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हिमाचल हाईकोर्ट में बढ़ी न्यायिक ताकत, तीन नए जजों ने ली शपथ; जानें किसका कैसा रहा न्यायिक सफर

हिमाचल हाईकोर्ट को मिले तीन नए जज, चिराग भानु सिंह ने न्यायाधीश पद की शपथ ली
भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल ने अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में ली पद एवं गोपनीयता की शपथ
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने लोक भवन में दिलाई शपथ, न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद


शिमला/धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को रविवार को तीन नए न्यायाधीश मिले। चिराग भानु सिंह ने न्यायाधीश के रूप में, जबकि भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल ने अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने तीनों नवनियुक्त न्यायाधीशों को शपथ दिलाई। इस मौके पर हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया सहित न्यायपालिका, प्रशासन और पुलिस से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

तीन नए न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण के साथ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायिक क्षमता में इजाफा हुआ है। समारोह में राज्य सरकार और न्यायपालिका से जुड़े कई प्रमुख पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। इस दौरान नए न्यायाधीशों के लंबे न्यायिक और कानूनी अनुभव को भी महत्वपूर्ण माना गया।

लोक भवन में हुआ शपथ ग्रहण समारोह

लोक भवन में आयोजित समारोह की कार्यवाही प्रदेश के मुख्य सचिव केके पंत ने संचालित की। राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज ने शपथ पत्रों पर राज्यपाल और नवनियुक्त न्यायाधीशों के हस्ताक्षर करवाए।

समारोह में हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल, हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के अलावा वरिष्ठ न्यायिक, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

शपथ ग्रहण समारोह में न्यायपालिका से जुड़े अधिकारियों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी ने इसे महत्वपूर्ण बना दिया। तीनों नए न्यायाधीशों के अनुभव को देखते हुए हाईकोर्ट की न्यायिक व्यवस्था को भी इससे मजबूती मिलने की उम्मीद है।

चिराग भानु सिंह का रहा लंबा न्यायिक और प्रशासनिक अनुभव

न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने वाले चिराग भानु सिंह का न्यायिक और कानूनी क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। वर्ष 1994 में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में पंजीकरण कराने के बाद उन्होंने अपने कानूनी करियर की शुरुआत की।

वर्ष 2003 से उन्होंने प्रदेश सरकार के उप महाधिवक्ता के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद वर्ष 2007 में उन्हें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया। न्यायिक सेवा के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं।

चिराग भानु सिंह हिमाचल प्रदेश औद्योगिक न्यायाधिकरण-सह-श्रम न्यायालय के न्यायाधीश भी रहे। इसके अलावा उन्होंने चंबा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में भी सेवाएं दीं।

उनका प्रशासनिक अनुभव भी व्यापक रहा है। वह प्रदेश सरकार में प्रधान सचिव (विधि) तथा प्रधान सचिव (लोकायुक्त एवं मानवाधिकार आयोग) के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ओएसडी के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।

चिराग भानु सिंह का अनुभव यहीं तक सीमित नहीं रहा। वह सुप्रीम कोर्ट में दो बार रजिस्ट्रार (न्यायिक-एक) के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। ऐसे में हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति के साथ उनके लंबे न्यायिक, प्रशासनिक और संवैधानिक मामलों से जुड़े अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है।

1996 में न्यायिक सेवा में आए भूपेश शर्मा

नए अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने वाले भूपेश शर्मा भी लंबे समय से न्यायिक सेवा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की। इसके बाद जुलाई 1996 में कांगड़ा में सब जज-सह-न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया।

लगभग डेढ़ दशक से अधिक समय तक विभिन्न न्यायिक जिम्मेदारियां निभाने के बाद वर्ष 2012 में उन्हें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत किया गया। उन्होंने हमीरपुर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दीं।

इसके बाद उन्हें शिमला में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। इस पद पर रहते हुए उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसी से जुड़े मामलों की न्यायिक प्रक्रिया संभाली।

भूपेश शर्मा का प्रशासनिक और हाईकोर्ट से जुड़ा अनुभव भी महत्वपूर्ण है। 4 अक्तूबर 2024 से वह हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पद पर कार्यरत थे। अब अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी शुरू हुई है।

उनके लंबे न्यायिक अनुभव को देखते हुए हाईकोर्ट में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निचली अदालत से लेकर जिला एवं सत्र न्यायालय, सीबीआई मामलों और हाईकोर्ट के प्रशासनिक दायित्वों तक का अनुभव उनके न्यायिक कार्य में उपयोगी साबित हो सकता है।

योगेश जसवाल ने भी ली अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ

योगेश जसवाल ने भी रविवार को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने लोक भवन में आयोजित समारोह में उन्हें शपथ दिलाई।

हालांकि उपलब्ध विवरण में योगेश जसवाल के पूर्व न्यायिक सफर से जुड़ी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन उनका हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ लेना प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

न्यायिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में अदालतों पर विभिन्न प्रकार के मामलों का दबाव रहता है। ऐसे में हाईकोर्ट में नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से मामलों की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद रहती है।

तीनों न्यायाधीशों का अलग-अलग स्तर पर रहा अनुभव भी हाईकोर्ट के लिए महत्वपूर्ण है। चिराग भानु सिंह के पास वकालत, न्यायिक सेवा, सरकारी विधि विभाग, मानवाधिकार और न्यायिक प्रशासन का लंबा अनुभव है। वहीं भूपेश शर्मा ने न्यायिक सेवा के साथ सीबीआई मामलों और हाईकोर्ट प्रशासन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

तीनों के शपथ ग्रहण के साथ अब हाईकोर्ट की न्यायिक व्यवस्था में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। खासकर लंबे समय से लंबित मामलों की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में नए न्यायाधीशों की भूमिका अहम हो सकती है।

रविवार को हुआ यह शपथ ग्रहण समारोह इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इसमें न्यायपालिका के साथ प्रदेश सरकार, विधानसभा, प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ प्रतिनिधि एक मंच पर मौजूद रहे। नए न्यायाधीशों ने संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने की दिशा में औपचारिक रूप से अपना कार्यभार शुरू कर दिया है।