➤ पीएनबी कुल्लू शाखा में फर्जी दस्तावेजों पर 41 फसल ऋण मंजूर किए गए
➤ सीबीआई अदालत ने पूर्व मैनेजर सहित पांच को सजा और जुर्माने का आदेश सुनाया
➤ 2010-12 के दौरान हुआ घोटाला, बाकी 39 ऋणों पर फैसला अब भी लंबित
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की ढालपुर शाखा में फर्जी दस्तावेजों के जरिए 41 फसल ऋण (केसीसी) स्वीकृत करने के दो मामलों में सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन बैंक प्रबंधक अमर सिंह बोध (अब सेवानिवृत्त) सहित पांच दोषियों को सजा और जुर्माना सुनाया है। न्यायालय ने अमर सिंह बोध को तीन साल की कैद और 70 हजार रुपये जुर्माना, जबकि धर्मचंद, लेख राज और ताशी फुंचोग को चार-चार साल की सजा और बबली शर्मा को तीन साल की कैद सुनाई। सभी दोषियों पर कुल 2.65 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह ऐतिहासिक निर्णय शिमला में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा ने सुनाया है। मामले की जांच सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच, शिमला द्वारा की गई थी, जिसमें मंडी सर्कल प्रमुख राजीव खन्ना की शिकायत पर 11 अप्रैल 2015 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में आईपीसी की धाराओं 420, 467, 468, 471, 120-बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (2), 13 (1) (डी) भी लगाई गई।
जांच के अनुसार, वर्ष 2010 से 2012 की अवधि में तत्कालीन बैंक प्रबंधक ने एजेंटों और बिचौलियों के साथ मिलकर फर्जी राजस्व दस्तावेज और नॉन एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट (NEC) के आधार पर 41 फसल ऋण स्वीकृत किए थे। गंभीर बात यह थी कि लेख राज और धर्मचंद के ऋण आवेदनों पर उनकी तस्वीरें लगी थीं, लेकिन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किसी और के थे। सीबीआई अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि दोषियों के खिलाफ बाकी 39 चार्जशीट पर अदालत का निर्णय आना अभी शेष है।
यह मामला न केवल बैंकिंग तंत्र में भ्रष्टाचार की भयावहता को दर्शाता है, बल्कि राजस्व और ऋण स्वीकृति प्रक्रिया की कमजोरियों को भी उजागर करता है। यह निर्णय भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक मजबूत संदेश देता है कि कानून से बच पाना असंभव है।



