➤ किन्नौर विशेष न्यायालय ने हेड कांस्टेबल रवि चोपड़ा को दोषी ठहराया
➤ अदालत ने चार साल के कठोर कारावास के साथ 46 हजार रुपये जुर्माना लगाया
➤ समझौते के नाम पर 60 हजार मांगने और 50 हजार खाते में आने का था मामला
रामपुर बुशहर। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में वर्ष 2020 से जुड़े भ्रष्टाचार और वसूली के मामले में रामपुर स्थित किन्नौर विशेष न्यायालय ने तत्कालीन पुलिस चौकी कटगांव प्रभारी हेड कांस्टेबल रवि चोपड़ा को दोषी करार देते हुए चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर कुल 46 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामला भावानगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है और इसमें पुलिस पद तथा वर्दी के कथित दुरुपयोग के आरोपों की सुनवाई के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों पर विचार करते हुए फैसला सुनाया।
मामले के अनुसार 16 अप्रैल 2020 की रात कुछ युवक काफनू स्थित शराब की दुकान पर पहुंचे थे। दुकान बंद होने के कारण युवकों द्वारा शटर पर लात मारने की बात सामने आई थी। इसके बाद दुकान के शटर और बल्ब को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई। घटना के अगले दिन पुलिस ने युवकों को पूछताछ के लिए पुलिस चौकी कटगांव बुलाया था। इसके बाद शराब की दुकान को हुए नुकसान को लेकर समझौता कराने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार इसी दौरान तत्कालीन चौकी प्रभारी रवि चोपड़ा ने युवकों को डराया-धमकाया और उनके साथ मारपीट की। अभियोजन का आरोप था कि गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की धमकी देकर उनसे 60 हजार रुपये की मांग की गई थी। यह रकम शराब की दुकान को हुए नुकसान के संबंध में समझौता कराने के नाम पर मांगे जाने का आरोप था।
इस मामले में 24 अप्रैल 2020 को आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 323, 504, 506 और 384 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच के दौरान पुलिस और अभियोजन पक्ष ने विभिन्न दस्तावेजी तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया।
अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 39 गवाहों के बयान पेश किए गए। इसके अलावा मामले से जुड़े दस्तावेजों को भी अदालत के समक्ष रखा गया। जांच के दौरान बैंक खातों में हुए लेन-देन, मोबाइल फोन और व्हाट्सएप चैट समेत अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की गई थी। रिकॉर्ड के अनुसार 19 अप्रैल 2020 को आरोपी के बैंक खाते में 50 हजार रुपये जमा हुए थे। अभियोजन ने इस लेन-देन को मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों में शामिल किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध गवाहियों और दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत के फैसले के अनुसार आरोपी ने अपने पुलिस पद और वर्दी का दुरुपयोग करते हुए पीड़ितों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और समझौते के नाम पर रकम ली। अदालत ने इस कृत्य को सार्वजनिक विश्वास को ठेस पहुंचाने वाला गंभीर अपराध माना।
अदालत ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए दोषी को सजा में राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसे चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही अदालत ने कुल 46 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पुलिस पद से जुड़े व्यक्ति पर ही पद और वर्दी का दुरुपयोग कर रकम लेने का आरोप था और अदालत ने सुनवाई के बाद उसे दोषी माना। मामले में बैंक लेन-देन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ बड़ी संख्या में गवाहों के बयान भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बने।
किन्नौर के भावानगर क्षेत्र से जुड़े इस पुराने मामले में अदालत के फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि वर्ष 2020 में सामने आए आरोपों पर लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद दोषसिद्धि हुई है। अदालत ने अपने फैसले में सार्वजनिक पद पर रहते हुए अधिकारों के कथित दुरुपयोग को गंभीरता से लिया और दोषी को कठोर सजा सुनाई।



