➤ शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के 230 बैकलॉग पदों पर जॉब ट्रेनी से भर्ती पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक
➤ सरकार और संबंधित प्रतिवादियों से दो सप्ताह में जवाब मांगा, अगली सुनवाई 7 अक्तूबर को
➤ कुल 870 पदों की भर्ती का मामला, 230 बैकलॉग पदों को लेकर याचिकाकर्ताओं ने उठाए सवाल
शिमला। हिमाचल प्रदेश में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के बैकलॉग पदों को भरने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा कानूनी पेच सामने आया है। प्रदेश हाईकोर्ट ने 230 बैकलॉग पदों को नई जॉब ट्रेनी स्कीम के तहत भरने पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं की शिकायत को जायज मानते हुए आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक सरकार इन पदों को जॉब ट्रेनी आधार पर नहीं भरेगी।
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने मामले में राज्य सरकार और संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्तूबर को होगी।
भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को लेकर याचिकाकर्ताओं ने उठाई आपत्ति
यह मामला शैलजा किरण और इससे जुड़ी अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के लंबे समय से लंबित पदों को भरने की प्रक्रिया अब सरकार शुरू कर रही है, लेकिन बैकलॉग पदों को भरने के लिए जिस व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह मौजूदा भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुरूप नहीं है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार को इन बैकलॉग पदों को मौजूदा भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत नियमित आधार पर भरना चाहिए। उनके अनुसार नियमों में 50 फीसदी पद सीधी भर्ती/अनुबंध और 50 फीसदी पद बैचवाइज आधार पर भरे जाने हैं। इसके बजाय इन पदों को नई जॉब ट्रेनी स्कीम के तहत भरने का प्रयास किया जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने इसी आधार पर इस प्रक्रिया को चुनौती दी और इसे नियमों के विपरीत बताया।
870 पदों की भर्ती का है पूरा मामला
अदालत के समक्ष आया मामला कुल 870 शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के पदों को भरने से जुड़ा है। ये पद लंबे समय से कानूनी मुकदमेबाजी के कारण लंबित चल रहे थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि पुरानी मुकदमेबाजी समाप्त होने के बाद अब सरकार ने इन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की है।
इन कुल 870 पदों में 230 पद बैकलॉग के हैं। विवाद मुख्य रूप से इन्हीं 230 पदों को जॉब ट्रेनी के आधार पर भरने को लेकर है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब पुराने विवाद और मुकदमेबाजी का रास्ता साफ हो गया है तो अब भर्ती को निर्धारित भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया शिकायत को माना जायज
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार किया। अदालत ने प्रथम दृष्टया उनकी शिकायत को जायज पाया। इसके बाद अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक सरकार 230 बैकलॉग पदों को जॉब ट्रेनी आधार पर नहीं भरेगी।
इस अंतरिम रोक का मतलब है कि मामले पर अंतिम फैसला आने तक इन बैकलॉग पदों को लेकर जॉब ट्रेनी स्कीम के तहत आगे की भर्ती प्रक्रिया पर रोक रहेगी।
अदालत ने राज्य सरकार और मामले से जुड़े अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। सरकार का पक्ष सामने आने के बाद मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस विवाद पर आगे विचार करेगी।
7 अक्तूबर को होगी अगली सुनवाई
अब इस मामले में अगली सुनवाई 7 अक्तूबर को निर्धारित की गई है। उस दौरान सरकार और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से अदालत के समक्ष जवाब रखा जाएगा।
फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण 230 बैकलॉग पदों को जॉब ट्रेनी के आधार पर भरने की प्रक्रिया रुक गई है। हालांकि कुल 870 पदों की भर्ती से जुड़ा व्यापक मामला अभी अदालत के विचाराधीन है और अंतिम स्थिति आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद स्पष्ट होगी।
जॉब ट्रेनी स्कीम बनाम पुराने भर्ती नियम बना विवाद का केंद्र
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के बैकलॉग पदों को किस भर्ती व्यवस्था के तहत भरा जाए। एक ओर सरकार इन 230 बैकलॉग पदों को नई जॉब ट्रेनी स्कीम के तहत भरने की दिशा में आगे बढ़ रही थी, जबकि दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं ने मौजूदा भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के आधार पर इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब सरकार को अपना पक्ष अदालत में रखना होगा। अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन 230 बैकलॉग पदों पर भर्ती किस व्यवस्था के तहत आगे बढ़ेगी।
कैनरा बैंक की फैमिली पेंशन मामले में भी हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
इसी बीच, प्रदेश हाईकोर्ट के कड़े रुख और हस्तक्षेप के बाद कैनरा बैंक ने एक याचिकाकर्ता को फैमिली पेंशन और उसका बकाया एरियर खाते में जमा कर दिया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने सावित्री देवी की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए मामले में बैंक की ओर से पेश दस्तावेजों का अवलोकन किया।
बैंक के अनुसार याचिकाकर्ता को उनके पति की मृत्यु की तारीख 23 जुलाई 2023 से देय फैमिली पेंशन स्वीकृत की गई है। याचिकाकर्ता की शिकायत थी कि उन्हें निर्धारित तिथि से पेंशन नहीं मिली, जिसके कारण पेंशन का एरियर भी लंबित था।
सुनवाई के दौरान बैंक प्रबंधन ने 9 सितंबर 2026 के निर्देशों का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि पेंशन के बकाये की राशि भी याचिकाकर्ता के बैंक खाते में जमा कर दी गई है। याचिकाकर्ता ने बकाया राशि प्राप्त होने की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने एरियर की कुल गणना पर असंतोष जताया।
इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को राशि की गणना को लेकर कोई शिकायत है तो वह कानून के अनुसार उपयुक्त मंच पर अपनी बात रख सकती हैं।



