➤ नई SOP को लेकर DGP अशोक तिवारी ने मीडिया में दी स्पष्ट सफाई
➤ SHO-DSP क्राइम व लॉ एंड ऑर्डर पर दे सकेंगे बयान
➤ जांच, पुलिसिंग पॉलिसी व अन्य विषयों पर SP की अनुमति अनिवार्य
हिमाचल पुलिस की मीडिया से संवाद को लेकर जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर उठे विवाद के बीच DGP अशोक तिवारी ने स्थिति स्पष्ट की है। दैनिक भास्कर डिजिटल से बातचीत में उन्होंने कहा कि सब-डिवीजनल पुलिस अधिकारी (SDPO) और थाना प्रभारी (SHO) अब क्राइम और लॉ एंड ऑर्डर से जुड़े मामलों पर मीडिया से बात कर सकेंगे।
DGP ने साफ किया कि क्राइम और कानून-व्यवस्था से इतर विषयों, जैसे जांच की दिशा, पुलिसिंग पॉलिसी या अन्य संवेदनशील मामलों पर बयान देने के लिए SP की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। उन्होंने कहा कि SOP का उद्देश्य सूचनाओं पर रोक नहीं, बल्कि जिम्मेदार और अधिकृत संवाद व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
गौरतलब है कि 17 दिसंबर को जारी SOP के बाद यह मामला विवादों में घिर गया। मीडिया संगठनों और पत्रकारों ने इसे सूचनाओं के प्रवाह पर अंकुश बताते हुए विरोध दर्ज कराया। SOP में उल्लेख किया गया था कि क्राइम, कानून-व्यवस्था, जांच और पुलिस नीतियों से जुड़े मामलों पर केवल जिला SP और रेंज DIG ही औपचारिक रूप से मीडिया से बात कर सकेंगे, वह भी आवश्यकता पड़ने पर पुलिस मुख्यालय की अनुमति के बाद।
SOP सामने आने के बाद सोशल मीडिया और मीडिया हलकों में यह आशंका जताई गई कि चोरी, लूट, डकैती, सड़क हादसे जैसे मामलों की त्वरित पुष्टि के लिए भी SP या DIG से संपर्क करना पड़ेगा, जबकि कई बार वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध नहीं होते। इससे अपुष्ट खबरें फैलने का खतरा बढ़ने की बात कही गई।
वरिष्ठ पत्रकार संजीव शर्मा ने इन आदेशों को सूचनाओं का गला घोंटने का प्रयास बताते हुए कहा कि कई सूचनाएं खबर से ज्यादा जनहित और जन-जागरूकता के लिए होती हैं। वहीं नेशनल कॉलमिस्ट और लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन केएस तोमर ने चेतावनी दी कि मीडिया पर जितनी ज्यादा पाबंदी होगी, उतना ही नुकसान सरकार और पुलिस को होगा, क्योंकि डिजिटल दौर में पुष्टि में देरी से आधी-अधूरी सूचनाएं सामने आती हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि SOP लागू रखनी है, तो अन्य राज्यों की तरह रोजाना तय समय पर मीडिया ब्रीफिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि सूचना का प्रवाह भी बना रहे और भ्रम भी न फैले।



