➤ केन्द्रीय सूची में 28.24 लाख NFSA लाभार्थियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ; 2,222 मृतक नाम सूची में
➤ प्रारम्भिक तौर पर 5,71,625 संदिग्ध पाए गए; संशोधित आकलन के बाद 5.32 लाख संदिग्ध सूचीबद्ध
➤ 2,918 वाहनधारक मुफ्त राशन ले रहे; 40 हजार दोहरे पंजीकरण और 21,088 का सत्यापन पूरा — सत्यापन जारी
शिमला। हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत मिलने वाले मुफ्त व सस्ते राशन की पात्रता सूची में व्यापक अनियमितताएँ उजागर हुई हैं। केंद्र सरकार द्वारा भेजी गयी सूची के अनुसार प्रदेश में कुल 28.24 लाख लाभार्थियों में से प्रारम्भिक तौर पर 5,71,625 लोगों को संदिग्ध करार दिया गया था। बाद में संशोधित आकलन के बाद अब लगभग 5.32 लाख लाभार्थियों को सस्पेक्टेड श्रेणी में रखा गया है और उनका सत्यापन तेज़ी से चल रहा है।
जांच में यह भी पाया गया कि सूची में 2,222 ऐसे नाम दर्ज हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है, फिर भी वे सूची में बने हुए हैं। साथ ही 2,918 वाहनधारक मुफ्त राशन का लाभ उठा रहे हैं। विभागीय जांच में 40 हजार दोगुने पंजीकरण वाले लाभार्थी भी मिले हैं।
अब तक 21,088 लाभार्थियों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग की टीमें जिलों में घर-घर सर्वे कर रही हैं और जो भी अपात्र पाए जाएंगे, उन्हें सूची से बाहर किया जाएगा। केंद्र ने यह स्पष्ट किया है कि सूची में कई ऐसे लोग भी शामिल पाए गए जिनके पास वाहन, एक हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि, सीमा से अधिक वार्षिक आय या सरकारी नौकरी है। कुछ लाभार्थियों ने पिछले छह महीनों से राशन भी नहीं लिया—इसी आधार पर उन्हें संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है।
राज्य में NFSA के तहत पीएचएच, बीपीएल और अंत्योदय श्रेणी के लगभग 7 लाख परिवार राशन ले रहे हैं। योजना के अंतर्गत रियायती दरों पर प्रति सदस्य 2 किलो चावल मुफ्त, आटे व अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।
एडिशनल डायरेक्टर सुरेंद्र राठौर ने बताया कि केंद्र द्वारा भेजी सूची का गंभीरता से सत्यापन किया जा रहा है और जल्द ही अपात्र लोगों को NFSA सूची से हटाया जाएगा ताकि लाभ वास्तविक गरीब परिवारों तक पहुंचे।



