➤ याचिकाकर्ता व प्रतिवादी पक्ष ने कोर्ट को दिए अपने-अपने इशू
➤ अगली सुनवाई पांच-छह हफ्ते बाद, कोर्ट करेगा मुद्दों का चयन
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सांसद कंगना रनौत की मंडी लोकसभा सीट पर हुए चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर आज अहम सुनवाई हुई। अदालत में याचिकाकर्ता और प्रतिवादी दोनों पक्षों ने अपने-अपने इशू (Issues) अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। अब हाईकोर्ट इन इशू में से चुनिंदा मुद्दों का चयन करेगा, जिन पर आगे दोनों पक्ष अपनी दलीलें पेश करेंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई पांच से छह हफ्ते बाद तय की है।
यह याचिका किन्नौर निवासी लायक राम नेगी द्वारा दायर की गई है। उनके एडवोकेट ने बताया कि लायक राम नेगी का नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि नामांकन के साथ उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे। इसके बावजूद रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने अगले दिन दिए गए नो-ड्यूज सर्टिफिकेट स्वीकार नहीं किए और इसे बड़ी त्रुटि मानते हुए उनका नामांकन खारिज कर दिया।
लायक राम नेगी का तर्क है कि उन्होंने 14 मई को नामांकन दाखिल करते समय वन विभाग का नो-ड्यूज लगाया था, और अन्य विभागों—जैसे बिजली, पानी और टेलीफोन—के नो-ड्यूज जमा करने के लिए एक दिन का समय मांगा था, जो RO द्वारा दिया भी गया। लेकिन 15 मई को जब उन्होंने सभी दस्तावेज जमा किए, तो RO ने इन्हें लेने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह त्रुटि दूर की जा सकने वाली थी, लेकिन उन्हें जानबूझकर अवसर नहीं दिया गया।
इसके बाद उनका नामांकन रद्द कर दिया गया, जिसे उन्होंने मनमाना और गलत बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने मांग की है कि मंडी लोकसभा चुनाव 2024 को रद्द कर दोबारा चुनाव करवाया जाए। उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर और डीसी मंडी को भी प्रतिवादी बनाया है और आरोप लगाया है कि उनकी आपत्तियों को असंगत आधार पर स्वीकार किया गया।
मंडी लोकसभा चुनाव के दौरान कई मुद्दे सुर्खियों में रहे। चुनाव प्रचार में कंगना रनौत को बाहरी उम्मीदवार बताया गया, तो वहीं कांग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह के साथ उनकी मुकाबला प्रदेश का सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला रहा। इस दौरान स्थानीय मुद्दे—सड़क, जल संकट, पर्यटन और रोजगार—पीछे छूटते दिखे और चर्चाएं अधिकतर सेलेब्रिटी फैक्टर और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर केंद्रित रहीं। लायक राम नेगी का नामांकन रद्द होना भी बड़ा विवाद बना, जो अब हाईकोर्ट में चुनौती का आधार है।



