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हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अनुबंध पर की गई पुरानी सेवा भी गिनी जाएगी, वरिष्ठता-वेतन वृद्धि और पेंशन में मिलेगा लाभ

अनुबंध शिक्षकों की पूरी सेवा अवधि वरिष्ठता में जोड़ने का आदेश

2 दिसंबर 2014 से वेतन वृद्धि और पेंशन लाभ की गणना होगी

4 फरवरी 2023 से वास्तविक वित्तीय लाभ, पहले की अवधि काल्पनिक गणना में शामिल


शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के सेवा संबंधी अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने व्यवस्था दी है कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारियों की पूरी अनुबंध सेवा अवधि को उनकी वरिष्ठता, वेतन वृद्धि और पेंशन संबंधी लाभों की गणना में शामिल किया जाना चाहिए। अदालत ने सरकार को याचिकाकर्ताओं की शुरुआती नियुक्ति तिथि 2 दिसंबर 2014 से वरिष्ठता, पेंशन और वेतन वृद्धि से जुड़े लाभों की गणना करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में होने वाली पदोन्नति प्रक्रिया को संशोधित वरिष्ठता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है। हालांकि, अदालत ने देरी से याचिका दायर किए जाने के कारण वास्तविक वित्तीय लाभ की तारीख अलग निर्धारित की है।

2014 में अनुबंध पर नियुक्त हुए थे PGT

यह मामला लोकेश शर्मा और अन्य की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

याचिकाकर्ताओं को हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से 2 दिसंबर 2014 को अनुबंध आधार पर पीजीटी के पद पर नियुक्त किया गया था। इसके बाद 2 जून 2018 को उनकी सेवाओं को नियमित कर दिया गया।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी नियुक्ति नियमित सरकारी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से वर्ष 2014 में हुई थी। इसलिए सेवा में उनकी वरिष्ठता उन शिक्षकों से पहले तय होनी चाहिए, जिन्हें बाद में पीटीए नीति के तहत अनुबंध आधार पर नियुक्त किया गया।

PTA शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर उठा विवाद

मामले में पीटीए नीति के तहत वर्ष 2006-08 में रखे गए शिक्षकों की सेवा भी महत्वपूर्ण रही। सरकार ने इन शिक्षकों को जनवरी 2015 में अनुबंध आधार पर लिया था और बाद में 1 अप्रैल 2018 से उन्हें नियमित किया।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि वे सरकारी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 2 दिसंबर 2014 को अनुबंध पर नियुक्त हो चुके थे, जबकि पीटीए शिक्षकों को जनवरी 2015 में अनुबंध पर लिया गया। इसलिए सेवा की शुरुआत के आधार पर याचिकाकर्ताओं को वरिष्ठता में ऊपर होना चाहिए।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इसके बावजूद उन्हें नियमितीकरण और उससे जुड़े लाभों में देरी का सामना करना पड़ा। इसी विवाद को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

शुरुआती नियुक्ति तारीख से वरिष्ठता का लाभ

हाईकोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ताओं की शुरुआती नियुक्ति तिथि को महत्वपूर्ण माना। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि 2 दिसंबर 2014 से उनकी सेवा अवधि को वरिष्ठता, वेतन वृद्धि और पेंशन की गणना में शामिल किया जाए।

इस व्यवस्था का असर भविष्य की पदोन्नति प्रक्रिया पर भी पड़ेगा। अदालत ने कहा कि आगे होने वाली पदोन्नतियां संशोधित वरिष्ठता सूची के आधार पर की जानी चाहिए।

इसका मतलब यह है कि अनुबंध पर नियुक्ति से नियमितीकरण तक की अवधि को सेवा संबंधी गणना में पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जैसा कि मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से दावा किया गया था।

वास्तविक आर्थिक लाभ 4 फरवरी 2023 से मिलेगा

हालांकि हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पूरी पिछली अवधि का वास्तविक वित्तीय भुगतान देने के बजाय उनकी याचिका दायर करने में हुई देरी को भी ध्यान में रखा।

अदालत ने व्यवस्था दी कि याचिकाकर्ताओं को 4 फरवरी 2023 से वास्तविक वित्तीय लाभ मिलेगा। यह तारीख याचिका दायर करने की तारीख से तीन वर्ष पूर्व की अवधि के आधार पर तय की गई है।

इससे पहले की सेवा अवधि को काल्पनिक यानी नॉशनल आधार पर वेतन और पेंशन की गणना में शामिल किया जाएगा। इसका अर्थ है कि पुरानी अवधि का इस्तेमाल संबंधित वेतन और पेंशन की गणना के लिए किया जाएगा, लेकिन उस पूरी अवधि का वास्तविक बकाया भुगतान नहीं किया जाएगा।

पहले से पदोन्नत कनिष्ठ कर्मचारियों को नहीं किया जाएगा डिमोट

वरिष्ठता सूची में बदलाव के साथ तीसरे पक्ष के अधिकारों का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने इस पहलू को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट किया कि याचिका दायर करने में हुई देरी के कारण यदि कोई कनिष्ठ कर्मचारी पहले ही पदोन्नत हो चुका है, तो उसे उसके मौजूदा पद से डिमोट नहीं किया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य संशोधित वरिष्ठता लागू करने के साथ उन कर्मचारियों के मौजूदा पदों को भी सुरक्षित रखना है, जिन्हें पहले ही पदोन्नति मिल चुकी है।

हालांकि, ऐसे कर्मचारी जिन्हें अभी तक पदोन्नति नहीं मिली है, उन्हें संशोधित वरिष्ठता सूची में याचिकाकर्ताओं के नीचे रखा जाएगा, यदि वे सेवा वरिष्ठता के आधार पर उनसे कनिष्ठ पाए जाते हैं।

वरिष्ठता सूची में होगा संशोधन

हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित विभाग को वरिष्ठता सूची को मामले में तय सिद्धांतों के अनुरूप संशोधित करना होगा। संशोधित सूची का इस्तेमाल भविष्य की पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों के निर्धारण में किया जाएगा।

इस फैसले में एक तरफ अनुबंध सेवा अवधि को सेवा संबंधी लाभों में शामिल करने का रास्ता स्पष्ट किया गया है, वहीं दूसरी तरफ पहले से पदोन्नत कर्मचारियों के अधिकारों को भी सुरक्षित रखा गया है।

फैसला शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण

अनुबंध आधार पर नियुक्ति और बाद में नियमितीकरण का मुद्दा सरकारी सेवाओं में लंबे समय से सेवा विवादों का कारण रहा है। ऐसे मामलों में नियुक्ति की तारीख, नियमितीकरण की तारीख, भर्ती प्रक्रिया और लागू भर्ती एवं पदोन्नति नियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हिमाचल हाईकोर्ट के इस मामले में अदालत ने याचिकाकर्ताओं की अनुबंध सेवा अवधि को वरिष्ठता, वेतन वृद्धि और पेंशन की गणना में शामिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही वास्तविक वित्तीय लाभ के लिए अलग कटऑफ तारीख तय की है और पहले से पदोन्नत कर्मचारियों के अधिकारों को भी प्रभावित न करने की व्यवस्था की है।

इस तरह आदेश में वरिष्ठता, वित्तीय लाभ और पदोन्नति तीनों पहलुओं को अलग-अलग तरीके से संबोधित किया गया है।