➤ ख्योड़ नलवाड़ मेले में बोले डिप्टी सीएम, मंदिरों और मेलों में दलगत राजनीति नहीं होनी चाहिए
➤ मुकेश अग्निहोत्री ने कहा- उन्हें मेले में आने से रोकने का प्रयास किया गया, स्थानीय विधायक की मौजूदगी पर भी रखी बात
➤ गोहर में पानी के कामों के लिए 1 करोड़, पंचायत को 10 लाख; बस सेवा और बस अड्डे को लेकर भी घोषणाएं
➤ विस्तृत खबर
मंडी के गोहर क्षेत्र में ख्योड़ नलवाड़ मेले के समापन समारोह में हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मंदिरों और मेलों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि मेले केवल किसी एक दल या व्यक्ति के आयोजन नहीं होते, बल्कि समाज, संस्कृति, भाईचारे और परंपराओं से जुड़े होते हैं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने दावा किया कि उन्हें इस मेले में आने से रोकने का प्रयास किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजनों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए। यह बयान 24 सितंबर 2026 को ख्योड़ नलवाड़ मेले के समापन समारोह में उनके संबोधन के दौरान सामने आया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिरों और मेलों में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, समय के साथ किसी मेले के संचालन की जिम्मेदारी अलग-अलग राजनीतिक दलों या लोगों के पास जा सकती है, लेकिन इससे मेले की सामाजिक और सांस्कृतिक गरिमा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों का महत्व किसी राजनीतिक दल से बड़ा है और सभी पक्षों को उनकी परंपरा तथा सामाजिक भूमिका का ध्यान रखना चाहिए।
विधायक विनोद कुमार की मौजूदगी को लेकर भी बोले अग्निहोत्री
मुकेश अग्निहोत्री ने मंच से स्थानीय विधायक विनोद कुमार की मौजूदगी को लेकर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि मेले में राजनीति नहीं होनी चाहिए और स्थानीय विधायक को इस आयोजन में मौजूद रहना चाहिए था। यह टिप्पणी उन्होंने मेले में अपनी उपस्थिति और आयोजन से जुड़े राजनीतिक संदर्भ के बीच की। उपलब्ध रिपोर्ट में उनके इस बयान को उनके संबोधन के हिस्से के रूप में दर्ज किया गया है।
ख्योड़ नलवाड़ मेला नाचन क्षेत्र की पुरानी ग्रामीण और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा आयोजन है। इस वर्ष भी मेले का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ था। मेले के दौरान बैल पूजन और खूंटी गाड़ने की रस्म भी निभाई गई। ऐतिहासिक रूप से यह मेला बैलों की खरीद-फरोख्त से जुड़ा रहा है, लेकिन कृषि व्यवस्था में बदलाव और आधुनिक कृषि उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ समय के साथ इसका स्वरूप भी बदला है। अब यह आयोजन सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों के मंच के रूप में भी देखा जाता है।
गोहर में बस अड्डे के लिए जमीन निगम के नाम करने की बात
समारोह के दौरान गोहर में बस अड्डे की मांग भी उठी। इस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बस अड्डे के लिए जमीन हिमाचल पथ परिवहन निगम के नाम की जाए, इसके बाद बस अड्डे का निर्माण करवाया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र के लोगों को गोहर से एम्स बिलासपुर और पीजीआई चंडीगढ़ के लिए बस सेवा शुरू करने की बात भी कही।
बस अड्डे को लेकर इसी दिन सामने आई एक अलग रिपोर्ट में नाचन विधायक विनोद कुमार ने सरकार से पहले से किए गए बजट प्रावधान और काम की स्थिति का ब्योरा मांगा। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के लिखित जवाब में चैलचौक बस अड्डे के लिए 1.45 करोड़ रुपये और गोहर बस अड्डे के लिए 1.34 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया था। विधायक ने इन प्रावधानों के बावजूद काम की स्थिति को लेकर सवाल उठाए। यह प्रतिक्रिया मेले में हुई घोषणाओं के बाद सामने आई।
पेयजल योजनाओं के लिए 1 करोड़ रुपये की घोषणा
उपमुख्यमंत्री ने नाचन विधानसभा क्षेत्र में पेयजल से जुड़े कार्यों के लिए जल शक्ति विभाग को एक करोड़ रुपये उपलब्ध करवाने की घोषणा भी की। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस राशि से पाइप और नल लगाने, पानी के टैंक बनाने तथा फिल्टर बेड जैसे कार्य किए जाने हैं। बड़ी संख्या में प्राप्त पानी के कनेक्शन और अन्य कार्यों से संबंधित प्रार्थना पत्रों के निपटारे के लिए यह राशि उपलब्ध कराने की बात कही गई।
इसके अलावा ग्राम पंचायत को विभिन्न विकास कार्यों के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा की गई। बासा पंचायत के लिए 10 लाख रुपये की घोषणा की पुष्टि मेले के समापन समारोह से संबंधित रिपोर्ट में भी की गई है।
कॉलेजों और क्लस्टर विश्वविद्यालय को लेकर भी आश्वासन
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय स्तर पर शिक्षा से जुड़ी मांगों का भी उल्लेख हुआ। मुकेश अग्निहोत्री ने बासा कॉलेज में रिक्त पदों को भरने के लिए आवश्यक प्रयास करने की बात कही। वहीं, गोहर कॉलेज में प्रवक्ताओं के रिक्त पद भरने और क्लस्टर विश्वविद्यालय में बड़ी कक्षाएं शुरू करवाने को लेकर भी आश्वासन दिया। विश्वविद्यालय में कक्षाएं शुरू करवाने के संबंध में कुलपति से बातचीत करने की बात भी सामने आई है।
मेले को सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखने की बात
समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री ने ख्योड़ नलवाड़ मेले को हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के संरक्षण की जिम्मेदारी सभी की है। मेले में पारंपरिक जलेब के साथ समापन समारोह आयोजित हुआ और स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियां भी हुईं। मेले की शुरुआत में देवी-देवताओं का मिलन, बैल पूजन और खूंटी गाड़ने जैसी परंपराएं निभाई गई थीं।
समापन कार्यक्रम में राज्य जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, अनुसूचित विकास निगम के चेयरमैन लाल सिंह कौशल, प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित विभाग के अध्यक्ष नरेश चौहान और जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंपा ठाकुर सहित कई स्थानीय पदाधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
ख्योड़ नलवाड़ मेले के समापन के दौरान एक ओर जहां मंदिरों और मेलों को राजनीति से अलग रखने का संदेश चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र की पेयजल, परिवहन और शिक्षा से जुड़ी मांगों पर घोषणाएं और आश्वासन भी दिए गए। मेले को लेकर उपमुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक के बीच सामने आए अलग-अलग बयानों से आयोजन का राजनीतिक संदर्भ भी चर्चा में आया है। हालांकि, मेले और मंदिरों की भूमिका को लेकर अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में इन्हें मुख्य रूप से सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में रखने की बात कही।



