➤ सरिये के दाम में एक सप्ताह में 500 रुपये प्रति क्विंटल तक उछाल
➤ 6000 रुपये वाला सरिया पहुंचा 6500 रुपये प्रति क्विंटल, कुछ उत्पाद 700 से 800 रुपये तक महंगे
➤ बढ़ती कीमतों से सीमित बजट में घर बना रहे परिवारों की बढ़ी परेशानी
भवन निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों ने अपना घर बनवा रहे परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में सरिये के दामों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान सरिया करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल तक महंगा हो गया है। निर्माण सामग्री के दाम में अचानक आई इस बढ़ोतरी का सीधा असर मकान बनाने की कुल लागत पर पड़ रहा है। पहले से तय बजट के आधार पर निर्माण शुरू कर चुके परिवारों के सामने अब अतिरिक्त रकम जुटाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
जानकारी के अनुसार, करीब 6000 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला सरिया अब लगभग 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। हालांकि अलग-अलग कंपनियों के उत्पादों की कीमतों में अंतर है और बाजार में इनके भाव लगातार बदल रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से सरिये के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं, जिससे निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
एक सप्ताह में 500 रुपये तक बढ़े दाम
बिलासपुर जिले के सीमेंट-सरिया विक्रेता पवन बरूर ने बताया कि बीते एक सप्ताह से सरिये के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बाजार में अलग-अलग कंपनियों के सरिये के रेट अलग हैं और कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर करीब 6000 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला सरिया अब लगभग 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। यानी महज एक सप्ताह के भीतर कीमत में करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि देखने को मिली है।
हालांकि सभी कंपनियों के उत्पादों में समान बढ़ोतरी नहीं हुई है। कुछ उत्पादों की कीमत में करीब 700 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। इससे बाजार में सरिये के अलग-अलग ब्रांड के बीच कीमतों का अंतर भी बढ़ गया है।
सोलन में 800 रुपये तक बढ़ने की जानकारी
सरिये की कीमतों में तेजी केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। सोलन जिले में सरिये के दामों में करीब 800 रुपये प्रति क्विंटल तक की वृद्धि होने की जानकारी सामने आ रही है। अलग-अलग क्षेत्रों और कंपनियों के अनुसार कीमतों में अंतर होने के बावजूद तेजी का रुख भवन निर्माण से जुड़े लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
सरिये की कीमत बढ़ने का असर केवल सामग्री खरीदने के समय नहीं पड़ता, बल्कि इससे पूरे निर्माण बजट पर असर पड़ता है। मकान की नींव से लेकर छत और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों तक सरिये का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इसके दाम में मामूली बढ़ोतरी भी बड़ी मात्रा में सरिया खरीदने वाले परिवारों के लिए हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ बन सकती है।
सीमेंट के साथ सरिया भी बढ़ा तो बढ़ेगी मकान की लागत
भवन निर्माण में सरिया और सीमेंट दोनों प्रमुख निर्माण सामग्री हैं। मकान के निर्माण में इन दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में जब सरिये की कीमत बढ़ती है तो इसका सीधा असर निर्माण की कुल लागत पर पड़ता है।
जो परिवार पहले ही अपनी आय और बचत के हिसाब से निर्माण का बजट तय कर चुके हैं, उनके लिए अचानक बढ़ी कीमत सबसे बड़ी परेशानी बन रही है। निर्माण शुरू होने के बाद सामग्री के दाम बढ़ने से तय अनुमान के मुकाबले अधिक राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
विशेषकर मध्यम और सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह स्थिति मुश्किल पैदा कर रही है। उन्हें निर्माण जारी रखने के लिए अतिरिक्त रकम की व्यवस्था करनी पड़ रही है। जिन लोगों ने बैंक लोन, बचत या दूसरी वित्तीय व्यवस्था के आधार पर निर्माण शुरू किया है, उनके लिए लागत बढ़ना आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।
निर्माण कार्य की रफ्तार धीमी करने पर मजबूर परिवार
निर्माण सामग्री के लगातार महंगे होने से कई परिवार अब निर्माण कार्य की गति को लेकर दोबारा योजना बनाने लगे हैं। कुछ लोग जरूरी काम पहले पूरा करने और बाकी निर्माण को बाद के चरण में करने पर विचार कर रहे हैं।
सीमित बजट वाले परिवारों के लिए निर्माण को चरणबद्ध तरीके से पूरा करना एक विकल्प बन रहा है। हालांकि इससे निर्माण की अवधि बढ़ सकती है और आगे चलकर सामग्री के दाम और बढ़ने की स्थिति में कुल खर्च और अधिक हो सकता है।
वहीं जिन लोगों का निर्माण कार्य पहले से चल रहा है, उनके लिए काम रोकना भी आसान नहीं है। निर्माण बीच में रुकने से मजदूरी, परिवहन और दूसरी लागतें भी प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में कई परिवार बढ़े हुए दाम के बावजूद निर्माण जारी रखने को मजबूर हैं।
कीमतों में तेजी जारी रही तो आने वाले दिनों में और बढ़ेगा बोझ
सरिये की मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी ने पहले से महंगाई के दबाव में चल रहे भवन निर्माण क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। यदि आने वाले दिनों में सरिया और अन्य निर्माण सामग्री के दामों में तेजी जारी रहती है, तो मकान बनाने की कुल लागत में और इजाफा हो सकता है।
इसका सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ेगा जिन्होंने सीमित बजट में अपना घर बनाने की योजना बनाई है। निर्माण शुरू करने से पहले तैयार किया गया बजट सामग्री की कीमतों में लगातार बदलाव के कारण बिगड़ सकता है।
बाजार में अलग-अलग कंपनियों के सरिये के भाव में अंतर होने के कारण ग्राहकों के सामने विकल्प तो मौजूद हैं, लेकिन कीमतों में व्यापक तेजी होने पर केवल ब्रांड बदलने से भी समस्या का पूरा समाधान नहीं हो सकता। निर्माण की आवश्यक मात्रा अधिक होने के कारण कुल खर्च पर कीमत बढ़ने का असर बना रहेगा।
घर बनाने वालों के सामने बढ़ी नई चुनौती
अपना घर बनाना लंबे समय से कई परिवारों का सबसे बड़ा सपना रहा है। लोग वर्षों की बचत और आर्थिक योजना के बाद निर्माण शुरू करते हैं। ऐसे में निर्माण सामग्री के दामों में अचानक तेजी उनके पूरे वित्तीय गणित को प्रभावित कर देती है।
मौजूदा समय में सरिये की कीमत में 500 रुपये प्रति क्विंटल तक की सामान्य बढ़ोतरी, कुछ उत्पादों में करीब 700 रुपये और सोलन में 800 रुपये तक की वृद्धि की जानकारी सामने आना इस दबाव को साफ दिखाता है।
अब यदि बाजार में कीमतें स्थिर नहीं होती हैं या इनमें और तेजी आती है, तो सीमित आय वाले परिवारों के लिए घर का निर्माण पहले की तुलना में और महंगा हो सकता है। ऐसे में निर्माण की गति धीमी करने, काम को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने या अतिरिक्त धन की व्यवस्था करने जैसे विकल्प ही उनके सामने रह सकते हैं।



