➤ चेन्नई में राहुल गांधी का छात्रों से संवाद, बोले- लोकतंत्र खत्म करने वालों से डरने की जरूरत नहीं
➤ वोट चोरी, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, तमिल भाषा और संस्कृति का मुद्दा भी उठाया
➤ दक्षिण भारत के 5 राज्यों के 7.5 करोड़ युवाओं पर फोकस, छात्रों के बीच शिक्षा और रोजगार पर चर्चा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्र, चुनाव प्रक्रिया, शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और तमिल भाषा एवं संस्कृति से जुड़े मुद्दे उठाए। आइलैंड ग्राउंड्स में आयोजित इस कार्यक्रम में राहुल ने छात्रों से सवाल पूछने, अपनी जिज्ञासा बनाए रखने और बिना समझे किसी विचार का अनुसरण नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को खत्म करने वालों से डरने की जरूरत नहीं है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी को लेकर भी कई आरोप लगाए।
राहुल गांधी का यह कार्यक्रम युवाओं और छात्रों के साथ संवाद की उस श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके तहत वह इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज, पुणे और इंदौर में भी युवाओं से बातचीत कर चुके हैं। इस श्रृंखला का आयोजन पहली बार दक्षिण भारत में किया गया। कांग्रेस की ओर से कार्यक्रम का निर्धारित समय शाम 4:30 बजे बताया गया था, जबकि कार्यक्रम शाम करीब सात बजे शुरू हुआ।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि छात्रों को सवाल पूछने से पीछे नहीं हटना चाहिए। उनके अनुसार, सवाल करना हर विद्यार्थी की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु पर हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है और तमिल भाषा, संस्कृति तथा इतिहास को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की भाषा और सांस्कृतिक विरासत को उचित महत्व मिलना चाहिए।
वोट चोरी और लोकतंत्र को लेकर सरकार पर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में वोट चोरी और चुनाव में गड़बड़ी हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव और आर्थिक ताकतों के प्रभाव में काम कर रहे हैं। राहुल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं और देश के लोग मौजूदा परिस्थितियों को समझने लगे हैं।
अपने भाषण में राहुल ने कहा कि देश के लोगों को लोकतंत्र को कमजोर करने वाली ताकतों से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को सवाल पूछने और अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटना चाहिए। प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को लेकर लगाए गए ये आरोप राहुल गांधी के राजनीतिक वक्तव्य का हिस्सा हैं।
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, इंटरनेट सेवाएं बंद हैं और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोग छात्रों के साथ मारपीट कर रहे हैं। उन्होंने इन घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह समझना चाहिए कि पिछले 15 वर्षों से चली आ रही राजनीतिक परिस्थितियां अब बदल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जिज्ञासा और सवाल पूछने की प्रवृत्ति को कमजोर कर रही है। हालांकि, दिल्ली में प्रदर्शन, इंटरनेट सेवाओं और पुलिस कार्रवाई से संबंधित उनके बयानों को उनके आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पेरियार का उदाहरण देकर छात्रों को दी नसीहत
राहुल गांधी ने तमिलनाडु के प्रमुख सामाजिक सुधारक ईवी रामासामी पेरियार का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इसलिए महान थे, क्योंकि वह सवाल पूछते थे। राहुल के अनुसार, पेरियार ने लोगों और विद्यार्थियों को बिना समझे किसी विचार का अनुसरण करने के बजाय उसके बारे में सोचने और सवाल करने की सीख दी।
उन्होंने छात्रों से कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों में जिज्ञासा, तर्क करने की क्षमता और स्वतंत्र रूप से सोचने की आदत विकसित होना भी जरूरी है। उनके संबोधन में शिक्षा और लोकतंत्र के बीच संबंध का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।
शिक्षा व्यवस्था और मेडिकल सीटों को लेकर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था के केंद्रीकरण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु में एमबीबीएस की 87 प्रतिशत सीटें कम की जा रही हैं और करीब 70 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के पद खाली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों के संचालन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों और राज्यपालों की भूमिका बढ़ रही है।
राहुल गांधी ने इन मुद्दों के जरिए शिक्षा व्यवस्था में राज्यों की भूमिका, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और मेडिकल शिक्षा से जुड़े अवसरों पर सवाल उठाए। हालांकि, एमबीबीएस सीटों में कमी और विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के रिक्त पदों से संबंधित आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी आंकड़ों और आधिकारिक रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है।
दक्षिण भारत के 7.5 करोड़ युवाओं पर फोकस
‘यूथ इन इंडिया 2022’ रिपोर्ट के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, दक्षिण भारत के पांच राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना में 15 से 29 वर्ष की आयु के करीब 7.5 करोड़ युवा हैं। राहुल गांधी के इस संवाद अभियान में युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस अभियान के तहत शिक्षा, बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और युवाओं पर बढ़ते मानसिक एवं सामाजिक दबाव जैसे विषय उठाए जा रहे हैं। इन मुद्दों का सीधा संबंध युवाओं के भविष्य, रोजगार के अवसरों और शिक्षा व्यवस्था से है। चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस ने दक्षिण भारत के युवाओं के साथ संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश की।
पिछले कार्यक्रमों में भी शामिल हुए थे बड़ी संख्या में लोग
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गांधी के इससे पहले आयोजित पांच कार्यक्रमों में करीब 1.54 लाख लोग शामिल हुए थे। चेन्नई का कार्यक्रम इस श्रृंखला का दक्षिण भारत में पहला आयोजन रहा। कार्यक्रम के दौरान छात्रों के साथ राहुल गांधी की तस्वीरें भी सामने आईं, जिन्हें कांग्रेस की ओर से साझा किया गया।
चेन्नई में आयोजित इस संवाद के दौरान राहुल गांधी ने लोकतंत्र, चुनाव प्रक्रिया, शिक्षा, रोजगार और क्षेत्रीय भाषा एवं संस्कृति जैसे विषयों को प्रमुखता दी। उनके संबोधन में केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना के साथ युवाओं को सवाल पूछने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी शामिल रहा।



