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सप्लीमेंट्री बजट सुक्‍खू सरकार की आर्थिक नाकामी का प्रमाण: जयराम ठाकुर

सप्लीमेंट्री बजट को जयराम ठाकुर ने बताया आर्थिक नाकामी का प्रमाण
70% अतिरिक्त बजट पर उठाए गंभीर सवाल, वित्तीय अनुशासन पर निशाना
माफिया राज और अवैध कटान को लेकर सरकार पर तीखा हमला



हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बजट सत्र के दौरान सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष Jairam Thakur ने मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu की सरकार पर सप्लीमेंट्री बजट को लेकर करारा हमला बोला है। शिमला में अपने विधानसभा कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यह अनुपूरक बजट सरकार के वित्तीय प्रबंधन, अनुशासन और दूरदर्शिता की पूरी तरह पोल खोलता है और सरकार के दावों की “धज्जियां उड़ा दी हैं।”

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार दोहराए गए शब्द—फिस्कल प्रुडेंस, फिस्कल मैनेजमेंट और फिस्कल डिसिप्लिन—सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गए हैं। जयराम ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद को सबसे ज्यादा पढ़ने वाला वित्त मंत्री बताया था, लेकिन बजट अनुमान पूरी तरह गलत साबित हुए और पूरी योजना “हवा हवाई” निकली। उन्होंने कहा कि बजट का मूल उद्देश्य यथार्थवादी अनुमान लगाना होता है, लेकिन जब कुल बजट का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा सप्लीमेंट्री के रूप में सामने आता है, तो यह साफ संकेत है कि सरकार को अपने ही आंकड़ों पर भरोसा नहीं था।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में खर्च पर कोई नियंत्रण नहीं है और सरकार बिना योजना के धन खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि यह अनुपूरक बजट ही मुख्य बजट बन गया है, जो सरकार की आर्थिक नाकामी का प्रमाण पत्र है। जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष का कैपिटल एक्सपेंडिचर घटकर 3941 करोड़ रह गया, जो कुल बजट का मात्र 3.98 प्रतिशत है। इससे साफ है कि प्रदेश में विकास कार्य ठप हो गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि करीब 98 हजार 975 करोड़ रुपये आखिर खर्च कहां किए गए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस बार सप्लीमेंट्री बजट के दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं करवाए, क्योंकि उसे अपनी नाकामी का एहसास हो चुका है।

वहीं, विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा और तेज कर दिया। भाजपा विधायकों ने सदन के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए अवैध वन कटान और खनन माफिया को लेकर सरकार को घेरा। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार के संरक्षण में माफिया राज फल-फूल रहा है और बेशकीमती वन संपदा की खुलेआम लूट हो रही है।

उन्होंने सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां केवल 25 पेड़ काटने की अनुमति ली गई थी, लेकिन वास्तविकता में 300 से अधिक पेड़ों को काटकर जमींदोज कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में एक प्रभावशाली कांग्रेस नेता की संलिप्तता है। धर्मपुर क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी सैकड़ों पेड़ों का अवैध कटान हुआ और साक्ष्यों को मिटाने के लिए कटे पेड़ों को सतलुज नदी में फेंका गया और कुछ को जमीन में दफना दिया गया।

विपक्ष ने स्पष्ट किया कि निजी भूमि की आड़ में सरकारी और संरक्षित वनों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है और राज्य के राजस्व को भी करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि सरकार माफियाओं पर नकेल कसने में पूरी तरह विफल रही है और विपक्ष इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा।