➤ 13 करोड़ रुपये की जमीन खरीद-फरोख्त मामले में नेक राम गिरफ्तार
➤ विजिलेंस ने धर्मशाला और पालमपुर में पत्नी-माता के नाम संपत्तियां मिलने का दावा किया
➤ जाली दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर की जांच, असली लाभार्थियों की तलाश
हिमाचल प्रदेश में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े एक मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा के करीबी बताए जा रहे नेक राम को गिरफ्तार किया है। मामला करीब 13 करोड़ रुपये की जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा बताया जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 5 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
विजिलेंस धर्मशाला की टीम के अनुसार जांच के दौरान रक्कड़ निवासी नेक राम के अलावा उसकी पत्नी और माता के नाम पर भी धर्मशाला और पालमपुर में संपत्तियां सामने आई हैं। अब जांच एजेंसी इन संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल हुए धन के स्रोत और इनके पीछे मौजूद वास्तविक लाभार्थियों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।
जांच का दायरा केवल जमीन के सौदों तक सीमित नहीं है। विजिलेंस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जमीन से जुड़े कथित लेन-देन में राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका क्या रही और यदि रिकॉर्ड में कोई बदलाव किया गया तो वह किस स्तर पर और किन लोगों के माध्यम से हुआ।
जाली दस्तावेज और हस्ताक्षर के इस्तेमाल का आरोप
विजिलेंस की जांच में आरोप है कि नेक राम ने जाली दस्तावेजों, हस्ताक्षर और मुख्तारनामा के माध्यम से सरकारी या वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया करवाई। जांच एजेंसी के मुताबिक मामले में मूल राजस्व रिकॉर्ड के गायब होने की बात भी सामने आई है।
यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला केवल जमीन की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें दस्तावेजी हेरफेर और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े गंभीर पहलुओं की भी जांच आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल विजिलेंस इन सभी बिंदुओं पर दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को जुटा रही है। आरोपी से पूछताछ के दौरान जमीन के सौदों और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
धर्मशाला और पालमपुर की संपत्तियां जांच के दायरे में
जांच एजेंसी को धर्मशाला और पालमपुर क्षेत्र में आरोपी के साथ-साथ उसकी पत्नी और माता के नाम दर्ज संपत्तियों के बारे में जानकारी मिलने की बात कही गई है। अब इन संपत्तियों की खरीद के समय इस्तेमाल किए गए धन, भुगतान के माध्यम और संबंधित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।
विजिलेंस यह जानना चाहती है कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए धन कहां से आया और क्या जमीन से जुड़े कथित सौदों तथा इन संपत्तियों के बीच कोई वित्तीय संबंध है। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि संपत्तियों के वास्तविक लाभार्थी कौन हैं।
राजस्व अधिकारियों से गठजोड़ की भी जांच
मामले में राजस्व अधिकारियों से संभावित गठजोड़ की जांच भी की जा रही है। विजिलेंस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर किए गए और इन बदलावों में किन लोगों की भूमिका हो सकती है।
जांच एजेंसी के सामने सबसे अहम सवालों में यह भी शामिल है कि यदि मूल राजस्व रिकॉर्ड गायब हुआ है तो वह किस परिस्थिति में गायब हुआ और उससे किसे फायदा हो सकता था। इसी आधार पर संभावित अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
जमीन के बड़े लेन-देन की परतें खोल रही जांच
विजिलेंस के अनुसार अब तक जुटाए गए दस्तावेजों से जमीन से जुड़े बड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी सामने आ रही है। एजेंसी धर्मशाला और पालमपुर क्षेत्र में हुई संपत्तियों की खरीद-फरोख्त के दस्तावेजों का मिलान कर रही है।
पूछताछ में धन के वास्तविक स्रोत, बैंकिंग लेन-देन, संपत्तियों के स्वामित्व और संभावित लाभार्थियों से जुड़े पहलुओं को खंगाला जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ जमीन के सौदों में शामिल अन्य लोगों और कथित प्रभावशाली गठजोड़ की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
फिलहाल नेक राम पुलिस हिरासत में है और विजिलेंस उससे मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा वित्तीय लेन-देन को लेकर पूछताछ कर रही है। 5 सितंबर तक की पुलिस हिरासत के दौरान जांच एजेंसी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी।
मामला जांच के अधीन है। ऐसे में जमीन के सौदों, दस्तावेजों में कथित हेरफेर, राजस्व रिकॉर्ड और संभावित अन्य आरोपियों को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और सक्षम अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।



