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शिमला-किन्नौर NH-5 पर बड़ा संकट: निगुलसरी में भूस्खलन से 16 घंटे से बंद हाईवे, सैकड़ों वाहन फंसे

निगुलसरी में भारी भूस्खलन से NH-5 पिछले 16 घंटे से बंद
लगातार गिर रही चट्टानों से सड़क बहाली में आ रही बाधा
प्रशासन की अपील- अति आवश्यक होने पर ही करें यात्रा

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच शिमला-किन्नौर नेशनल हाईवे-5 (NH-5) पर एक बार फिर भूस्खलन ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किन्नौर को शिमला से जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग निगुलसरी के पास बुधवार देर रात हुए भारी लैंडस्लाइड के बाद पिछले 16 घंटे से पूरी तरह बंद पड़ा है। सड़क बंद होने से दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंस गए हैं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, बुधवार रात करीब एक बजे निगुलसरी क्षेत्र में पहाड़ी से अचानक भारी मात्रा में मलबा और विशाल चट्टानें सड़क पर आ गिरीं। इसके बाद से हाईवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। गुरुवार दोपहर तक भी सड़क को यातायात के लिए बहाल नहीं किया जा सका, क्योंकि पहाड़ी से लगातार चट्टानें गिर रही हैं।

निगुलसरी में लैंडस्लाइड और सड़क पर लगी वाहनों की लंबी लंबी लाइनें।

लोक निर्माण विभाग (PWD) की मशीनें और कर्मचारी मौके पर लगातार मलबा हटाने में जुटे हुए हैं। हालांकि, लगातार गिरते पत्थर और बीच-बीच में हो रही बारिश सड़क बहाली के कार्य में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। सुरक्षा कारणों से कई बार मशीनों का काम भी रोकना पड़ रहा है।

हाईवे बंद होने के कारण शिमला और किन्नौर के बीच आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। सड़क के दोनों ओर ट्रकों, बसों, निजी वाहनों और अन्य गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। कई यात्री रात से ही सड़क खुलने का इंतजार कर रहे हैं।

इस बीच प्रशासन ने छोटे वाहनों को सौलडिंग-छोटा कंबा वैकल्पिक मार्ग से भेजना शुरू किया है। लेकिन इस सड़क पर अचानक वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम की स्थिति बन गई है। यही नहीं, बीती रात यह वैकल्पिक मार्ग भी भूस्खलन की वजह से कुछ समय के लिए बंद हो गया था, जिससे स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई।

शिमला-किन्नौर एनएच रात से बंद। यहां पर बार बार पहाड़ी से गिर रही चट्टानें।

नेशनल हाईवे के अधिशासी अभियंता केएल सुमन ने बताया कि सड़क बहाल करने का कार्य लगातार जारी है। मौके पर पर्याप्त मशीनरी तैनात की गई है और मलबा हटाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। जैसे ही पहाड़ी से पत्थर गिरना बंद होगा, सड़क को जल्द से जल्द यातायात के लिए खोलने की कोशिश की जाएगी।

उधर, जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अत्यंत आवश्यक होने पर ही यात्रा करें। यदि यात्रा करना जरूरी हो तो मौसम और सड़क की ताजा जानकारी लेने के बाद ही निकलें तथा प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करें। बारिश के इस दौर में पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है, इसलिए अतिरिक्त सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।