■ ऑटोमैटिक अप्रूवल प्रणाली पर चली अधिकांश सेवाएं, दफ्तरों के चक्कर खत्म
■ इस वर्ष 1000 करोड़ से अधिक राजस्व, केंद्र से 93 करोड़ प्रोत्साहन राशि
■ 50 वर्ष पुरानी गाड़ियों को विंटेज घोषित कर जारी होगी विशेष नंबर प्लेट
हिमाचल प्रदेश में ट्रांसपोर्ट विभाग ने डिजिटल और पारदर्शी कार्यप्रणाली की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अधिकांश सेवाओं को ऑटोमैटिक अप्रूवल प्रणाली पर ला दिया है। अब लोगों को परमिट, फिटनेस और अन्य सेवाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। विभाग की यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार का उदाहरण बनी है, बल्कि राजस्व वृद्धि में भी ऐतिहासिक साबित हुई है।
डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि इस वित्त वर्ष में विभाग ने रिकॉर्ड एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है। बेहतर प्रदर्शन के चलते केंद्र सरकार ने विभाग को तय मानकों में उत्कृष्ट कार्य के लिए 93 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की है।
उन्होंने बताया कि गुड्स, टूरिस्ट और नेशनल परमिट अब पूरी तरह ऑटोमैटिक प्रणाली से जारी हो रहे हैं, जिसका लाभ अब तक 6543 लोगों को मिल चुका है। विभाग ने डिजिटल फिटनेस प्रणाली भी लागू कर दी है। इसके तहत ATS (Automatic Testing System) के लिए आधुनिक ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त छह स्थानों पर ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनाए जा चुके हैं।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी विभाग सक्रिय है। अब तक 2257 वाहनों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से स्क्रैप किया जा चुका है। 50 वर्ष पुरानी गाड़ियों को विंटेज वाहन घोषित करने का निर्णय लिया गया है। इन वाहनों के लिए विशेष नंबर प्लेट जारी की जाएगी, जिसे VA सीरीज के तहत पंजीकृत किया जाएगा।
राजस्व आंकड़ों पर बोलते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने तीन वर्षों में 2744 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में इसी अवधि में 1564 करोड़ रुपये का राजस्व ही जुटाया गया था।
फैंसी नंबरों की नीलामी से भी विभाग को बड़ी आय हुई है। अब तक 81 करोड़ रुपये की कमाई फैंसी नंबरों से हुई है। एक सीरीज के 44 नंबरों की बिक्री से करीब साढ़े चार करोड़ रुपये प्राप्त हुए। HP 97 0001 नंबर सबसे महंगा रहा, जिसकी नीलामी 20 लाख रुपये में हुई।
डिप्टी सीएम ने बताया कि प्रदेश के टैक्सी ऑपरेटरों को केंद्र सरकार से बड़ी राहत मिली है। वाहनों के परमिट और लाइफ की वैधता अवधि 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी गई है। ट्रक ऑपरेटरों की मांग को भी केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।
इसके अलावा जल परिवहन को लेकर भी पहल की गई है। केंद्रीय मंत्री के साथ चर्चा के बाद 68 करोड़ रुपये का एमओयू साइन किया गया है, जिससे प्रदेश में जल परिवहन के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।



