➤ एनएचएआई निरीक्षण टीम को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा
➤ मंडी-धर्मपुर एनएच पर घटिया निर्माण, दो दिन में बैठक न हुई तो चक्का जाम की चेतावनी
➤ स्थानीय लोगों ने कहा—सड़क निर्माण में अनियमितता, सुरक्षा दीवारें नदारद, मिट्टी से फिसलन बढ़ी
विपलव सकलानी, मंडी
मंडी जिले के मंडी-धर्मपुर-कोटली राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के निर्माण में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने एनएचएआई निरीक्षण टीम को घेर लिया। सेवानिवृत्त इंजीनियर बी.डी. जोशी के नेतृत्व में आई एनएचएआई की टीम को सड़कों की हालत देखने पहुंचना भारी पड़ गया। स्थानीय लोगों का आक्रोश इस कदर था कि प्रशासन को मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कंपनी ‘गाबर’ और उसकी सबलेट सहयोगी कंपनियां घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर रही हैं। हाल ही में की गई टायरिंग दो दिन में उखड़ गई। कटाई के कारण लोगों के घरों को खतरा पैदा हो गया है। न तो सुरक्षा दीवारें लगाई गई हैं और न ही धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

अंतरा देवी, सीमा शर्मा और निर्मला देवी जैसी स्थानीय महिलाओं ने बताया कि एक साल से कंपनी अव्यवस्थित कार्यप्रणाली अपना रही है। कई स्थानों पर लोगों के घरों तक जाने वाले रास्ते उखाड़ दिए गए हैं और उन्हें पुनः निर्मित नहीं किया गया। बारिश में जगह-जगह फेंकी गई मिट्टी से फिसलन बढ़ गई है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है।
समाजसेवी प्रो. अनुपमा सिंह ने टीम के समक्ष स्थानीय लोगों की समस्याएं रखते हुए दो दिन के भीतर बैठक की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बैठक नहीं हुई तो सैकड़ों लोग एनएचएआई का घेराव और चक्का जाम करेंगे।
लोगों का यह भी कहना है कि यह सड़क परियोजना पिछले चार वर्षों से चल रही है, लेकिन अब तक निर्माण की गुणवत्ता और कार्य की पारदर्शिता पर सवालिया निशान हैं। यह मार्ग रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बाघा बॉर्डर से लेह को जोड़ता है। फिर भी प्रोजेक्ट में भारी लापरवाही बरती जा रही है।
स्थानीय लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तक शिकायतें पहुंचाई हैं। लेकिन एनएचएआई और गाबर कंपनी की कथित ‘दादागिरी’ के चलते कोई सुधार नहीं हुआ। प्रोजेक्ट मैनेजर अवतार सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि वह मौके का मुआयना करेंगे और यदि किसी तरह की गलती सामने आई तो जांच की जाएगी।
लोगों का यह भी आक्रोश रहा कि स्थानीय विधायक, विपक्ष के नेता और समाजसेवी संस्थाओं के पदाधिकारी इस विषय पर चुप्पी साधे हुए हैं, जो समझ से परे है।



