➤ मेयर के कार्यकाल को लेकर एमसी बैठक में जोरदार हंगामा
➤ भाजपा ने पूछा – बिना राज्यपाल मंजूरी किस नियम से पद पर बने हैं मेयर
➤ 2 मार्च को कोर्ट में सुनवाई, रोस्टर के अनुसार महिला आरक्षण का मुद्दा गरमाया
राजधानी शिमला के नगर निगम की मासिक बैठक शुक्रवार को सियासी अखाड़े में तब्दील हो गई, जब मेयर के कार्यकाल को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्षद आमने-सामने आ गए। बैठक शुरू होने से पहले ही भाजपा पार्षदों ने मेयर द्वारा सदन संचालन पर सवाल उठाते हुए जोरदार विरोध दर्ज कराया।
भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर ने सदन में सवाल दागा कि मेयर के कार्यकाल को ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने वाले विधेयक पर अभी तक राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, ऐसे में मेयर किस अधिकार से पद पर बने हुए हैं और सदन का संचालन कर रहे हैं। इस मुद्दे पर दोनों दलों के पार्षदों के बीच तीखी बहस और नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामे के बीच भाजपा पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया।
कुछ देर बाद कांग्रेस पार्षदों के साथ मेयर ने दोबारा बैठक शुरू की, लेकिन विपक्ष ने फिर विरोध तेज कर दिया। भाजपा पार्षदों ने कांग्रेस को महिला विरोधी करार देते हुए कहा कि रोस्टर के अनुसार ढाई साल बाद मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होना था, लेकिन वर्तमान मेयर पद पर बने हुए हैं। इस दौरान मेयर ने भी कड़ा रुख अपनाया और कृष्णानगर के पार्षद बिट्टू पन्ना को निलंबित करने की बात कही, जिस पर हंगामा और बढ़ गया। अंततः भाजपा पार्षद नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए।
भाजपा का आरोप है कि मेयर का ढाई वर्ष का कार्यकाल 14 नवंबर को समाप्त हो चुका है। सरकार द्वारा कार्यकाल बढ़ाने के लिए भेजा गया अध्यादेश 6 जनवरी को समाप्त हो गया, ऐसे में अध्यादेश की समय सीमा खत्म होने के बाद मेयर पद पर बने नहीं रह सकते। भाजपा का कहना है कि नगर निगम को तय रोस्टर के अनुसार महिला आरक्षण लागू करते हुए चुनाव करवाने चाहिए।
उधर, इस मामले पर न्यायिक मोर्चे पर भी हलचल है। मेयर के कार्यकाल विस्तार को चुनौती देने वाली याचिका पर 2 मार्च को अदालत में सुनवाई निर्धारित है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने अदालत से मेयर की नियुक्ति तत्काल रद्द करने की मांग की है।
नगर निगम में हुए इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने वाला है। अब सबकी निगाहें अदालत के फैसले और सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हैं।



