➤ पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने
➤ गोविंद देव गिरि को महासचिव और महेश भागचंदका कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी
➤ तीन नए ट्रस्टी शामिल, निर्मला यादव बनीं ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य
अयोध्या। राम मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव किया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त करने का फैसला किया है। इसके साथ ही ट्रस्ट के लंबे समय से कोषाध्यक्ष रहे गोविंद देव गिरि को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ट्रस्ट की नई व्यवस्था में महेश भागचंदका कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं। इसके अलावा ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी।
राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। ऐसे में ट्रस्ट के स्तर पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों को अलग-अलग स्तर पर व्यवस्थित करने के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
39 साल वायुसेना में सेवा, अब राम मंदिर की प्रशासनिक जिम्मेदारी
पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में करीब 39 साल तक सेवा दी है। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। लंबे सैन्य करियर के बाद वह इसी साल 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हुए।
वायुसेना में अपने कार्यकाल के दौरान जीतेंद्र मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उनका अनुभव बड़े संगठनों के संचालन, कमांड, सुरक्षा व्यवस्था, आपात परिस्थितियों में निर्णय लेने और विभिन्न स्तरों पर समन्वय से जुड़ा रहा है।
राम मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, कर्मचारियों का संचालन, प्रशासनिक समन्वय और विभिन्न व्यवस्थाओं की निगरानी लगातार बड़ी जिम्मेदारी बनती जा रही है। ऐसे में सैन्य पृष्ठभूमि वाले अधिकारी को CEO की जिम्मेदारी दिए जाने को ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में वेस्टर्न एयर कमांड का नेतृत्व
जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि वह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल यानी SYSM से भी सम्मानित किया गया।
वायुसेना में करीब चार दशक का अनुभव रखने वाले जीतेंद्र मिश्रा ने कई अहम कमांड संभाली हैं। उनके सैन्य अनुभव में रणनीतिक नेतृत्व, सुरक्षा, संसाधनों का प्रबंधन और बड़े स्तर पर ऑपरेशनल गतिविधियों का संचालन शामिल रहा है।
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO का पद पहली बार बनाया गया है। ऐसे में इस पद पर सैन्य क्षेत्र के अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति को मंदिर की बढ़ती प्रशासनिक और ऑपरेशनल जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश से भी है कनेक्शन
जीतेंद्र मिश्रा का संबंध देवरिया, उत्तर प्रदेश से बताया गया है। राम मंदिर अयोध्या में होने के कारण उनका उत्तर प्रदेश से जुड़ाव भी उनकी नियुक्ति के संदर्भ में चर्चा का विषय बना है।
हालांकि उनकी नियुक्ति का सबसे प्रमुख पहलू उनका लंबा सैन्य और प्रशासनिक अनुभव है। मंदिर की व्यवस्थाओं का विस्तार होने के साथ ट्रस्ट के सामने अब धार्मिक गतिविधियों के अलावा सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, प्रशासन और संचालन जैसी कई बड़ी जिम्मेदारियां हैं।
गोविंद देव गिरि को मिली महासचिव की अहम जिम्मेदारी
ट्रस्ट के अब तक कोषाध्यक्ष रहे गोविंद देव गिरि को अब महासचिव बनाया गया है। ट्रस्ट के गठन के समय से ही वह इसकी वित्तीय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर रहे हैं।
5 फरवरी 2020 को ट्रस्ट के गठन के बाद से गोविंद देव गिरि ने कोषाध्यक्ष के तौर पर राम मंदिर से जुड़ी वित्तीय जिम्मेदारियां संभालीं। अब महासचिव बनने के बाद ट्रस्ट के कामकाज में उनकी भूमिका और व्यापक हो जाएगी।
नई व्यवस्था में जीतेंद्र मिश्रा और महेश भागचंदका की जिम्मेदारियां भी महासचिव गोविंद देव गिरि के साथ समन्वय वाली संरचना में होंगी। इससे ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश दिखाई देती है।
प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान भी निभाई थी अहम भूमिका
गोविंद देव गिरि रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका में रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 11 दिन का अनुष्ठान कराया था। इसके बाद पंचामृत पिलाकर अनुष्ठान पूरा कराया गया था।
