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भारत के तीन सेना नायक, जिनकी देखरेख में चला ऑपरेशन सिंदूर

  • तीनों सेनाओं की अभूतपूर्व एकता: थलसेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया।

  • सेनाध्यक्षों की रणनीतिक भागीदारी: ऑपरेशन की हर गतिविधि तीनों सेना प्रमुखों की सीधी निगरानी में हुई।

  • आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई: भारत ने पहली बार पाकिस्तान में 100 किलोमीटर अंदर तक घुसकर एक साथ 9 आतंकी ठिकानों को पूरी तरह नष्ट किया।


Operation Sindoor: 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में निर्दोष पर्यटकों को मौत के घाट उतारा गया था, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इस दर्द और आक्रोश का जवाब देने के लिए भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय ने तुरंत उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठकें शुरू कीं, जिसके परिणामस्वरूप “ऑपरेशन सिंदूर” की योजना बनी।

इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए भारत की थल सेना के प्रमुख जनरल मनोज पांडे, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी, और नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने मोर्चा संभाला। इन तीनों सेनाध्यक्षों ने दिल्ली स्थित एक संयुक्त युद्ध नियंत्रण कक्ष (War Room) से ऑपरेशन की पल-पल की निगरानी की।

ऑपरेशन सिंदूर की योजना इतनी गोपनीय और सटीक थी कि पाकिस्तान को इसकी भनक तक नहीं लगी। 1:05 बजे रात को ऑपरेशन की शुरुआत हुई और 1:30 बजे तक सभी 9 आतंकी ठिकानों को एक के बाद एक नष्ट कर दिया गया। जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें लश्कर और जैश जैसे संगठनों के ट्रेनिंग सेंटर, लॉन्‍च पैड और हथियार डिपो शामिल थे।

सेना की ओर से कर्नल सोफिया कुरैशी और वायुसेना की ओर से विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने मीडिया को बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह मानवता और नैतिकता को ध्यान में रखते हुए की गई, ताकि किसी नागरिक या रिहायशी इलाके को कोई नुकसान न पहुंचे।

सेनाध्यक्षों का योगदान:

  • जनरल मनोज पांडे ने थल सेना की टुकड़ियों की सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनाती, हाई अलर्ट और इंटेलिजेंस सपोर्ट सुनिश्चित किया।

  • एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी ने वायुसेना की स्ट्राइक यूनिट्स को लीड किया और युद्धक विमानों की सटीक बमबारी की योजना बनाई।

  • एडमिरल आर. हरि कुमार ने भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान को पाकिस्तान की समुद्री हरकतों पर नजर रखने को कहा और नौसेना के जहाजों को अलर्ट पर रखा।

ऑपरेशन के तुरंत बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों से संवाद किया और उन्हें ‘शानदार समन्वय’ और ‘द्रुत कार्रवाई’ के लिए बधाई दी।