राज्य पर

किरतपुर-मनाली फोरलेन की स्पीड लिमिट 70-75 किमी तक बढ़ाने पर होगा विचार


शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को फोरलेन परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण को लेकर तीखी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार की नई भूमि अधिग्रहण नीति पर सवाल उठाते हुए प्रदेश के हितों को लेकर दोटूक रुख अपनाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि फोरलेन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का खर्च राज्य सरकार को ही उठाना पड़ेगा, तो प्रदेश स्वयं सड़क बनाए और उस पर टोल भी खुद वसूले

शिमला-मटौर फोरलेन के 16 किलोमीटर के दो पैच का मामला

प्रश्नकाल के दौरान विधायक पूर्ण चंद ठाकुर, भुवनेश्वर गौड़ और चंद्रशेखर की ओर से फोरलेन परियोजनाओं से जुड़े अलग-अलग मुद्दे उठाए गए। जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना में नम्होल और घुमारवीं के पास करीब 16 किलोमीटर के दो पैच के लिए भूमि अधिग्रहण का खर्च राज्य सरकार से वहन करने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब फोरलेन का निर्माण और टोल वसूली एनएचएआई की ओर से की जाती है, तो भूमि अधिग्रहण की लागत भी उसी को वहन करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस शर्त पर पुनर्विचार की मांग करेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की बात कही।

मंडी-कुल्लू फोरलेन में नुकसान और मुआवजे का मुद्दा उठा

विधानसभा में द्रंग के विधायक पूर्ण चंद ठाकुर ने मंडी-कुल्लू फोरलेन निर्माण से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं, प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान और उचित मुआवजा नहीं मिलने का मामला सदन में रखा।

इस पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि फोरलेन निर्माण से हुए नुकसान की भरपाई का मामला एनएचएआई के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि मंडी के उपायुक्त को भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय लोगों के टोल का बोझ कम करने की मांग

मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने कुल्लू-मनाली क्षेत्र में टोल प्लाजा से स्थानीय लोगों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि फोरलेन बनने के बाद टोल शुल्क के कारण स्थानीय निवासियों का मासिक खर्च करीब पांच से दस हजार रुपये तक बढ़ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुल्लू से मनाली तक कई जगह सड़क की स्थिति खराब है और मार्ग अभी तक पूरी तरह फोरलेन नहीं बन पाया है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने आश्वासन दिया कि किरतपुर-मनाली फोरलेन के किनारे रहने वाले स्थानीय लोगों को टोल टैक्स में राहत देने का मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।

स्पीड लिमिट 60 से बढ़कर 70-75 किमी प्रति घंटा हो सकती है

विधानसभा में धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर ने किरतपुर-मनाली फोरलेन पर लागू 60 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड लिमिट को बढ़ाने की मांग भी उठाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में परिवहन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। कमेटी सड़क की मौजूदा स्थिति और सड़क सुरक्षा मानकों का आकलन करेगी।

सर्वे और सुरक्षा मानकों के आधार पर स्पीड लिमिट को 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार सड़क सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी। हालांकि, जहां सड़क की स्थिति और सुरक्षा मानक अनुमति देंगे, वहां लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा।

फोरलेन परियोजनाओं को लेकर विधानसभा में हुई चर्चा से साफ है कि हिमाचल सरकार भूमि अधिग्रहण की लागत, टोल व्यवस्था, प्रभावित परिवारों के मुआवजे और स्थानीय लोगों की सुविधा से जुड़े मुद्दों को केंद्र के समक्ष उठाने की तैयारी में है।