➤ हिमाचल सूचना आयोग में सीआईसी का पद जून 2025 से खाली, आईसी पद भी जुलाई 2025 से रिक्त
➤ सुप्रीम कोर्ट की तय समयसीमा बीतने पर हाईकोर्ट ने सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के दिए निर्देश
➤ आरटीआई अपीलों की सुनवाई प्रभावित होने पर 14 और 22 सितंबर को होगी मामले की अहम सुनवाई
शिमला। हिमाचल प्रदेश राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से खाली पड़े महत्वपूर्ण पदों को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) और राज्य सूचना आयुक्त (आईसी) के पद महीनों से रिक्त होने के कारण आरटीआई से जुड़ी अपीलों की सुनवाई प्रभावित होने पर अदालत ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्तियां करने को कहा है।
चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद यदि तय समयसीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है तो सरकार को अब अगली सुनवाई से पहले आवश्यक कदम उठाने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को होगी।
यह मामला हाईकोर्ट के सामने एक प्रतिवेदन के आधार पर पहुंचा था। अदालत ने इस प्रतिवेदन को गंभीरता से लेते हुए मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। सुनवाई में सामने आया कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त का पद जून 2025 से खाली है, जबकि राज्य सूचना आयुक्त का पद जुलाई 2025 से रिक्त पड़ा है। लंबे समय से महत्वपूर्ण संवैधानिक और वैधानिक जिम्मेदारी वाले पदों पर नियुक्तियां नहीं होने से राज्य सूचना आयोग के कामकाज पर सीधा असर पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं पूरी हुई प्रक्रिया
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को हिमाचल सरकार को राज्य सूचना आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। शीर्ष अदालत ने चयन प्रक्रिया का परिणाम अधिसूचित करने और उसके बाद नियुक्तियां करने के लिए समयसीमा भी निर्धारित की थी।
हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर गौर किया कि सुप्रीम कोर्ट की तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाए।
हाईकोर्ट का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य सूचना आयोग आरटीआई कानून के तहत नागरिकों के सूचना के अधिकार की रक्षा करने वाला महत्वपूर्ण वैधानिक मंच है। जब किसी नागरिक को किसी सरकारी विभाग के जन सूचना अधिकारी (पीआईओ) के आदेश से संतुष्टि नहीं होती और प्रथम अपील के बाद भी उसका मामला लंबित रहता है, तो दूसरी अपील के लिए राज्य सूचना आयोग का रुख किया जाता है।
ऐसे में आयोग में आयुक्तों के पद लंबे समय तक खाली रहने का सीधा असर आरटीआई मामलों की सुनवाई और उनके निस्तारण पर पड़ सकता है।
दूसरे मामले में भी हाईकोर्ट ने जताई चिंता
राज्य सूचना आयोग में रिक्त पदों को लेकर हाईकोर्ट में एक अलग याचिका भी लंबित है। इस मामले में एकल पीठ ने आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य सदस्यों के पद रिक्त होने के कारण आरटीआई व्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को गंभीरता से लिया है।
जस्टिस संदीप शर्मा ने कुलदीप महरोल की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा कि आयोग के रिक्त पदों को आखिर कब तक भरा जाएगा। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह 14 सितंबर 2026 या उससे पहले अदालत के समक्ष इस संबंध में स्पष्ट समयसीमा बताए।
इस मामले में अदालत के सामने यह चिंता भी सामने आई कि यदि सूचना आयोग प्रभावी रूप से काम नहीं करता है तो आरटीआई आवेदकों को अपने वैधानिक अधिकारों के इस्तेमाल में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आरटीआई आवेदकों के सामने बढ़ रही परेशानी
याचिका में कहा गया है कि राज्य सूचना आयोग के प्रभावी रूप से काम नहीं करने के कारण आरटीआई आवेदकों को परेशानी हो रही है। सरकारी विभागों के जन सूचना अधिकारियों के आदेशों के खिलाफ दूसरी अपील के लिए राज्य स्तर पर सूचना आयोग ही संबंधित वैधानिक मंच है।
सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण अधिकार देता है। ऐसे में आयोग में लंबे समय तक पद खाली रहने से उन मामलों की सुनवाई और निस्तारण प्रभावित होने की आशंका रहती है, जिनमें नागरिक सरकारी विभागों से मांगी गई सूचना को लेकर अपील करते हैं।
हाईकोर्ट ने भी माना कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत राज्य सूचना आयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। आयुक्तों के पद रिक्त रहने से नागरिकों के आरटीआई से जुड़े वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
मुख्य सचिव के समक्ष मामला उठाने के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सरकारी वकील को निर्देश दिया कि वह इस विषय को मुख्य सचिव के समक्ष उठाएं। अदालत का जोर इस बात पर है कि राज्य सूचना आयोग में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।
एक तरफ खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और उसकी तय समयसीमा के संदर्भ में सरकार से प्रक्रिया पूरी करने को कहा है, वहीं दूसरी ओर एकल पीठ के समक्ष चल रहे मामले में सरकार को रिक्त पदों को भरने की स्पष्ट समयसीमा बताने के निर्देश दिए गए हैं।
अब इस पूरे मामले में 14 सितंबर और 22 सितंबर की तारीखें महत्वपूर्ण हो गई हैं। 14 सितंबर तक सरकार को एकल पीठ के समक्ष रिक्त पद भरने की समयसीमा स्पष्ट करनी है, जबकि 22 सितंबर को खंडपीठ के समक्ष मुख्य मामले की सुनवाई होगी।
राज्य सूचना आयोग के पदों पर नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती से साफ है कि अदालत आरटीआई व्यवस्था के प्रभावित होने और नागरिकों के वैधानिक अधिकारों में आ रही बाधा को गंभीरता से देख रही है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार अगली सुनवाई से पहले चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्तियों को लेकर क्या कदम उठाती है।



