➤ सोलन में चायल-कंडाघाट मार्ग पर रविवार को करीब चार घंटे तक लगा रहा भारी ट्रैफिक जाम
➤ दोची से कल्होग स्कूल तक तीन किलोमीटर लंबी लगी वाहनों की कतारें और फंसे रहे सैकड़ों लोग
➤ स्थानीय निवासियों के साथ चंडीगढ़ जा रहे पर्यटकों को हुई भारी परेशानी और लोगों ने की स्थायी प्रबंध की मांग
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अंतर्गत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल चायल को जोड़ने वाले चायल-कंडाघाट मार्ग पर रविवार को यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। मार्ग पर करीब चार घंटे तक लगे भीषण ट्रैफिक जाम के कारण स्थानीय लोगों और बाहर से आए पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सड़क पर वाहनों का दबाव इतना अधिक था कि दोची से कल्होग स्कूल तक करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिसमें सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन घंटों रेंगते नजर आए।
सड़क पर लगे इस लंबे जाम के कारण कई लोग समय पर अपने जरूरी गंतव्य तक नहीं पहुंच सके और बीच रास्ते में ही फंसे रह गए। ग्राम पंचायत सकोड़ी के पूर्व प्रधान इंदर सिंह ने बताया कि वह किसी बेहद जरूरी काम के सिलसिले में कंडाघाट की ओर जा रहे थे, लेकिन सड़क पर लगे इस भीषण जाम के चलते उन्हें आगे जाने का रास्ता नहीं मिला और मजबूरन साधुपुल से ही अपने घर वापस लौटना पड़ा। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि मार्ग पर सुचारु यातायात व्यवस्था न होने से स्थानीय ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
वहीं चायल के टैक्सी चालक मोंटी ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि वह पर्यटकों को लेकर चायल से चंडीगढ़ छोड़ने जा रहे थे। रास्ते में लगे लंबे जाम में उनकी गाड़ी घंटों फंसी रही, जिससे पर्यटकों को भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ी और उन्हें अपनी आगे की यात्रा में देरी का सामना करना पड़ा। जाम के दौरान कई वाहन चालकों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी पड़ी, लेकिन संकरे रास्तों के कारण स्थिति और विकट हो गई।
स्थानीय निवासियों और कारोबारियों का कहना है कि चायल हिमाचल का एक प्रमुख और खूबसूरत पर्यटन स्थल है। वीकेंड और पर्यटन सीजन के दौरान यहां बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की संख्या में भारी इजाफा हो जाता है। इसके बावजूद सड़क पर यातायात प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण अक्सर जाम की नौबत आ जाती है। स्थानीय जनता ने प्रशासन से मांग की है कि इस संकरे और व्यस्त मार्ग पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कर्मियों की नियमित तैनाती और उचित पार्किंग प्रबंध किए जाएं, ताकि स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी इस तरह की परेशानियों से निजात मिल सके।



