➤ सांसद अनुराग ठाकुर ने अमेरिका से आयातित सेब पर टैरिफ कटौती पर चिंता जताई
➤ केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर हिमाचल के सेब किसानों की आजीविका पर असर की बात कही
➤ अमेरिकी रेड डिलीशियस सेब पहले से ही बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ा रहे हैं
Himachal Apple Tariff Concern: पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर अमेरिका से आयातित सेब पर अनुमानित टैरिफ कटौती को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा हिमाचल प्रदेश के लाखों सेब किसानों की आजीविका पर सीधा असर डाल सकता है, जिनका जीवन सेब की खेती पर ही निर्भर करता है।
अनुराग ठाकुर ने पत्र में कहा कि हिमाचल प्रदेश देश में सेब उत्पादन में लगभग 25 फीसदी योगदान करता है, जिसका सालाना उत्पादन लगभग 6.5 लाख मीट्रिक टन है। इसका वित्तीय मूल्य करीब 5,000 करोड़ रुपये होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकांश किसान छोटी भूमि जोत, यानी पांच से 10 बीघा के बीच की जमीन पर ही खेती करते हैं और ऐसे में सेब उत्पादन उनके लिए आय का एकमात्र साधन है।
उन्होंने लिखा कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार चर्चाओं के दौरान, हिमाचल के किसान आशंकित हैं कि यदि टैरिफ में कोई कटौती होती है तो इससे अमेरिका से आयात होने वाले सस्ते सेब देश के बाजार में और तेजी से आएंगे। वर्तमान में भी अमेरिकी रेड डिलीशियस किस्म पहले से ही स्थानीय सेब बाजार को प्रभावित कर रही है, क्योंकि वहां कई संघीय सहायता कार्यक्रमों के चलते उत्पादन लागत बहुत कम है। ऐसे में टैरिफ कटौती से असमान प्रतिस्पर्धा और बढ़ जाएगी, जिससे हिमाचल के बागवानों को गहरा आर्थिक झटका लगेगा।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि सेब उत्पादन हिमाचल की अर्थव्यवस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह केवल व्यवसाय ही नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की पहचान और परंपरा भी है। ऐसे में किसी भी आयात नीति को बनाते समय स्थानीय किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करे और सेब किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए।
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