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हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: डीपीई से बने प्रवक्ताओं की पदोन्नति अब वरिष्ठता सूची के आधार पर, सरकार ने कोर्ट में दिया आश्वासन

डीपीई से प्रवक्ता बने शिक्षकों की पदोन्नति एकीकृत वरिष्ठता सूची के आधार पर होगी
हाईकोर्ट ने सरकार का आश्वासन रिकॉर्ड पर लेकर निष्पादन याचिका का किया निपटारा
बीबीएमबी भूमि अतिक्रमण और पब्बर नदी पुल निर्माण में देरी पर भी सरकार को नोटिस जारी


शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने डीपीई (डायरेक्टर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) से प्रवक्ता बने शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि डीपीई से प्रवक्ता बने सभी शिक्षकों को भविष्य में उच्च पदों पर पदोन्नति केवल एकीकृत (कंसोलिडेटेड) वरिष्ठता सूची के आधार पर ही दी जाएगी। सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने निष्पादन याचिका का निपटारा कर दिया।

प्रवक्ता पद की वरिष्ठता ही बनेगी पदोन्नति का आधार

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि डीपीई से प्रवक्ता बने शिक्षकों की वरिष्ठता पहले ही निर्धारित की जा चुकी है। अब इन शिक्षकों को आगे की पदोन्नति के लिए प्रवक्ताओं की संयुक्त वरिष्ठता सूची में शामिल कर उसी आधार पर विचार किया जाएगा। यानी पदोन्नति की पात्रता अलग सूची के बजाय प्रवक्ता पद की वरिष्ठता पर ही निर्भर करेगी।

यह मामला स्कूल डीपीई संघ की ओर से दायर निष्पादन याचिका से जुड़ा था, जिसमें वर्ष 2019 के न्यायालय के आदेशों को लागू करने की मांग की गई थी।

भविष्य में शिकायत होने पर फिर हाईकोर्ट जा सकेंगे शिक्षक

न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने सरकार के बयान को आदेश का हिस्सा बनाते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि भविष्य में आदेशों के अनुपालन में किसी प्रकार की समस्या आती है तो वे दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

बीबीएमबी की भूमि पर अतिक्रमण मामले में सरकार और मंडी प्रशासन को नोटिस

इसी दौरान हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला मंडी की बल्ह तहसील के कांगड़ू मोहल क्षेत्र में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की भूमि पर कथित अवैध कब्जे और उससे बढ़ रहे भूस्खलन के खतरे का भी गंभीर संज्ञान लिया।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार, मंडी प्रशासन और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के आदेश

हाईकोर्ट ने मंडी के उपायुक्त को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त करें, जो मौके का निरीक्षण कर भूस्खलन, अतिक्रमण और सुरक्षा स्थिति की निष्पक्ष रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि बीबीएमबी की भूमि पर अवैध कब्जे के कारण नहर किनारे लगातार भूस्खलन हो रहा है, जिससे आसपास के कई मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

पब्बर नदी पर पुल निर्माण में देरी पर भी हाईकोर्ट सख्त

हाईकोर्ट ने रोहड़ू तहसील के सीमा क्षेत्र में पब्बर नदी पर बनने वाले पुल के निर्माण में हो रही लंबी देरी पर भी कड़ा रुख अपनाया है।

खंडपीठ ने इस मामले में जनहित याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए हैं तथा 31 अगस्त तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

याचिका में कहा गया है कि रोहड़ू और चिड़गांव क्षेत्र को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण पुल का निर्माण लंबे समय से अधूरा पड़ा है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।