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दागी अधिकारियों पर सख्त सुक्खू सरकार, सेवा विस्तार तुरंत रद्द करने के आदेश

संदिग्ध ईमानदारी वाले अधिकारियों का एक्सटेंशन-री-एम्प्लॉयमेंट होगा रद्द
सभी विभागों को आज ही रिपोर्ट सौंपने के निर्देश, मामला ‘मोस्ट अर्जेंट’
विधानसभा में मुद्दा उठते ही सरकार का बड़ा एक्शन


शिमला: हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा में मुद्दा उठने के कुछ ही समय बाद कार्मिक विभाग ने कड़ा आदेश जारी करते हुए उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा के निर्देश दिए हैं, जिन्हें सेवा विस्तार (Extension) या पुनर्रोजगार (Re-employment) दिया गया है।

मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि यदि किसी भी अधिकारी की सत्यनिष्ठा संदिग्ध (Doubtful Integrity) पाई जाती है या उसके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें हैं, तो उसका सेवा विस्तार या पुनर्रोजगार तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस आदेश के तहत सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और मंडलायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में ऐसे अधिकारियों की सूची तैयार करें और इस पर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ आज ही सरकार को सौंपें। आदेश को ‘मोस्ट अर्जेंट’ श्रेणी में रखा गया है, जिससे सरकार की मंशा साफ है कि वह प्रशासन में किसी भी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार को लेकर सख्त रुख अपनाने जा रही है।

गौरतलब है कि विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष ने ODI (Officials with Doubtful Integrity) अधिकारियों और सेवा विस्तार के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। इसके तुरंत बाद सरकार का यह कदम राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही स्तर पर अहम माना जा रहा है।

इस फैसले को प्रदेश में साफ-सुथरी और जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सीधा असर पड़ सकता है।