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पर्यटक नदी में उतरे, सो रहा प्रशासन – कौन जिम्मेदार?

➤ कांगड़ा और पालमपुर में पर्यटकों की भारी भीड़ से प्रशासन बेहाल
➤ ऑरेंज अलर्ट के बावजूद न्यूगल नदी में उतरकर जान जोखिम में डाल रहे पर्यटक
➤ डीएम एक्ट के बावजूद नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां

शिवांंशु शुक्‍ला, धर्मशाला


हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा जिला इन दिनों पर्यटकों की बेतहाशा भीड़ से जूझ रहा है। खासकर पालमपुर और सौरभ वन विहार जैसे क्षेत्रों में भारी संख्या में बाहर से आए सैलानी पहुंच रहे हैं। गर्मी से राहत पाने की चाह में ये पर्यटक न्यूगल नदी में जान जोखिम में डालकर नहाने और मस्ती करने से बाज नहीं आ रहे।

हालांकि प्रदेश में मौसम विभाग की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, और कई जगहों पर मौसम खराब भी बना हुआ है, लेकिन पर्यटक सभी चेतावनियों और नियमों को अनदेखा कर नदी के गहरे पानी में बेखौफ तरीके से उतर रहे हैं। ये नजारा न केवल प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल रहा है, बल्कि किसी बड़े हादसे की आशंका को भी जन्म दे रहा है।

जिला प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट आदेश जारी किए थे कि नदी-नालों के पास जाना प्रतिबंधित है, और यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो डीएम एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। लेकिन पालमपुर की न्यूगल नदी में हालात इसके ठीक उलट हैं। वहां पर्यटक खुलेआम प्रशासन की चेतावनी को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं।

स्थिति यह है कि न प्रशासन की टीम मौके पर नजर आ रही है, न ही निगरानी तंत्र सक्रिय है। हेमराज बैरवा, उपायुक्त कांगड़ा ने कहा कि “हमने पूर्व में चेतावनी जारी की थी और किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए लोग सहयोग करें, प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।”

पर्यटकों की इस लापरवाही ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। भीड़ के दबाव में स्थानीय लोग भी परेशान हैं, और अब न्यूगल नदी जैसी संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा इंतजामों की मांग जोर पकड़ रही है। यह स्पष्ट है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो यह मंजर किसी दर्दनाक हादसे में तब्दील हो सकता है।