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श्रीखंड महादेव यात्रा शुरू, 32 किमी की कठिन चढ़ाई आज से

दुनिया की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में श्रीखंड महादेव यात्रा शुरू हुई
बर्फीले ग्लेशियर और ऑक्सीजन की कमी से चुनौतीपूर्ण 32 किमी ट्रैक
प्रशासन ने लगाए 5 बेस कैंप, रोजाना 800 श्रद्धालु होंगे रवाना



shrikhand yatra 2025: श्रीखंड महादेव यात्रा 2025 का पहला जत्था आज सुबह 5 बजे रवाना हो गया है, जो 12 जुलाई को श्रीखंड महादेव की चोटी पर पहुंचेगा। यह यात्रा दुनिया की सबसे कठिन धार्मिक ट्रैकिंग यात्राओं में से एक मानी जाती है। 12 जुलाई से 23 जुलाई तक, प्रतिदिन 800 श्रद्धालुओं के जत्थे को 32 किलोमीटर के खतरनाक और संकरे रास्ते से भेजा जाएगा।

प्रशासन द्वारा पांच बेस कैंप – सिंहगड़, थाचरू, कुनशा, भीम द्वार और पार्वती बाग में श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और स्वास्थ्य जांच की समुचित व्यवस्था की गई है। हर श्रद्धालु को यात्रा से पहले फिटनेस टेस्ट पास करना और पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए 250 रुपये शुल्क निर्धारित है। अभी तक 5,000 से ज्यादा ऑनलाइन पंजीकरण हो चुके हैं।

श्रीखंड महादेव की चोटी समुद्र तल से 18,570 फीट की ऊंचाई पर है। यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं को चार बर्फीले ग्लेशियर, पथरीली चट्टानें और ऑक्सीजन की कमी वाले क्षेत्र पार करने होते हैं, विशेषकर पार्वती बाग के आगे। इस कारण कई श्रद्धालु दर्शन से पहले ही लौट जाते हैं। मेडिकल टीम, ऑक्सीजन सिलेंडर, रेस्क्यू स्टाफ और पुलिस अधिकारी हर पड़ाव पर तैनात किए गए हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीखंड की चोटी पर भगवान शिव का वास है। यहां 72 फीट ऊंचा शिवलिंग शिला रूप में स्थापित है, जिसकी परिक्रमा और पूजा करने से श्रद्धालु को मनवांछित फल प्राप्त होता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, भस्मासुर नामक असुर ने भगवान शिव को प्रसन्न कर वरदान लिया कि वह जिसके सिर पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा। इसके बाद भस्मासुर ने भगवान शिव को ही भस्म करने का प्रयास किया और शिवजी श्रीखंड की ओर भागे। अंततः भगवान विष्णु ने सुंदरी का रूप धारण कर भस्मासुर को नृत्य में मोहित किया और उसे अपने ही सिर पर हाथ रखने को प्रेरित कर नष्ट कर दिया।

श्रीखंड यात्रा का रूट शिमला जिले के रामपुर से निरमंड, बागीपुल, जाओ तक बस से तय होता है। इसके बाद 32 किलोमीटर का कठिन पैदल ट्रैक पार करना होता है। रास्ते में पार्वती बाग, भीम द्वार, नैन सरोवर, भीम बही, बराटी नाला जैसे प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थल आते हैं।

यात्रा में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी, जम्मू-कश्मीर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस बार श्रीखंड ट्रस्ट और जिला प्रशासन कुल्लू द्वारा विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि कोई दुर्घटना न हो और श्रद्धालु सुरक्षित रूप से भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर सकें।