➤ पहाड़ी क्षेत्रों में बार-बार सड़कें उखड़ने की समस्या से निपटने को पीडब्ल्यूडी (PWD) ने तैयार किया नया रोडमैप
➤ पारंपरिक कोलतार की जगह अब सीमेंट, कंक्रीट और वेस्ट प्लास्टिक मिश्रित तकनीक से बनेंगी हिमाचल की सड़कें
➤ लागत में 30% बढ़ोतरी के बावजूद 20 से 30 साल तक टिकेंगी सड़कें, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने दिया बयान
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बार-बार सड़कें उखड़ने तथा उनकी बार-बार होने वाली मरम्मत पर करोड़ों रुपये के भारी-भरकम खर्च को नियंत्रित करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक महत्वाकांक्षी ‘जलवायु अनुकूल सड़क रोडमैप’ तैयार किया है। इस नई नीति के तहत अब राज्य में ऐसी टिकाऊ और मजबूत सड़कें बनाने की तैयारी है, जो भारी बारिश, जलभराव और भूस्खलन जैसी आपदाओं के दौरान भी लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहें। वर्ष 2023 में आई भीषण आपदा के बाद कई जिलों में हफ्तों तक सड़क संपर्क बाधित रहने से सबक लेते हुए विभाग ने अपनी निर्माण शैली में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है।
नए रोडमैप के मुख्य आकर्षण के रूप में पारंपरिक कोलतार (डामर) के विकल्प पर काम किया जाएगा। कोलतार की सड़कें बारिश के पानी के रिसाव और जलभराव के कारण बहुत जल्दी खराब हो जाती हैं। इसके समाधान के रूप में अब सीमेंट, कंक्रीट और वेस्ट प्लास्टिक मिश्रित तकनीक (White-Topping & Plastic Roads) का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाएगा। यद्यपि सीमेंट-कंक्रीट और प्लास्टिक मिश्रित सड़कों के निर्माण में शुरुआती लागत में लगभग 30 प्रतिशत का इजाफा होता है, लेकिन विशेषज्ञों और विभाग का दावा है कि इन सड़कों की उम्र 20 से 30 साल तक होती है। इससे लंबे समय में सड़कों के रख-रखाव (Maintenance Cost) पर होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च में भारी बचत होगी।
विभाग अब तक संवेदनशील ढलानों पर केवल 10 से 20 मीटर के छोटे पैच या चुनिंदा हिस्सों में 100 से 500 मीटर तक प्लास्टिक मिश्रित सड़कें बनाता आया है, जिसे अब व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना है। इस नए इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल में सड़कों के साथ-साथ ड्रेनेज सिस्टम (जल निकासी व्यवस्था) पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाएगा। इसके अंतर्गत पक्के कलवर्ट, साइड नालियां और वाटर आउटलेट बनाना अनिवार्य किया जाएगा ताकि पानी सड़क की सतह पर जमा न हो। मामले पर जानकारी देते हुए लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता, टिकाऊपन और नई तकनीक के समावेश को प्राथमिकता दे रही है।



