➤ स्वास्थ्य शिविर के दिन हर विद्यार्थी की 100% उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश
➤ जांच के साथ आईएफए और कृमिनाशक दवाओं का वितरण भी होगा
➤ एनीमिया, कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान पर रहेगा फोकस
शिमला। हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण और पोषण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य जांच शिविर या स्वास्थ्य अभियान के दिन नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक प्रत्येक विद्यार्थी की 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य परीक्षण, आयरन-फोलिक एसिड यानी आईएफए गोलियों और कृमिनाशक दवाओं के वितरण के दौरान कोई भी विद्यार्थी छूटना नहीं चाहिए। इसके लिए स्कूल प्रशासन को विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके अभिभावकों से भी समन्वय स्थापित करना होगा।
शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी जिला उपनिदेशकों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत विद्यार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण को शत-प्रतिशत कवरेज के साथ पूरा करना राज्य और केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य जांच के लिए स्कूलों में पहुंचने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीमों के साथ स्कूल प्रशासन को प्रभावी समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
निदेशालय के अनुसार स्वास्थ्य शिविरों के दौरान विद्यार्थियों की अनुपस्थिति कई बार स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी कवरेज में बाधा बन जाती है। ऐसे में जिन बच्चों की उस दिन स्कूल में उपस्थिति नहीं होती, वे स्वास्थ्य जांच या दवा वितरण जैसी जरूरी सेवाओं से वंचित रह सकते हैं। इस स्थिति को देखते हुए स्कूल प्रमुखों को केवल अधिक से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के बजाय 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इसके लिए स्कूल प्रशासन को पहले से ही अभिभावकों के साथ संपर्क और समन्वय स्थापित करना होगा। स्वास्थ्य जांच शिविर की जानकारी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों तक पहुंचाने के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित दिन कोई विद्यार्थी अनावश्यक रूप से अनुपस्थित न रहे। निदेशालय का उद्देश्य यही है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम जब स्कूल पहुंचे तो सभी विद्यार्थियों को निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
निर्देशों के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान स्कूलों को स्वास्थ्य विभाग की टीमों के साथ लगातार समन्वय बनाकर काम करना होगा। केवल स्वास्थ्य शिविर के आयोजन तक ही प्रक्रिया सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति और कवरेज पर भी नजर रखी जाएगी।
जिलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति, विद्यार्थियों की कवरेज और उन्हें उपलब्ध कराई गई स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी हर महीने शिक्षा निदेशालय को भेजी जाए। इससे यह आकलन किया जा सकेगा कि स्वास्थ्य जांच और दवा वितरण का लाभ कितने विद्यार्थियों तक पहुंचा है और किन क्षेत्रों में कवरेज को और बेहतर करने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एनीमिया और कुपोषण पर विशेष फोकस रखा जाएगा। शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच के माध्यम से कई स्वास्थ्य समस्याओं की समय रहते पहचान की जा सकती है। इनमें एनीमिया, कुपोषण, दृष्टि दोष, दंत रोग और त्वचा संबंधी समस्याओं के साथ अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों और विभागीय कार्यक्रमों के स्तर पर बच्चों को नियमित आयरन-फोलिक एसिड की खुराक उपलब्ध कराने और कृमिनाशक दवाओं के वितरण को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार लाना और पोषण से जुड़ी समस्याओं की समय रहते पहचान तथा रोकथाम करना है।
स्वास्थ्य जांच के दौरान बच्चों की जांच होने से ऐसी समस्याओं का पता लगाया जा सकता है, जिन पर शुरुआती स्तर पर ध्यान देने की जरूरत होती है। यही वजह है कि शिक्षा निदेशालय ने स्वास्थ्य विभाग की टीमों के स्कूलों में पहुंचने के दौरान विद्यार्थियों की पूर्ण उपस्थिति को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
इस व्यवस्था में स्कूल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अभिभावकों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना गया है। यदि सभी विद्यार्थी स्वास्थ्य जांच के निर्धारित दिन स्कूल में मौजूद रहते हैं, तो विभागीय टीमों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण का लक्ष्य पूरा करना आसान होगा। साथ ही विद्यार्थियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक कवरेज भी बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी।
हिमाचल शिक्षा निदेशालय के इन निर्देशों का सीधा उद्देश्य प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाओं की शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित करना है। आने वाले शैक्षणिक सत्र में स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय तथा मासिक रिपोर्टिंग के माध्यम से इस अभियान की प्रगति पर नजर रखी जाएगी।



