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वीरभद्र और बाली के रिश्तों को याद करते हुए बोले विक्रमादित्य—“दोनों का आत्मीय नाता था”

विक्रमादित्य सिंह ने स्वर्गीय जीएस बाली को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
➤ कहा—संघर्ष, ईमानदारी और जनसेवा की मिसाल थे बाली साहब
वीरभद्र सिंह और जीएस बाली की आत्मीयता को याद करते हुए साझा किए संस्मरण


आज स्वर्गीय जीएस बाली की पुण्यतिथि पर पूरे प्रदेश में श्रद्धांजलि का माहौल रहा। इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने उन्हें अपने खास अंदाज में याद करते हुए कहा कि बाली साहब का जीवन संघर्ष, ईमानदारी, सेवा और मिलनसारिता की जीवंत मिसाल था।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि, “आज उनकी अनुपस्थिति विशेष रूप से खल रही है, क्योंकि मुझे भी इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होना था, परंतु अपरिहार्य कारणों से उपस्थित न हो सका। बाली साहब ने अपने संघर्ष और जनसेवा से वह स्थान बनाया जो दुर्लभ है। उनका जीवन साधारण से असाधारण बनने की कहानी है — व्यवसाय से शुरुआत कर चार बार नगरोटा बगवां के विधायक बने और वीरभद्र सिंह की कैबिनेट में मंत्री के रूप में उत्कृष्ट कार्य किया।”

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विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उनके पिता वीरभद्र सिंह और जीएस बाली के बीच वर्षों पुराना आत्मीयता, परस्पर सम्मान और सहयोग का रिश्ता था। दोनों नेता जनसेवा, सामाजिक न्याय और प्रदेश के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से एक समान सोच रखते थे। उन्होंने कहा कि नीतिगत मतभेद कभी व्यक्तिगत कड़वाहट में नहीं बदले, बल्कि प्रदेशहित सर्वोपरि रहा।

उन्होंने आगे कहा कि बाली साहब का स्वभाव आत्मीय और जमीन से जुड़ा था। परिवहन मंत्री रहते हुए उन्होंने बसों पर अपना मोबाइल नंबर लिखवाया ताकि जनता सीधे शिकायत दर्ज कर सके। वे समस्याओं के समाधान के लिए कई बार स्वयं मौके पर पहुंचे — यह उनके संवेदनशील और कर्मठ व्यक्तित्व को दर्शाता है।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि जीएस बाली युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत थे। उन्होंने हमेशा रोजगार, शिक्षा और जनकल्याण के लिए आवाज उठाई। आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो उनका खालीपन न केवल कांग्रेस परिवार, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश की राजनीति में गहराई से महसूस किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि, “ईश्वर से प्रार्थना है कि बाली साहब की आत्मा को शांति मिले। हम सभी उनके बताए रास्ते पर चलकर समाजसेवा, पारदर्शिता और सकारात्मक राजनीति की दिशा में आगे बढ़ें — यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

कार्यक्रम के दौरान कांगड़ा, नगरोटा और धर्मशाला क्षेत्र में लोगों ने भी उन्हें याद करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की और उनकी सेवाओं को स्मरण किया।