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वीरभद्र सिंह के ‘दूसरे बेटे’ की वापसी, मंच पर छलका दर्द

➤ वीरभद्र सिंह और डॉ. मंगलेट के रिश्ते राजनीति से ऊपर पारिवारिक भाव में जुड़े
➤ पुत्रवत ममता से भरा चतुर्थ पुण्यतिथि पर प्रतिभा सिंह का सार्वजनिक बयान
➤ राजनीतिक दल बदलने के बावजूद रिश्तों की गर्माहट जस की तस

बालकृष्‍ण सिंह, समाचार फर्स्‍ट


रामपुर के पदम पैलेस में एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की चतुर्थ पुण्यतिथि के अवसर पर चौपाल के पूर्व विधायक डॉ. सुभाष मंगलेट ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। पर यह मुलाकात केवल एक राजनैतिक रस्म नहीं थी, यह एक गहरे पारिवारिक रिश्ते की पुनः पुष्टि थी, जो राजनीति से ऊपर उठकर आत्मीयता से जुड़ा था।

वीरभद्र सिंह और डॉ. मंगलेट के संबंधों की गहराई का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद वीरभद्र सिंह ने उन्हें अपने जीवनकाल में “दूसरा बेटा” कहा था। और जब उनका निधन हुआ, तो डॉ. मंगलेट ने पुत्र धर्म निभाते हुए कंधा देने से लेकर अग्नि संस्कार, अस्थि विसर्जन और गंगा स्नान तक की सभी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभाईं।

समारोह में प्रतिभा सिंह ने डॉ. मंगलेट से आत्मीय मुलाकात के दौरान मंच से भावुक होकर कहा, “आप मेरे लिए मेरे दूसरे पुत्र हैं। चाहे आप किसी भी दल में हों, हमारे रिश्ते राजनैतिक नहीं, पारिवारिक हैं और हमेशा रहेंगे।” यह कथन केवल शब्द नहीं थे, बल्कि उस स्नेह, विश्वास और गहराई का प्रमाण थे जो वीरभद्र सिंह के परिवार और डॉ. मंगलेट के बीच वर्षों से चला आ रहा है।

राजनीति भले ही बदल गई हो, डॉ. मंगलेट आज भाजपा में हैं, लेकिन रिश्तों की गर्माहट, आत्मीयता और आदर ज्यों का त्यों बना हुआ है। तस्वीरों में मुस्कुराहटें हैं, मगर आंखों में एक पुराने रिश्‍ते की नमी भी — एक ऐसा रिश्ता जो न तो सत्ता से बना और न ही दल से टूटा। डॉ. मंगलेट ने भी इस आत्मीय सम्मान को स्वीकार करते हुए प्रतिभा सिंह और विक्रमादित्य सिंह का आभार व्यक्त किया और कहा कि वे आज भी खुद को वीरभद्र सिंह परिवार का हिस्सा मानते हैं। ऐसे में यह कहना कोई गलत नहीं कि राजनीति चाहे जो करवट ले, सच्चे रिश्ते दलों की दीवारों से कहीं ऊपर होते हैं — और जब वह रिश्ता पिता-पुत्र जैसा हो, तो उसमें ना समय की दूरी असर डालती है और ना ही दलों की दूरी।