➤ महिलाएं अब वोट बैंक नहीं, विकास की निर्णायक शक्ति
➤ शिमला में 60 महिलाओं को नारी शक्ति सम्मान से नवाजा गया
➤ मुकेश अग्निहोत्री बोले- अवसर मिले तो हर चुनौती पार कर सकती हैं बेटियां
शिमला। हिमाचल प्रदेश में महिलाओं की बदलती भूमिका और समाज के विकास में उनके बढ़ते योगदान को रेखांकित करते हुए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि महिलाएं अब केवल वोट बैंक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के विकास की निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं। राजधानी शिमला के ईस्ट बॉर्न होटल खलीनी में सोमवार को आयोजित नारी शक्ति सम्मान समारोह में शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, सामाजिक सेवा, कारोबार, कला, खेल और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 60 महिलाओं को सम्मानित किया गया। अमर उजाला की ओर से आयोजित इस समारोह में सम्मानित महिलाओं की उपलब्धियों और संघर्ष को समाज के लिए प्रेरणा बताते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए अधिक अवसर और मंच उपलब्ध कराना समय की जरूरत है।
अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बना रही हिमाचल की महिलाएं
हिमाचल प्रदेश की महिलाएं अब घर और परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा से लेकर प्रशासन, राजनीति से लेकर कारोबार, सामाजिक सेवा से लेकर कला और खेल तक महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रभाव दिखाया है। प्रदेश की ऐसी ही महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए आयोजित समारोह में 60 महिलाओं को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समारोह में महिलाओं की उपलब्धियों के साथ उनके संघर्ष, समर्पण और समाज के प्रति योगदान को भी रेखांकित किया गया। अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही इन महिलाओं ने न केवल अपने लिए पहचान बनाई है, बल्कि दूसरी बेटियों और महिलाओं के लिए भी आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया है।
महिलाएं सिर्फ वोट बैंक नहीं, विकास की ताकत हैं
समारोह के मुख्यातिथि उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सम्मानित महिलाओं को स्मृति चिह्न प्रदान किए। उन्होंने कहा कि समय तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव की सबसे बड़ी तस्वीर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी में दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। राजनीति से लेकर प्रशासन और शिक्षा से लेकर सामाजिक क्षेत्र तक महिलाएं अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। ऐसे में महिलाओं को केवल चुनावी राजनीति के संदर्भ में देखना उचित नहीं है। वे समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाएं मात्र वोट बैंक नहीं, बल्कि समाज के विकास की निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को उन्होंने सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत बताया।
अवसर मिले तो हर चुनौती पार कर सकती हैं महिलाएं
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल की महिलाओं ने प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश और विदेश में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्होंने अपनी मेहनत और क्षमता से यह साबित किया है कि अगर उन्हें उचित अवसर और मंच दिया जाए तो वे किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के सामने कई तरह की सामाजिक और व्यावहारिक चुनौतियां होती हैं, लेकिन शिक्षा और अवसरों के विस्तार ने उनकी स्थिति को तेजी से बदला है। आज बेटियां पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें प्रतिभा दिखाने के लिए वास्तविक अवसर और मंच भी उपलब्ध कराने होंगे। जब किसी बेटी को अपनी क्षमता साबित करने का मौका मिलता है तो उसका फायदा सिर्फ उस बेटी तक सीमित नहीं रहता।
बेटी आगे बढ़ती है तो पूरा परिवार बदलता है
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जब बेटियों और महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। एक महिला की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सफलता से परिवार की सोच बदलती है और इसका असर व्यापक रूप से समाज पर भी दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को मिले अवसर केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बनते, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन की नींव तैयार करते हैं। यही वजह है कि महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी बढ़ाना पूरे समाज के हित में है।
25 साल के राजनीतिक सफर में देखा महिलाओं का बदलाव
अपने करीब 25 वर्ष के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जब वह पहली बार विधायक बने थे, उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति आज जैसी नहीं थी। उस दौर में शिक्षा की पहुंच भी सीमित थी और बेटियों के लिए अवसरों का दायरा आज की तुलना में काफी छोटा था।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में प्रदेश में स्कूलों और कॉलेजों का विस्तार हुआ। शिक्षा की पहुंच गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक बढ़ी तो इसका सीधा असर महिलाओं और बेटियों की सोच तथा उनके अवसरों पर पड़ा।
आज ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी शिक्षा हासिल कर रही हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ने बेटियों और महिलाओं के सपनों को नई दिशा दी है और उन्हें अपनी प्रतिभा को पहचानने तथा उसे दुनिया के सामने रखने का अवसर दिया है।
शिक्षा के विस्तार ने बदली तस्वीर
हिमाचल में शिक्षा के विस्तार को महिलाओं की बदलती स्थिति से जोड़ते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की पहुंच बढ़ने से बेटियों को आगे बढ़ने का आधार मिला है। स्कूल और कॉलेजों के विस्तार के साथ महिलाओं के सामने करियर और सार्वजनिक जीवन के नए रास्ते खुले हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह बदलाव विशेष रूप से दिखाई दे रहा है। जहां पहले महिलाओं की भूमिका मुख्य रूप से घर और परिवार तक सीमित मानी जाती थी, वहीं अब वे प्रशासन, राजनीति, शिक्षा, कारोबार, सामाजिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
यह बदलाव केवल महिलाओं के जीवन में परिवर्तन नहीं ला रहा, बल्कि परिवारों और समाज की सोच को भी प्रभावित कर रहा है। बेटियों की शिक्षा और सफलता से आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बेहतर अवसर तैयार हो रहे हैं।
सम्मान समारोह ने दिया नई पीढ़ी को संदेश
नारी शक्ति सम्मान समारोह में 60 महिलाओं को सम्मानित किया जाना उन महिलाओं के योगदान को सार्वजनिक रूप से पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है। ऐसे सम्मान समारोह समाज में यह संदेश भी देते हैं कि महिलाओं की उपलब्धियों को पहचान और सम्मान मिलना जरूरी है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को लेकर उपमुख्यमंत्री का संदेश भी इसी दिशा में रहा कि अब महिलाओं को केवल लाभार्थी या राजनीतिक समीकरण का हिस्सा मानने के बजाय उन्हें निर्णय लेने और विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए।
शिमला में आयोजित यह समारोह उन बदलती सामाजिक परिस्थितियों की तस्वीर भी पेश करता है, जहां हिमाचल की महिलाएं अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर लगातार नए मुकाम हासिल कर रही हैं। शिक्षा के विस्तार से लेकर सार्वजनिक जीवन में बढ़ती भागीदारी तक, यह बदलाव आने वाले समय में प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई दिशा दे सकता है।



