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आज के दिन जड़ी-बूटियों की शक्ति समा जाती है इन तीर्थ स्थलों के पानी में

कमलेश बोध |

मनाली के आसपास के सभी तीर्थ स्थलों पर आज सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, क्योंकि आज बीस भादों है और मान्यता है कि देवी देवता भी हजारों जड़ी बूटियों के रस युक्त इस पानी में अपने आप को भी पवित्र करते हैं जिससे उनकी शक्तियां बरकरार रहती है। गौर हो कि बीस भादो के दिन जिला कुल्लू की ब्यास नदी के मनाली से लेकर बजौरा तक के तमाम संगम स्थलों में आस्था की डुबकी लगाई जाती है। जिसमें भूतनाथ और ब्यास पार्वती संगम स्थल भुंतर प्रमुख हैं।

इसके अलावा मणिकर्ण, रूद्रनाग, खीरगंगा, सैंज, तीर्थन, क्लाथ, मनाली, वशिष्ठ, रक्तिसर में आस्था की डुबकी लगती है। लोग तीर्थ स्थलों में डुबकी लगाकर  स्वास्थ्य लाभ पाते है। आज सुबह से ही मनाली के तमाम तीर्थ स्थलों बशिष्ठ, क्लॉथ, निहार थाच वा भृगु लेख आदि तीर्थ स्थलों पर भारी संख्या में लोग जाकर स्नान कर रहे हैं ।

गौरतलब है की निहार थाच व भृगु लेख मनाली से 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित होने के कारण भगतजन कल शाम को ही  पैदल 2 घंटे चलकर पहुंच गए थे। भगतजनों ने अपनी रात वहां पर टेंट में गुजारी वा सुबह होते ही स्नान किया।

यह भी मान्यता है कि कुल्लू के पहाड़ों से निकलने वाली नदियों में शारीरिक कष्टों को दूर करने की भी शक्ति होती है। देवभूमि कुल्लू जिला में भी ब्यास नदी सहित घाटी के नदी नालों और झरनों में भी यह शक्ति आज भी मौजूद है। खासकर 20 भादों के दिन को लेकर देव समाज में खासी मान्यता है। माना जाता है कि 20 भादों के दिन नदी नालों के संगम स्थलों में स्नान करने से शारीरिक कष्टों के साथ-साथ पापों का भी नाश होता है।
 जिसके चलते 20 भादों के दिन में जिला के तमाम नदी नालों के संगमों, झरनों और झीलों में स्नान करने वालों की होड़ रहती है।