राम मंदिर से जुड़े धार्मिक और प्रशासनिक मामलों में लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण गोविंद देव गिरि को ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और मंदिर से जुड़े विषयों का पुराना अनुभव है।
चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर भी रहे सक्रिय
मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठे थे। इस दौरान गोविंद देव गिरि ने ट्रस्ट का पक्ष रखा और चढ़ावे की गिनती तथा निगरानी की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए गए।
चढ़ावे की गिनती के दौरान कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली वर्दी और CCTV निगरानी जैसे नियम लागू किए गए। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य चढ़ावे से जुड़े कामकाज में निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाना था।
छह भाषाओं के जानकार, धार्मिक संस्थाओं से भी जुड़ाव
गोविंद देव गिरि को रिपोर्ट के अनुसार छह भाषाओं का ज्ञान है। वह मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के उपाध्यक्ष भी हैं।
इसके अलावा 29 राज्यों में 37 वेद विद्यालय चलाए जाने की जानकारी भी दी गई है। धार्मिक शिक्षा, संस्थागत संचालन और ट्रस्ट से जुड़े लंबे अनुभव के कारण महासचिव के रूप में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
महेश भागचंदका बने कोषाध्यक्ष
ट्रस्ट में नए सदस्य के तौर पर शामिल किए गए महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वह दिल्ली से जुड़े हैं।
महासचिव की जिम्मेदारी संभालने वाले गोविंद देव गिरि के स्थान पर अब भागचंदका को वित्तीय कामकाज से जुड़ी जिम्मेदारी मिली है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे और ट्रस्ट की बढ़ती वित्तीय गतिविधियों को देखते हुए कोषाध्यक्ष का पद भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव को भी जगह
ट्रस्ट में दो अन्य नए सदस्यों के रूप में अयोध्या के अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव को शामिल किया गया है।
निर्मला यादव की नियुक्ति विशेष रूप से चर्चा में है, क्योंकि वह राम मंदिर ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी। इससे ट्रस्ट की संरचना में पहली बार महिला प्रतिनिधित्व भी शामिल हुआ है।
निर्मला यादव को RSS समर्थक पृष्ठभूमि से जुड़ा बताया गया है, जबकि मदन मोहन पांडेय अयोध्या से जुड़े अधिवक्ता हैं।
चढ़ावा चोरी मामले के तीन महीने बाद बड़ा बदलाव
राम मंदिर ट्रस्ट में यह बदलाव मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले के सामने आने के करीब तीन महीने बाद हुआ है। इस मामले में आठ आरोपी जेल में हैं।
मामले के बाद ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था और निगरानी को लेकर चर्चा तेज हुई थी। इसके बाद 2 जुलाई को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था।
चंपत राय के इस्तीफे के बाद रिटायर्ड IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। वह करीब 58 दिनों तक इस पद पर रहे।
अब गोविंद देव गिरि को महासचिव बनाए जाने के साथ ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में स्थायी बदलाव किया गया है। वहीं पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को पहला CEO बनाए जाने से ट्रस्ट के कामकाज में एक नया प्रशासनिक पद भी जुड़ गया है।
मंदिर के बढ़ते विस्तार के बीच नई टीम पर नजर
राम मंदिर के निर्माण और मंदिर में दर्शन व्यवस्था शुरू होने के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बढ़ी है। इसके साथ मंदिर परिसर और उससे जुड़े संस्थागत कामकाज का दायरा भी पहले की तुलना में काफी विस्तृत हुआ है।
ऐसे समय में ट्रस्ट के सामने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता, प्रशासनिक निगरानी और रोजमर्रा के संचालन को व्यवस्थित रखने की चुनौती है।
नई व्यवस्था में एक तरफ पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को CEO के रूप में प्रशासनिक और ऑपरेशनल जिम्मेदारी दी गई है, तो दूसरी तरफ लंबे समय से ट्रस्ट के साथ जुड़े गोविंद देव गिरि को महासचिव बनाकर उनकी भूमिका बढ़ाई गई है।
इसके साथ तीन नए सदस्यों की एंट्री और निर्मला यादव को पहली महिला ट्रस्टी बनाए जाने से ट्रस्ट की संरचना में भी बदलाव आया है।
अब देखने वाली बात होगी कि नई प्रशासनिक व्यवस्था राम मंदिर के बढ़ते कामकाज, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्थाओं को किस तरह आगे ले जाती है।



