➤ आरडीजी नहीं मिलने के बावजूद पेंशन एरियर का भुगतान चरणबद्ध तरीके से जारी
➤ सीएम सुक्खू ने कर्मचारियों से प्रदेश की आरडीजी स्थिति समझने का किया आग्रह
➤ कर्मचारियों और अधिकारियों को ध्यान में रखकर आरडीजी से जुड़े फैसले नहीं रोकने की कही बात
एएनआई, शिमला। हिमाचल प्रदेश में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) को लेकर जारी देरी के बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को आरडीजी नहीं मिलने के बावजूद सरकार पेंशनरों के एरियर का भुगतान धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से कर रही है। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से प्रदेश की मौजूदा आरडीजी स्थिति को समझने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को ध्यान में रखकर आरडीजी से संबंधित भुगतान या निर्णय नहीं रोकेगी। उनका कहना है कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए सरकार अपने स्तर पर कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की कोशिश कर रही है।
आरडीजी नहीं मिल रही, फिर भी पेंशन एरियर का भुगतान जारी
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि केंद्र से आरडीजी नहीं मिलने की स्थिति के बावजूद राज्य सरकार पेंशन के एरियर का भुगतान कर रही है। यह भुगतान एक साथ करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
प्रदेश में पेंशनरों और सरकारी कर्मचारियों के लंबित वित्तीय लाभ लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। पेंशन एरियर, डीए और अन्य देयताओं को लेकर कर्मचारी और पेंशनर संगठन समय-समय पर सरकार से भुगतान की मांग करते रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह बयान वित्तीय दायित्वों को लेकर सरकार की मौजूदा स्थिति को सामने रखता है।
मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से यह भी कहा कि उन्हें प्रदेश को मिलने वाली आरडीजी की स्थिति को समझना चाहिए। उनके मुताबिक राज्य की वित्तीय परिस्थितियों को नजरअंदाज करके सभी भुगतान एक साथ करना आसान नहीं है।
पिछली भाजपा सरकार पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल के अंत में, चुनाव से पहले, सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को 50 हजार रुपये का भुगतान किया था।
सुक्खू ने कहा कि मौजूदा सरकार को आरडीजी नहीं मिल रही है, इसके बावजूद पेंशन के एरियर का भुगतान धीरे-धीरे किया जा रहा है। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्मचारियों और पेंशनरों के वित्तीय लाभों को लेकर प्रदेश में लगातार चर्चा चल रही है।
कर्मचारियों को ध्यान में रखकर नहीं रोके जाएंगे फैसले
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी साफ किया कि सरकार कर्मचारियों और अधिकारियों को ध्यान में रखकर आरडीजी से जुड़े निर्णयों को रोकने की नीति नहीं अपनाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के वित्तीय हालात को देखते हुए फैसले ले रही है, लेकिन कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी।
इस बयान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े कई वित्तीय मुद्दे सरकार के सामने हैं। एक ओर राज्य सरकार वित्तीय दबाव और आरडीजी में देरी का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी अपने लंबित वित्तीय लाभों के भुगतान की उम्मीद कर रहे हैं।
पेंशनरों के एरियर को लेकर सरकार पर दबाव
प्रदेश में संशोधित पेंशन एरियर के भुगतान को लेकर भी सरकार की ओर से हाल के दिनों में अलग-अलग घोषणाएं की गई हैं। इससे पेंशनरों में लंबित राशि मिलने की उम्मीद बढ़ी है। सरकार की ओर से उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर भुगतान को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही जा रही है।
मुख्यमंत्री के ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि आरडीजी में देरी के बावजूद सरकार पेंशनरों और कर्मचारियों से जुड़े वित्तीय दायित्वों को पूरी तरह रोकने के पक्ष में नहीं है। हालांकि भुगतान की गति और अलग-अलग वर्गों को मिलने वाले लाभ राज्य की वित्तीय स्थिति पर निर्भर रहेंगे।
आरडीजी हिमाचल की वित्तीय व्यवस्था का अहम हिस्सा
रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट हिमाचल प्रदेश जैसे राजस्व घाटे वाले राज्यों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता है। राज्य के राजस्व और खर्च के बीच अंतर को देखते हुए इस सहायता की भूमिका अहम रहती है। ऐसे में आरडीजी में देरी का सीधा असर राज्य सरकार की वित्तीय योजना और विभिन्न देनदारियों के प्रबंधन पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से इसी वित्तीय परिस्थिति को समझने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि आरडीजी नहीं मिलने के बावजूद सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है और पेंशन एरियर का भुगतान भी धीरे-धीरे किया जा रहा है।
कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर सरकार के अगले फैसलों पर
मुख्यमंत्री के बयान के बाद अब कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर सरकार के आगामी वित्तीय फैसलों पर रहेगी। खासकर लंबित एरियर और अन्य वित्तीय लाभों के भुगतान की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है, यह महत्वपूर्ण होगा।
सरकार की ओर से एक तरफ प्रदेश की वित्तीय स्थिति और आरडीजी में देरी को सामने रखा जा रहा है, तो दूसरी ओर कर्मचारियों और पेंशनरों को यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि उनके हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। ऐसे में आने वाले समय में आरडीजी की स्थिति और राज्य सरकार की वित्तीय प्राथमिकताएं हिमाचल की राजनीति और कर्मचारी वर्ग के बीच अहम मुद्दा बनी रह सकती हैं।



