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पौंग विस्थापित की जमीन पर फर्जीवाड़े का आरोप, जवाली में दो नामजद के खिलाफ एफआईआर

राजस्थान में आवंटित पौंग विस्थापित की जमीन बेचने का कथित प्रयास
फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, गलत आधार नंबर और दूसरे व्यक्ति की फोटो का आरोप
जवाली पुलिस ने दो नामजद समेत अन्य अज्ञात लोगों पर दर्ज किया मामला


ज्वाली/रैहन (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के जवाली क्षेत्र में पौंग बांध विस्थापित को राजस्थान में आवंटित जमीन को कथित तौर पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए बेचने का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दो नामजद आरोपियों समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस को दी शिकायत में जगदीश चंद ने बताया कि उन्हें राजस्थान के रामगढ़ क्षेत्र में सरकार की ओर से एक मुरब्बा भूमि आवंटित की गई थी। उन्होंने यह जमीन खेती के लिए एक व्यक्ति को काश्त पर दी हुई है।

शिकायत के अनुसार 27 जुलाई की रात काश्तकार का फोन आया और उसने पूछा कि क्या जमीन बेचने के लिए किसी को पावर ऑफ अटॉर्नी दी गई है। शिकायतकर्ता ने इससे इनकार किया। इसके बाद काश्तकार ने व्हाट्सएप पर कथित पावर ऑफ अटॉर्नी की प्रतियां भेजीं।

दस्तावेज देखने पर शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके नाम से फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई है। उनका कहना है कि वे हमेशा अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते हैं, जबकि दस्तावेज में अंगूठे का निशान लगाया गया है। इतना ही नहीं, दस्तावेज में दर्ज आधार नंबर भी गलत है और सत्यापन के दौरान शिकायतकर्ता की जगह किसी अन्य व्यक्ति की फोटो लगाई गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जवाली पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत दो नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

एएसपी नूरपुर धर्म चंद वर्मा ने बताया कि पुलिस सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।