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निष्कासित नेता को BJP की बड़ी जिम्मेदारी: हिमाचल भाजपा में कुलदीप राणा की नियुक्ति से बढ़ा सियासी पारा

निष्कासित बताए गए कुलदीप राणा को BJP ने बनाया स्पोर्ट्स सेल का कॉर्डिनेटर
शिलाई में नियुक्ति से संगठन के भीतर उठे सवाल, बलदेव तोमर ने जताई नाराजगी
प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल बोले- जब निष्कासन ही नहीं हुआ तो बहाली का सवाल नहीं


हिमाचल प्रदेश भाजपा में विभिन्न प्रकोष्ठों के संयोजकों और सह-संयोजकों की हालिया नियुक्तियों के बीच शिलाई विधानसभा से जुड़े नेता कुलदीप सिंह राणा की तैनाती सबसे ज्यादा चर्चा में है। पार्टी ने उन्हें स्पोर्ट्स सेल शिलाई विधानसभा का कॉर्डिनेटर नियुक्त किया है। इस फैसले के बाद संगठन के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठने लगे हैं।

विवाद इसलिए गहराया है क्योंकि 30 जून 2023 को शिलाई भाजपा मंडल और सिरमौर जिला इकाई की ओर से कुलदीप राणा को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह वर्ष के लिए निष्कासित किए जाने की बात सामने आई थी। अब बिना किसी सार्वजनिक बहाली आदेश के उन्हें संगठन में अहम जिम्मेदारी दिए जाने से पार्टी के भीतर असहज स्थिति बन गई है।

जयराम ठाकुर खेमे के लिए झटका माना जा रहा फैसला

राजनीतिक हलकों में इस नियुक्ति को पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के करीबी और शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव तोमर के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। चर्चा है कि भविष्य में कुलदीप राणा शिलाई विधानसभा से भाजपा टिकट के प्रमुख दावेदार बन सकते हैं। इसी वजह से संगठन के एक वर्ग में इस फैसले को लेकर नाराजगी और हलचल देखी जा रही है।

2022 चुनाव से जुड़ा है विवाद

कुलदीप राणा का नाम 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान भी विवादों में रहा था। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने भाजपा प्रत्याशी बलदेव तोमर के खिलाफ काम किया और कांग्रेस उम्मीदवार हर्षवर्धन चौहान का समर्थन किया। चुनाव परिणाम आने के बाद शिलाई में भाजपा कार्यकर्ताओं और बलदेव तोमर समर्थकों ने उनके खिलाफ नारेबाजी भी की थी। इसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित किए जाने की कार्रवाई की गई थी।

अब उसी नेता को पार्टी के खेल प्रकोष्ठ का संयोजक बनाए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि यदि निष्कासन प्रभावी था तो बिना औपचारिक बहाली के संगठनात्मक जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई।

स्थानीय नेतृत्व ने भी जताई नाराजगी

शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने कहा कि इस नियुक्ति से पहले उनसे कोई राय नहीं ली गई। उन्होंने स्वीकार किया कि कुलदीप राणा को छह वर्ष के लिए निष्कासित किया गया था और इस विषय को वह पार्टी के उचित मंच पर उठाएंगे।

वहीं शिलाई भाजपा मंडल अध्यक्ष इंद्र ठाकुर ने भी कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार कुलदीप राणा की पार्टी में वापसी नहीं हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस नियुक्ति से पहले मंडल स्तर पर कोई चर्चा नहीं की गई।

राजीव बिंदल का बयान

पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि वह इस विषय पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि “जब कुलदीप राणा का निष्कासन ही नहीं हुआ, तो बहाली का सवाल ही नहीं उठता।” उनके इस बयान के बाद संगठन के भीतर इस मामले को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।