➤ अतिक्रमण करने वाले परिवार की बहू भी पंचायत-नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ पाएगी
➤ महिलाओं के लिए एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति पर 4 फीसदी स्टांप ड्यूटी का प्रावधान
➤ बाहरी लोगों के लिए 12 फीसदी शुल्क, पावर ऑफ अटॉर्नी पर 100 गुना स्टांप ड्यूटी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को सरकार ने दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए। सदन में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 और भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी गई। अब दोनों विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे। इन संशोधनों का असर एक ओर पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ने की पात्रता पर पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में संपत्ति की खरीद-बिक्री और कुछ विशेष प्रकार के दस्तावेजों पर लगने वाले स्टांप शुल्क में भी बदलाव होगा।
अतिक्रमण के मामले में अब परिवार की बहू भी होगी दायरे में
पंचायती राज कानून में किए गए संशोधन में सबसे अहम बदलाव परिवार की परिभाषा से जुड़ा है। अभी तक के प्रावधान के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है, तो उसके बेटे के पंचायत या नगर निकाय चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती थी, लेकिन उसकी बहू इस प्रावधान के दायरे से बाहर रहती थी।
नए संशोधन के बाद यह स्थिति बदल जाएगी। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति के परिवार की बहू भी संबंधित अयोग्यता के दायरे में आएगी। यानी केवल इस आधार पर कि अतिक्रमणकर्ता का बेटा चुनाव नहीं लड़ सकता, जबकि बहू चुनाव लड़ सकती है, अब ऐसा रास्ता उपलब्ध नहीं रहेगा।
सरकार के इस संशोधन से चुनावी पात्रता से जुड़े नियमों में परिवार की परिभाषा को अधिक व्यापक बनाया गया है। इसका सीधा असर आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनाव में देखने को मिल सकता है।
छह साल पहले निर्वाचन आयोग ने दिया था सुझाव
परिवार की परिभाषा में बदलाव का सुझाव नया नहीं है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से करीब छह साल पहले ही सरकार को इस संबंध में सुझाव दिया गया था। आयोग का मानना था कि मौजूदा व्यवस्था में एक ही परिवार के सदस्यों के लिए अलग-अलग पात्रता की स्थिति पैदा हो रही थी।
हालांकि पूर्व सरकार के कार्यकाल में इस सुझाव पर संशोधन नहीं किया गया। अब मौजूदा सरकार ने पंचायती राज कानून में संशोधन कर परिवार की परिभाषा को बदल दिया है। विधेयक पारित होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी मिलने पर यह संशोधित प्रावधान प्रभावी होगा।
स्टांप ड्यूटी में भी बड़ा बदलाव
विधानसभा में पारित दूसरे महत्वपूर्ण विधेयक के तहत भारतीय स्टांप अधिनियम की अनुसूची 1-क में संशोधन किया गया है। सरकार की ओर से इसका कारण बताते हुए कहा गया कि कई दस्तावेजों पर लागू स्टांप शुल्क की दरें लंबे समय से नहीं बदली गई थीं। मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार इन दरों को तर्कसंगत बनाने के लिए संशोधन किया गया है।
नए प्रावधानों में संपत्ति की खरीद पर खरीदार की श्रेणी और संपत्ति के मूल्य के आधार पर अलग-अलग स्टांप शुल्क निर्धारित किया गया है।
महिलाओं को एक करोड़ तक की संपत्ति पर 4 फीसदी शुल्क
संशोधित प्रावधान के अनुसार महिलाओं के लिए एक करोड़ रुपये तक की कीमत वाली संपत्ति खरीदने पर 4 फीसदी स्टांप ड्यूटी लगेगी। वहीं एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति खरीदने पर महिला खरीदारों के लिए भी स्टांप शुल्क बढ़कर 8 फीसदी हो जाएगा।
पुरुष और अन्य खरीदारों के लिए 40 लाख रुपये तक की संपत्ति पर 6 फीसदी स्टांप ड्यूटी निर्धारित की गई है। 40 लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति पर यह शुल्क 8 फीसदी होगा।
इस तरह संपत्ति के मूल्य के साथ-साथ खरीदार की श्रेणी के आधार पर स्टांप शुल्क की अलग-अलग दरें लागू होंगी।
हिमाचल से बाहर के लोगों पर 12 फीसदी स्टांप ड्यूटी
प्रदेश से बाहर रहने वाले या हिमाचल में संपत्ति लेने वाले बाहरी लोगों के लिए भी संशोधन में अलग प्रावधान किया गया है। हिमाचल प्रदेश अभिधृति और भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 (2) (ज) के तहत सरकार की अनुमति से संपत्ति का हस्तांतरण या पट्टा लेने वाले बाहरी व्यक्तियों से 12 फीसदी स्टांप शुल्क वसूला जाएगा।
इस श्रेणी में महिला और पुरुष खरीदारों के लिए अलग-अलग दर नहीं होगी। दोनों पर समान रूप से 12 फीसदी स्टांप शुल्क लागू होगा।
यह प्रावधान हिमाचल में जमीन और संपत्ति के लेनदेन से जुड़े नियमों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि धारा 118 के तहत बाहरी व्यक्तियों के संपत्ति लेनदेन पर पहले से ही विशेष कानूनी प्रावधान लागू हैं।
एक साल के भीतर दोबारा रजिस्ट्री पर भी सख्ती
सरकार ने एक ही खरीदार और विक्रेता के बीच कम अवधि में बार-बार रजिस्ट्री होने की स्थिति में भी शुल्क व्यवस्था को सख्त किया है। यदि एक ही खरीदार और विक्रेता के बीच एक साल के भीतर दोबारा रजिस्ट्री होती है और संबंधित लेनदेन का कुल मूल्य निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है, तो पहले के लेनदेन को भी जोड़कर 8 फीसदी स्टांप शुल्क लिया जाएगा।
इस प्रावधान का उद्देश्य एक ही पक्ष के बीच लगातार होने वाले संपत्ति लेनदेन को शुल्क निर्धारण से बाहर रखने की संभावना को सीमित करना है।
पावर ऑफ अटॉर्नी पर सामान्य शुल्क से 100 गुना तक भार
संशोधन में पावर ऑफ अटॉर्नी को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। हिमाचल से बाहर रहने वाले किसी गैर-निवासी के पक्ष में या हिमाचल से बाहर स्थित संपत्ति के संबंध में पावर ऑफ अटॉर्नी करने पर सामान्य स्टांप शुल्क की तुलना में 100 गुना शुल्क वसूला जाएगा।
इस प्रावधान से ऐसे दस्तावेजों पर स्टांप शुल्क का वित्तीय भार काफी बढ़ जाएगा। सरकार ने स्टांप शुल्क की विभिन्न दरों में बदलाव को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप दरों को तर्कसंगत बनाने की कवायद बताया है।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू होंगे संशोधित प्रावधान
दोनों विधेयक विधानसभा से पारित होने के बाद अब राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ही इन संशोधनों के लागू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पंचायती राज कानून में परिवार की परिभाषा का विस्तार जहां स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की पात्रता को प्रभावित करेगा, वहीं स्टांप कानून में बदलाव का सीधा संबंध संपत्ति खरीद, रजिस्ट्री, बाहरी खरीदारों और पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े वित्तीय दायित्वों से है। ऐसे में आने वाले समय में इन दोनों संशोधनों का असर स्थानीय चुनावों के साथ-साथ प्रदेश में संपत्ति लेनदेन पर भी दिखाई देगा।



