➤ राजकीय महाविद्यालय ऊना में एंटी-ड्रग्स जागरूकता अभियान आयोजित
➤ पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से किया जागरूक
➤ युवाओं से नशे से दूर रहकर स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की अपील
युवाओं को नशे के बढ़ते दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और समाज में नशामुक्त वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से राजकीय महाविद्यालय ऊना में एंटी-ड्रग्स जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक श्री अशोक तिवारी, IPS ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। वहीं प्रथम भारतीय रिजर्व बटालियन, बनगढ़ की कमांडेंट डॉ. आकृति शर्मा, IPS विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। हिमाचल प्रदेश पुलिस की ओर से सुश्री निकिता ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और विद्यार्थियों को नशे से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नशा केवल किसी एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि इसका असर उसके परिवार और पूरे समाज पर पड़ता है।
विद्यार्थियों से नशे से पूरी तरह दूर रहने की अपील करते हुए वक्ताओं ने कहा कि युवा देश की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति हैं। यदि युवा स्वस्थ, शिक्षित और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो समाज और देश के विकास को नई दिशा मिलेगी। वहीं नशे जैसी सामाजिक बुराई युवाओं की क्षमता और भविष्य दोनों को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी प्रेरित किया कि वे केवल खुद नशे से दूर न रहें, बल्कि अपने मित्रों, परिवार और आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें।

पुलिस और समाज की साझी जिम्मेदारी
अभियान के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि नशे की समस्या से निपटना केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, पुलिस, समाज और युवाओं की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।
वक्ताओं ने कहा कि कानून और प्रशासनिक कार्रवाई नशे के खिलाफ लड़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसके साथ सामाजिक जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। यदि परिवार और शिक्षण संस्थान युवाओं को समय रहते सही दिशा देने में भूमिका निभाएं तो नशे की समस्या को काफी हद तक रोकने में मदद मिल सकती है।
महाविद्यालय के विद्यार्थियों को नशे के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें अपनी ऊर्जा को शिक्षा, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और सकारात्मक कार्यों में लगाने के लिए भी प्रेरित किया गया।

महाविद्यालय प्रशासन की भी रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में राजकीय महाविद्यालय ऊना की प्राचार्य डॉ. मीता शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उनके साथ महाविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. पुनीत कंवर सहित अन्य प्राध्यापक भी मौजूद रहे।
महाविद्यालय के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों से नशामुक्त जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षा के साथ-साथ स्वस्थ आदतों और सकारात्मक वातावरण की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों को नशे से होने वाले नुकसान को समझने और अपने आसपास के युवाओं को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यार्थियों में दिखा खास उत्साह
एंटी-ड्रग्स अभियान में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। विद्यार्थियों ने नशे के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि वे स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने साथियों और समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करने का प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में नशे के दुष्प्रभावों को समझने और इस सामाजिक समस्या के खिलाफ अपनी भूमिका को लेकर सकारात्मक सोच देखने को मिली। उन्हें बताया गया कि किसी भी प्रकार के नशे की शुरुआत छोटी लग सकती है, लेकिन समय के साथ यह व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवार और भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का संदेश
कार्यक्रम में युवाओं को स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि खेलकूद, पढ़ाई, रचनात्मक गतिविधियां और सामाजिक कार्य युवाओं को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
युवाओं को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का इस्तेमाल ऐसे कार्यों में करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिनसे उनके व्यक्तिगत विकास के साथ समाज को भी लाभ मिले। नशे से दूर रहना केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से जरूरी नहीं है, बल्कि यह बेहतर भविष्य और मजबूत समाज के निर्माण से भी जुड़ा विषय है।
नशामुक्त समाज के लिए लगातार प्रयास जरूरी
अभियान के दौरान यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि नशामुक्त समाज का निर्माण किसी एक संस्था के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।
परिवारों को बच्चों और युवाओं के साथ संवाद बनाए रखना होगा। शिक्षण संस्थानों को जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे के खतरों की जानकारी देनी होगी। पुलिस और प्रशासन को नशे के कारोबार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के साथ जागरूकता अभियान भी चलाने होंगे। वहीं युवाओं को स्वयं भी इस मुहिम का सक्रिय हिस्सा बनना होगा।
राजकीय महाविद्यालय ऊना में आयोजित यह अभियान इसी सामूहिक सोच को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास रहा। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने और अपने आसपास भी जागरूकता फैलाने का संदेश दिया गया।
भविष्य में भी जागरूकता कार्यक्रम जारी रखने की प्रतिबद्धता
महाविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और समाज में नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने के लिए भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक दिन विद्यार्थियों को जागरूक करना नहीं, बल्कि उनके भीतर नशे के खिलाफ एक स्थायी और सकारात्मक सोच विकसित करना रहा। विद्यार्थियों की भागीदारी ने भी यह संकेत दिया कि युवा वर्ग नशे की समस्या को गंभीरता से समझ रहा है और इसके खिलाफ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए आगे आने को तैयार है।



