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हिमाचल में लॉटरी के विरोध में गरजा विपक्ष, विधानसभा परिसर में भाजपा विधायकों ने किया प्रदर्शन

लॉटरी के विरोध में विधानसभा परिसर में भाजपा विधायक दल का प्रदर्शन
जयराम ठाकुर के नेतृत्व में हाथों में तख्तियां लेकर की जमकर नारेबाजी
विपक्ष ने कहा- लॉटरी-जुआ बंद करो, युवाओं के लिए रोजगार का प्रबंध करो


हिमाचल प्रदेश में लॉटरी व्यवस्था को लेकर सियासी घमासान बुधवार को विधानसभा परिसर तक पहुंच गया। विधानसभा सत्र के समापन से एक दिन पहले सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भाजपा विधायक दल ने सरकार की लॉटरी व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायक हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर विधानसभा परिसर में पहुंचे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

भाजपा विधायकों ने प्रदर्शन के दौरान “लॉटरी-जुआ बंद करो, रोजगार का प्रबंध करो” जैसे नारे लगाए। विपक्ष ने सरकार की लॉटरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे युवाओं और आम लोगों के हितों के खिलाफ बताया। विधानसभा परिसर में हुए इस प्रदर्शन से सत्र के आखिरी चरण में लॉटरी का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया।

जयराम ठाकुर बोले- एक का भाग्य खुलेगा, लाखों का डूबेगा

प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में लॉटरी शुरू करने का फैसला हिमाचल के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा लॉटरी व्यवस्था का विरोध करती है और उनका मानना है कि लॉटरी की आदत भी नशे की तरह नुकसानदायक हो सकती है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि जब किसी व्यक्ति को लॉटरी की लत लग जाती है तो उससे बाहर निकलना आसान नहीं रहता। उनके अनुसार, प्रदेश में पहले भी लॉटरी के कारण कई परिवार आर्थिक संकट में पहुंचे और कई लोगों को अपनी जमीन और घर तक गंवाने पड़े।

उन्होंने कहा कि लॉटरी के लालच में लोग अपनी कमाई का पैसा गंवा सकते हैं। इसका असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार आर्थिक परेशानी में आ सकता है। उन्होंने मौजूदा सरकार के लॉटरी शुरू करने के फैसले को नई पीढ़ी के भविष्य से जोड़ते हुए इसे चिंता का विषय बताया।

1999 के बाद बंद हुई थी लॉटरी की व्यवस्था

जयराम ठाकुर ने अपने बयान में कहा कि प्रदेश में लॉटरी को पहले इसलिए बंद किया गया था क्योंकि इसके कारण कई लोगों के परिवार प्रभावित हुए थे। उन्होंने दावा किया कि 1999 के बाद बड़ी मुश्किल से प्रदेश के लोग लॉटरी की उस आदत से बाहर निकले

उन्होंने कहा कि लॉटरी से प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बजाय लोगों के घर-परिवार आर्थिक संकट में फंस सकते हैं। उनके अनुसार, प्रदेश की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार के पास लॉटरी के अलावा कई दूसरे रास्ते मौजूद हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को राजस्व जुटाने के लिए ऐसे विकल्प तलाशने चाहिए जिनसे आम लोगों और विशेष रूप से युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उन्होंने रोजगार के अवसर बढ़ाने को प्राथमिकता देने की बात कही।

युवाओं को रोजगार चाहिए, लॉटरी का टिकट नहीं

भाजपा के प्रदर्शन में युवाओं के रोजगार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। विपक्षी विधायकों ने लॉटरी व्यवस्था के खिलाफ नारे लगाते हुए सरकार से रोजगार के अवसर पैदा करने की मांग की।

भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर चाहिए, न कि ऐसी व्यवस्था जिसमें आर्थिक लाभ की उम्मीद में लोग लॉटरी टिकट खरीदने के लिए प्रेरित हों। इसी संदेश को लेकर प्रदर्शन के दौरान हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर भाजपा विधायकों ने सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की।

विधानसभा सत्र के समापन से पहले गरमाया मुद्दा

विधानसभा सत्र के समापन से ठीक एक दिन पहले हुए इस प्रदर्शन ने लॉटरी व्यवस्था को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन कर सरकार को घेरा।

भाजपा विधायक दल ने सामूहिक रूप से लॉटरी के विरोध में अपनी आवाज उठाई। प्रदर्शन में नारेबाजी के साथ सरकार से लॉटरी व्यवस्था बंद करने और रोजगार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।

विपक्ष का कहना है कि प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों का समाधान ऐसे माध्यमों से तलाशा जाना चाहिए जिनसे समाज पर नकारात्मक असर न पड़े। वहीं, लॉटरी व्यवस्था को लेकर सरकार का पक्ष इस राजनीतिक बहस में महत्वपूर्ण रहेगा।

जयराम का दावा- लॉटरी से एक का फायदा, लाखों का नुकसान

जयराम ठाकुर ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि “लॉटरी से एक आदमी का भाग्य खुलेगा लेकिन लाखों लोगों का डूब जाएगा”। उनके इस बयान के जरिए भाजपा ने लॉटरी के आर्थिक और सामाजिक प्रभाव को लेकर अपनी आपत्ति स्पष्ट करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि लॉटरी की आदत पड़ने के बाद इससे बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। उनके अनुसार, इसका असर लोगों की बचत और पारिवारिक आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की।

विधानसभा परिसर में हुए प्रदर्शन से साफ है कि लॉटरी का मुद्दा अब केवल राजस्व व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विपक्ष इसे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे के रूप में भी उठा रहा है। सत्र के अंतिम दिन से पहले हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद अब निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।