➤ HMOA ने नियुक्ति को R&P नियमों का उल्लंघन बताते हुए निरस्त करने की मांग की
➤ स्वास्थ्य सेवाओं की बागडोर HPHS चिकित्सकों के हाथों में देने की पुरजोर अपील
RDA protest against IAS appointment: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी डॉ. अश्विनी कुमार शर्मा को निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं (Director, Health Services) के पद पर नियुक्त किए जाने को लेकर प्रदेश में चिकित्सकों के बीच असंतोष और विरोध के स्वर उभरने लगे हैं। इस फैसले के विरोध में डॉ. राजेंद्र प्रसाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (RPGMC), टांडा के रेज़िडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर कड़े शब्दों में आपत्ति दर्ज करवाई है।
RDA रेजिडेंट डाक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डा क्रांति बिष्ट, महासचिव डा आर्यन गुलेरिया और वरिष्ठ उपायध्क्ष डा आदित्य राणा ने एसोसिएशन की ओर से 24 जून 2025 को जारी अधिसूचना (नं. 1-15/73-Dp-Apptt (2025)) को स्पष्ट रूप से भर्ती एवं पदोन्नति नियमों (R&P Rules) का उल्लंघन बताया है। उनके अनुसार निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं का पद केवल हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य सेवा (HPHS) कैडर के वरिष्ठतम चिकित्सकों के लिए पदोन्नति द्वारा आरक्षित है। नियमों में न तो सीधी भर्ती, न ही प्रतिनियुक्ति और न ही गैर-स्वास्थ्य कैडर के अधिकारियों की नियुक्ति का कोई प्रावधान है।
इस विरोध में अब हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (HMOA) की कांगड़ा शाखा भी खुलकर सामने आ गई है। HMOA के अध्यक्ष कैप्टन उदय सिंह, पैटर्न डा राजेश गुलेरिया, महासचिव डा अ्कुंश बड़ायाला ने कहा कि इस निर्णय विभाग की तकनीकी और प्रशासनिक संरचना को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग जैसे विशिष्ट क्षेत्र की बागडोर डोमेन विशेषज्ञ यानी अनुभवी चिकित्सकों को ही सौंपे जाने की पुरजोर वकालत की है।
HMOA कांगड़ा के महासचिव ने ज्ञापन में लिखा है कि IAS अधिकारी को हटाकर HPHS के अधिकारी को निदेशक पद पर तैनात किया जाए, ताकि विभाग की विशेषज्ञता और दिशा बनी रहे। संगठन का कहना है कि यह नियुक्ति चिकित्सा समुदाय के मनोबल को ठेस पहुंचाने वाली है और इससे भविष्य में भी नियुक्तियों को लेकर भ्रम और असंतोष का माहौल बन सकता है।
HMOA ने इसे एक लोकतांत्रिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से गंभीर विषय बताया है और चेतावनी दी है कि यदि इस पर उचित विचार नहीं किया गया, तो यह निर्णय राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकता है। अब यह देखना शेष है कि प्रदेश सरकार इस तेजी से उभरते चिकित्सक समुदाय के विरोध पर क्या रुख अपनाती है।



